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हे युवा ! तू वायु बन
जीवनदाता जीवन रक्षक
जीवन को यही चलाती है
भारत जीवन तू रक्षक है
इसलिए तू इसकी आयु बन
हे युवा!तू वायु बन

पल पल बहती,हर पल बहती
पर रुकना इसका काम नहीं
तू भी बहता बहता रहता
पर तुझको अपना भान नहीं
सही दिशा में बहकर तू
सबके मन में दीर्घायु बन
हे युवा!तू वायु बन

कुछ रावण लूट रहे भारत को
कुछ कौरव करते चीरहरण
राम न बन अर्जुन मत बन तू
पर कम से कम तू जटायु बन
हे युवा!तू वायु बन

तुझमें वायु सी शक्ति है
तुझमें वायु सा प्रबल वेग
तू उखाड़ सकता अधर्म को
बस अपने अंतर्मन को देख
करता “स्वप्निल”आह्वान तेरा
तू इस युग का नायक बन
हे युवा तू! वायु बन

नाम : डॉ.स्वप्निल सागर जैन
ईमेल : jain_swap@rediffmail.com
आवासीय पता : 308,फेज 1,अरिहंत विहार कॉलोनी
विदिशा (मध्यप्रदेश)

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