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ओ चाँद
तुम अटल सत्य और सुन्दर।
दुःख रुपी काले बादल क्षण के लिए
तुम्हे ढक तो सकते हैं,
किन्तु तुम पुनः चमककर प्रकाशवान हो जाते हो।
क्या हमको सिखाते हो? कि,
दुःखों में भी दुखी मत हो
अटल रहो हमेशा सत्य पर।
विजयी होगे तुम ही।
क्या तुम्हारा प्रतिपल परिवर्तित रूप,
बताता है हमें? कि,
जीवन में समरस होना नीरस है
प्रतिपल परिवर्तन ही नूतनता है
नवरसता है, सुंदरता है और,
जीवन है।
(कवयित्री एम.ए. एवं एम.बी.ए. की शैक्षिक अहर्ता एवं कु.वि. नैनीताल की शोध छात्रा है)

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