“देखो अब घूँघट हटा भी दो !”
“नहीं बिल्कुल नहीं…यह घूंघट नहीं हटेगा…कहे देती हूँ |”
“अरे ! अभी से धमकी भरे अल्फाज़ ! विवाह के 10 साल पश्चात क्या करोगी !”
“जो भी करुँगी आपको बर्दाश्त करना होगा ! आखिर पत्नी हूँ तुम्हारी ! और हाँ एक बात और… मुझे कॉफ़ी पीने की इच्छा है जाइए बनाकर लाइए अभी कि अभी !”
“हे भगवान् तुमको पहले मिला था तो होंठों से फूल झर रहे थे ! आज अचानक क्या हो गया ! किसी बात पर नाराज़ हो !” कहते हुए विनय हाथों से घूँघट हटाने का प्रयास करने लगा |
“तुम्हारी इतनी हिम्मत ! दफा हो जाओ यहाँ से..और कॉफ़ी लेकर ही अन्दर आना समझे !”
विनय घबरा सा गया | यह आज एकदम से …चित्रा इतनी विचित्र स्वभाव की कैसे हो गयी ! उसके सरल और शांत स्वभाव के कारण ही तो मैं उससे प्रभावित हुआ था | अपने ही विचारों में खोया विनय चुपचाप कमरे से बाहर चला गया |
घर के हर कोने में सन्नाटा पसरा था | रसोईघर में पहुँच ज्यों ही बत्ती जलाई सामने चाँद से मुखड़े वाली अपनी दुल्हन को देख चौक सा गया |
“अरे तुम यहाँ ! तो वहां कौन है !! तुम्हारा भूत !
“हा हा हा हा भूत से डर कर भाग आए आप ! अरे वो मैं नहीं आपकी साली निधि है ! यह सारा खेल उसी का रचा हुआ है !”

wpid-image.png
डिम्पल गौड़ ‘अनन्या’
अहमदाबाद

Advertisements