यह  अश्क  जो बहते हैं – ओनिका सेतिया ”अनु ”

यह   अश्क   जो   बहते  है  इस तरह  ,
जिंदगी से  इनका   नाता  है इस तरह .

जिंदगी  चाहे हालातों  से  ना उबर  पाए ,
अश्क अपना रास्ता  बनायेगे ही इसी तरह .

जज्बातों  की जहाँ  में  कोई कद्र नहीं   ,
अनदेखी  अश्कों  की होती है इस तरह .

तकदीर और ज़माने  के सताए  हुए हम ,
यह  बेवजह तो नहीं बहते  इस तरह .

अपने   अश्क  खुद पोंछने होते है” अनु ”,
ग़मों  को अपने  संभालो  किसी तरह

अनु_सेतिया

ओनिका सेतिया ”अनु ”

३ इ /४८ ,एन .आई  .टी
फरीदाबाद  (हरियाणा )

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