3 ग़ज़ल – लेफ़्टिनेंट डॉ.मोहसिन ख़ान

(1)
image

क्यों आजकल लोगों पे अच्छी बातों का असर नहीं होता।
क्यों आदमी का आदमी के साथ अब गुज़र नहीं होता।

मजलिसों, तक़रीरों और नारों से कुछ हासिल हुआ नहीं,
क्यों मुल्क का बिगड़ा हुआ निज़ाम बेहतर नहीं होता।

भूखे, प्यासे, बेघर लोग देखते हैं शीशमहल हैरत से,
क्यों अब इनके हाथों में कोई पत्थर नहीं होता।

मार डाला दरिंदों ने ख़ूबसूरत परिंदे को बड़ी बेरहमी से,
क्यों आसमान में उड़ रहे परिंदों में कबूतर नहीं होता।

सूख जाएँगी एक-एक करके सारी तेहज़ीबों की नदियाँ,
क्यों इन कश्तियों से पार अब समंदर नहीं होता।

अब समझा, बेटी नहीं नूर को बिदा किया था कल मैंने,
क्यों रौशनी होने पर भी घर मेरा मुनव्वर नहीं होता।

राहों की मुसीबतें तो कब की पार कर चुका हूँ ‘तनहा’,
क्यों अब इन पैरों से तय आगे का सफ़र नहीं होता।

©-मोहसिन ‘तनहा’

__________________________________

(2)
image

कभी कुछ ज़्यादा, कभी कमतर हुआ है।
मेरे साथ यही खेल अक्सर हुआ है।

सोचा था पनप जाएगा जगह बदल दें।
फिर पौधा कहाँ हरा उखड़कर हुआ है।

सबकी अपनी अना, सबके अपने मसले,
घर के अन्दर, एक और घर हुआ है।

पहले भी प्यासे थे अब भी प्यासे ही हैं,
जहाँ सहारा था अब वहाँ समंदर हुआ है।

जो जितना सख़्त है उसकी उतनी क़ीमत,
‘तनहा’ दिल तेरा भी क्या पत्थर हुआ है।

©-मोहसिन ‘तनहा’

___________________________________

(3)
image

कितने बदले-बदले से क़िरदार हो गए।
जबसे हम-तुम कुछ समझदार हो गए।

कुछ मशीनों ने किया भूख का सौदा तो,
मर गए हुनर, कुछ हाथ बेकार हो गए।

दोनों थे लोहा, बस एक फ़र्क़ था यही,
हम ढाल बने और तुम तलवार हो गए।

घर के लिए ताले बड़े मज़बूत ख़रीदे,
कितने कमज़ोर अब एतबार हो गए।

‘तनहा’ देखा आईना तो झुका दीं नज़रें,
अपने आप से ही हम शर्मसार हो गए।
image

©लेफ़्टिनेंट डॉ.मोहसिन ख़ान
NCC अधिकारी एवं स्नातकोत्तर हिन्दी विभागाध्यक्ष, शोध निर्देशक, जे.एस.एम. महाविद्यालय, अलीबाग- ज़िला-रायगढ़ (महाराष्ट्र) पिन-402 201

Advertisements

2 विचार “3 ग़ज़ल – लेफ़्टिनेंट डॉ.मोहसिन ख़ान&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s