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ह्रदय  आल्हादित हो जाता है
गीत गुनगुनाने लगते हैं
होंठ बरबस ही
मस्ती छा जाती है
समूची देह में
यह जानकर
कि पहुंचने वाली हैं
तुम्हें छूकर आने वाली हवाएं।

आने दो उन हवाओं को
बिना किसी अवरोध के
खोकर उनमें, पूछूंगा मैं
तुम्हारे दिल की बातें।

ये हवाएं ही तो हैं
जो मेरे प्रेमसिक्त ह्रदय का संदेश
पहुंचाती हैं तुम तक
जब नज़र आता है अक्स तुम्हारा
इन हवाओं में
और याद आती हो तुम।

-मृदुल पुरोहित, बाँसवाड़ा।

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