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स्नेह कितना सरल है ,जरा आओ मिल के देंखे।
साथ – साथ हम भी , आओ तो चल के देखें॥ सब बैठे हैं घरों में, सूनी हुई हैं गलियाँ।
फूल हैं मुरझाए, खिलती नहीं हैं कलियाँ॥
दुनियाँ बड़ी सरस है, पर आज क्यों नीरस है।  इस रसमई धरती में, इंसान क्यों विवस है॥
विवसता मिटा दें, जरा इंसान बन के देखें॥

स्नेह कितना सरल है ,जरा आओ मिल के देंखे।
साथ – साथ हम भी , आओ तो चल के देखें॥ कर्म ही है पूजा, उद्दम खुदा हमारा।
स्वार्थ व लिप्सा से, रहता सदा किनारा॥
श्रमेव  जयते , ही  भावना   रही  है ।
सत्यमेव जयते , दुनियाँ ने खुब कही है॥
दुनियाँ के दिलों में , हम प्यार से रहें हैं।
दुनियाँ रही हमारी, सदियों से हम कहे हैं॥
स्वार्थमई दुनियाँ में, परमार्थ करके देखें॥

स्नेह कितना सरल है ,जरा आओ मिल के देंखे।
साथ – साथ हम भी , आओ तो चल के देखें॥  कहना भी कुछ नहीं है, कहना सही नहीं है।
बिन कहे समझों की, कोई कमी नहीं है॥
कहना हो कुछ किसी से, तो कह दो खुशी से। सुख दुख को मिल के बाटें, यह दास्तां सदी से॥
बिन कहे गम को, कैसे कम करोगे।
तुम भी कह के देखो, जरा हम भी कह के देखें॥
स्नेह कितना सरल है ,जरा आओ मिल के देंखे।
साथ – साथ हम भी , आओ तो चल के देखें ॥

-हरि मंगल ‘सलिल’
केमिस्ट , क्षेत्रीय परिक्षण प्रयोगशाला
उत्तरी क्षेत्र -2
पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया
जी टी रोड , करतारपुर
जालंधर , पंजाब

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