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फूल की कलियों से कोमल
नव धरा की एक हलचल
जैसे नभ में तारे झिलमिल
अधखिली वो पंखुड़ी है

देह से परछाई जैसे
सिन्धु से गहराई जैसे
मेघ से बरसात जैसे
वो सदा मुझसे जुड़ी है

तोतले कुछ बोल लेकर
एक परी का भेष है वो
कुछ अधूरे अनकहे से
ईश का सन्देश है वो

(अपनी बेटी को समर्पित)

– संजय वर्मा
साइबर वैली, कोन्दपुर, हैदराबाद

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