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किसी वीरान हवेली के, अंधेरे कमरे के कुन्ने में एक अजन्मा, अनसुना सा गीत पड़ा कराह रहा है !
वो गीत जिसने करुण क्रंदन से निर्मित शब्दों के बिस्तर की सेज सजाई है !
वो गीत, जो अनदेखे तमाम आँसू अपनी सूखी आँखों में छिपाए बैठा है !
वो गीत, जिसके हर शब्द में —

विरह है, विलाप है,
एक अधूरा सा मिलाप है…

धूप नहीं, अंधेरा है,
विचलित सा एक सवेरा है…

याचना है, प्रताड़ना है,
रहम नहीं, प्रार्थना है…

सफर है, पर मंजिल नहीं है,
लोग हैं, पर काबिल नहीं हैं…

आँसू हैं, आहें हैं,
लुटी-पिटी सी राहें हैं…

ख्याल नहीं, उदास मन है,
धरती प्यासी, बेनूर गगन है…

खाली गागर है, सूखे पनघट हैं,
सावन नहीं है, सिर्फ पतझड़ हैं…

पतझड़ हैं, पर बहार नही है,
डोली है, पर कहार नहीं है…

पत्थर हैं, पर भगवान नहीं है,
भीड़ तो है, पर इन्सान नहीं हैं…

एक निरंतर तलाश है,
टूटा-बिखरा विश्वास है…

इल्जाम हैं, नफरत है,
बेआबरु सी मोहब्बत है…

हाँ, ये वही गीत है, जिसे लेखक अपने शब्दकोष के समन्दर में तैरते शब्दों के मोतियों में पिरो न सका !

वो गीत, जिसे वाद्ययन्त्रों पर नाचती हुई उंगलियों के सहारे किसी संगीतकार ने मधुर और कर्णप्रिय बनाने की कोशिश नहीं की !

वो गीत, जिसे अपने चेहरे की भाव-भंगिमाओं और अभिनय क्षमता के द्घारा कोई कलाकार पेश न कर सका !

वो गीत, जिसे कोयल और पपीहे जैसी मधुर आवाज रखने बाली कोई गायिका अपनी आवाज नहीं दे सकी !

हाँ, यकीनन, वही गीत, आज भी किसी वीरान हवेली के, अंधेरे कमरे के कुन्ने में अजन्मा, अनसुना सा पड़ा कराह रहा है और तलाश रहा है अपनी सुर, लय, ताल को…….

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नाम – नन्दकिशोर ‘सौम्य’
माता का नाम – श्रीमति माण्डवी देवी
पिता का नाम – डॉ. बीरेन्द्र कुमार
पता – 478, मु. – नया खण्डेराव, गैस गोदाम के पास, लौना रोड जालौन, तहसील व थाना – जालौन, जिला – जालौन (उत्तर प्रदेश)
पिन कोड – 285123
व्यवसाय – छात्राध्यापक (बी.टी.सी)

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