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माँ तेरे हाथो की वो रोटी याद आती है
कंडा जोड़ बनाती थी, वो चूल्हा याद आता है
वो सोंधी-सोंधी चटनी, जो सिल-बट्टे पर पीसती थी
वो खुशबू याद आती है

गोधूली बेला में जब पापा संग बतियाते थे
वो आँगन याद आता है
भाई-बहनों की लड़ाई में, जब डांट तुम्हारी पड़ती थी
वो डांट याद आती है

बड़ा सुकून मिलता था जब मैं
आँचल में छुप जाती थी
वो आँचल याद आता है

एक बार फिर से मैं
उन पलों को जीना चाहूंगी
छुपके तेरे आँचल में रोटी खाना चाहूँगी।

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