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समाज
ने
सवाल
उठाया ,
सत्य को मिला
निष्कासन ,
मर्यादा पुरुषोत्तम
राम द्वारा ,
सीता
परित्यक्ता हो गयी ….
समाज
आखिर
सत्य
पर ही
सवाल
क्यों
उठाता है ?
और
यदि
सत्य का साथ
देने की
सामर्थ्य
नहीं ,
तो वो
सत्पुरुष कैसे ?
अपने स्वार्थ
पर ,
समाज में
अपने स्थान
को बनाये
रखने वाले ,
मर्यादा पुरुषोत्तम
राम ,
कर गए
तीन माताओं ,
उपेक्षिता उर्मिला
और
सीता के
हितों का बलिदान .
महापुरुष !
यह कैसा विधान ?

–       निखा कुमार

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