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अंत ही शुरूआत है…
अंत ही,
शुरुआत है,ये जान लो,
पीछे मुड़कर देखना,
अच्छा नहीं  |

रिश्ते , नाते , प्रेम
और अपनत्व तो,
झूठ ,कपट , जंजाल
का ही नाम है
आज सच्चाई  कैद
स्वयं  में भला,
काल की नजरों में,
वो बदनाम  है,
उम्मीद का भ्रम ,
पालना अच्छा नहीं  |

बहुत उड़ ली देर तक,
नभ  में पतंग
हाथ जिसके डोर,
वो भी  जानता
कठपुतली हाथों की तू,
जिसके  बना
खींच ले गर वो तुझे,
तो बुरा क्यूं मानता
नियति से उलझना ,
अच्छा  नहीं  |

लौटकर आना तुझे,
वापिस यहाँ
नव-सृजन से बनेगी,
नई  पहचान तेरी
समय की पदचाप सुन,
आगे बढो़  !
प्रयाण के आयोजन में ,
तू कर ना देरी
शुभ मुहुर्त टालना ,
अच्छा नहीं   |

अंत ही ,
शुरुआत है ,ये जान लो,
पीछे मुड़कर देखना,
अच्छा  नहीं….

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   -विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी,स.मा. (राज.)322201

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