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उषा की लाली

रवि रजनी का मिलन मिटा,
मिट गयी क्षितिज काली रेखा।
परकीया निज प्रिय संग लखिके,
छिटकी ऊषा की लाली।।1।।
दहने लगा प्रबल इष्र्यानल,
झुलसी हिय की हरियाली।
नैन बरसने लगे वदन पर,
मोती सी सीकर माली।।2।।
प्रिया प्रीति विपरीत रीति से,
द्विज व्याकुल चिन्ताशाली।
स्व सर्वस्व स्वकीया अर्पी,
सरस प्रणय नव नय पाली।।3।।
मिथुन सार अभिसार मिला जब,
श्वेत हुआ स्वर्णिम थाली।
पथ परिवेक्षणि निरखि निशा फिर,
उमड़ी ऊषा की लाली।।4।।

पूर्णिमा
हीरक नीलाम्बर आवेष्टित,
विहॅस रही राका बाला।
शुभ सुहाग सिन्दूरी टीका,
सोहत है मंगल वाला।।1।।

अलंकृता कल कला प्रेय संग,
पहुँची मानो मधुशाला।
छिन्न भिन्न छकि छकि क्रीड़ा में,
विखरत मोती की माला।।2।।
परदेशी
मोहक अनुरागी अनपरिचित,
दूर देश के वासी।
मायिक आकर्षित तन्त्री की,

बांधेग्रीवा फॉसी।।1।।

अतिथि अनिश्चित वास तुम्हारा,
अन्तिम अमित उदासी।

नाम : डॉ महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’
ईमेल : mp_pandey123@yahoo.co.in

आवासीय पता :

राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिरिया मझोला
पोस्ट- बिरिया मझोला
खटीमा, जिला- ऊधम सिंह नगर
उत्तराखण्ड 262308
माता का नाम : श्रीमती विद्यावती पाण्डेय
पिता का नाम : डॉ विश्वनाथ प्रसाद पाण्डेय
परदेशी जाना है निश्चित,
प्रीति न कर उपहासी।।2।।

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