इंडिया न्यूज ने चलाया कन्हैया का फ़र्जी वीडियो, दफ़्तर पहुँची पूरी पुलिस फ़ोर्स

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बुधवार की रात एक दिलचस्प घटनाक्रम में इंडिया न्यूज़ के नॉएडा स्थित कार्यालय में अचानक पुलिस पहुँच गई जिससे चैनल में हडकंप मच गया. सूत्रों के मुताबिक़ बुधवार की रात प्राइम टाइम में इंडिया न्यूज़ ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार का एक वीडियो दिखाया था जिसमें बताया गया था कि वो कश्मीर की आज़ादी का नारा लगा रहा है. इस वीडियो को नया बताया जा रहा था. थोड़ी देर बाद एबीपी न्यूज़ ने इस दावे का खंडन करते हुए वही वीडियो साफ़ ऑडियो के साथ प्रसारित किया और कहा कि कुछ चैनल इस वीडियो को गलत ढंग से पेश कर के गलत सूचना प्रसारित कर रहे हैं. चैनल ने वीडियो में लगाये गए नारों का ट्रांसक्रिप्शन किया और दिखाया कि कन्हैया कुमार भुखमरी से, मोदी से, संघवाद से आज़ादी का नारा लगा रहा था.

दरअसल, इंडिया न्यूज़ ने जब रात नौ से १०.३० के बीच यह वीडियो चलाया, तो उसने लाइन पर दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को लिया था. जैसे ही चैनल ने दावा किया कि उसके पास कन्हैया के खिलाफ एक वीडियो है, इसे सबूत के तौर पर जुटाने के लिए दिल्ली पुलिस अचानक सक्रिय हो गई और उसने अधिकारियों को चैनल के दफ्तर भेज दिया. थोड़ी ही देर बाद जब एबीपी न्यूज़ ने इस वीडियो को फर्जी करार दिया, तब तक देर हो चुकी थी और पुलिस सबूत जुटाने की जल्दबाजी में इंडिया न्यूज़ पहुँच चुकी थी.

ज़ाहिर है, तुरंत हुए इस खुलासे के बाद इंडिया न्यूज़ के पास पुलिस को देने के लिए कुछ नहीं था और उसका सफ़ेद झूठ पुलिस के सामने ही पकड़ा गया. देर रात तक पुलिस की मौजूदगी से चैनल के आलाकमान में दहशत बनी रही. नतीजा यह हुआ है कि चैनल में ऊपर से आदेश जारी हुआ है कि अब कन्हैया से जुड़ा कोई भी वीडियो इंडिया न्यूज़ पर नहीं दिखाया जाएगा. गुरूवार की सुबह जितने भी बुलेटिन चले हैं, उनमें पुलिस वर्ज़न के अलावा और कोई वीडियो प्रसारित नहीं किया गया है.

साभार – मीडिया विजिल

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30 विचार “इंडिया न्यूज ने चलाया कन्हैया का फ़र्जी वीडियो, दफ़्तर पहुँची पूरी पुलिस फ़ोर्स&rdquo पर;

  1. कन्हैया के माता पिता बेगुसराय और कन्हैया दिल्ली में फिर यह दावा कैसे कर सकते कन्हैया के माता पिता और भाई कि कन्हैया ऐसा नहीं कर सकता ? उदाहरण के तौर पर कोई उदाहरण दिया जाय और इन्टरव्यू के दौरान ये सवाल क्यों नहीं किया गया?

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  2. खुलने लगी इस्लाम के खिलाफ मीडिया की साजिशें
    इस्लाम और मुसलमान को तरह तरह से आतंकित करने की साजिशों में मीडिया का अहम रोल रहा है। पहले आतंकवाद के नाम पर फिर लड़कियों को आगे रखकर और फिर गायों को मोहरा बनाकर आरएसएस व अमेरिका ने मुसलमान को आतंकित करने में कसर नहीं छोड़ी। अमेरिका व आरएसएस के इस्लाम मिटाओं अभियान में भारतीय रंग बिरंगी मीडिया का अहम किरदार रहा है। मामला चाहे मालेगांव धमाकों का हो या मक्का मस्जिद उड़ाने की कोशिश का, बात चाहे समझौता एक्सप्रेस उड़ाने की साजिश की हो या अजमेर दरगाह की, बम्बई धमाके हो या दिल्ली हाईकोर्ट धमाके हर बार धमाके की आवाज से पहले ही आरएसएस लाबी की मीडिया जिम्मेदारों के नामों की घोषणाये करने लगती है दिल्ली हाईकोर्ट गेट धमाके के मामले में तो एक चैनल ने हद ही कर दी थी कि चैनल के पास ईमेल भी आने लगी थी, मानों जैसे धमाके करने वालों के पास किसी सरकारी एजेंसी का ईमेल एडरेस नही था या फिर दूसरे मीडिया कार्यालयों का भी ईमेल एडरेस नहीं था, बस कथित चैनल का ही ईमेल आईडी थी, हमने उसी वक्त कहा था कि ये मेल सिर्फ साजिश है।
    http://avnn.in/sampaikiye.php?id=626#.Vsk7y3195ko

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  3. यस ,आई स्टेंड विद जेएनयू
    ……………………………
    यह जानते हुये भी कि
    वानरसेना मुझको भी
    राष्ट्रद्रोही कहेगी ।
    काले कोट पहने
    गुण्डों की फौज
    यह बिल्कुल भी
    नही सहेगी ।
    तिरंगा थामे
    मां भारती के लाल
    मां बहनों को गरियायेंगे ।
    दशहतगर्द देशभक्त
    जूते मारो साले को
    चीख चीख चिल्लायेंगे ।
    जानता हूं
    मेरे आंगन तक
    पहुंच जायेगा,
    उन्मादी राष्ट्रप्रेमियों के
    खौफ का असर ।
    लम्पट देशप्रेमी
    नहीं छोड़ेंगे मुझको भी ।
    फिर भी कहना चाहता हूं
    हॉ, मैं जेएनयू के साथ खड़ा हूं।

    क्योंकि जेएनयू
    गैरूआ तालिबानियों
    की तरह,
    मुझे नहीं लगता
    अतिवादियों का अड्डा
    और देशद्रोहियों का गढ़ ।
    मेरे लिये जेएनयू सिर्फ
    उच्च शिक्षा का इदारा नहीं है ।
    मुझे वह लगता है
    भीड़ से अलग एक विचार ।
    कृत्रिम मुल्कों व सरहदों के पार ।
    जो देता है आजादी
    अलग सोचने,अलग बोलने
    अलग दिखने और अलग
    करने की ।
    जहां की जा सकती है
    लम्बी बहसें ,
    जहां जिन्दा रहती है
    असहमति की आवाजें ।
    प्रतिरोध की संस्कृति का
    संवाहक है जेएनयू ।
    लोकतांत्रिक मूल्यों का
    गुणगाहक है जेएनयू ।
    यहां खुले दिमाग
    वालों का डेरा है ।
    यह विश्व नागरिकों का बसेरा है ।

    मैं कभी नहीं पढ़ा जेएनयू में
    ना ही मेरा कोई रिश्तेदार पढ़ा है।
    मैं नहीं जानता
    किसी को जेएनयू में ।
    शायद ही कोई
    मुझे जानता हो जेएनयू में ।
    फिर भी जेएनयू
    बसता है मेरे दिल में ।
    दिल्ली जाता हूं जब भी
    तीर्थयात्री की भांति
    जरूर जाता हूं जेएनयू ।
    गंगा ढ़ाबे पर चाय पीने,
    समूहों की बहसें सुनने
    वहां की निर्मुक्त हवा को
    महसूस करने ।
    जेएनयू में मुझको
    मेरा भारत नज़र आता है।
    बस जेएनयू से
    मेरा यही नाता है ।

    रही बात
    देशविरोधी नारों की
    अफजल के प्रचारों की
    यह करतूत है
    मुल्क के गद्दारों की ।
    बिक चुके मीडिया दरबारों की ।
    चैनल चाटुकारों की ,
    चीख मचाते एंकर अय्यारों की ।
    वर्ना पटकथा यह पुरानी है।
    बुनी हुई कहानी है ।
    नारे तो सिर्फ बहाना है।
    जेएनयू को सबक सिखाना है।
    स्वतंत्र सोच को मिटाना है।
    रोहित के मुद्दे को दबाना है ।
    अकलियत को डराना है।
    दशहतगर्दी फैलाना है।
    राष्ट्रप्रेमी कुटिल गिद्दों ,
    तुम्हारी कही पर निगाहें
    कहीं पर निशाना है।
    असली मकसद
    मनुवाद को वापस देश में लाना है।

    पुरातनपंथियों,
    वर्णवादी जातिवादियों,
    आजादी की लड़ाई से
    दूर रहने वाले
    अंग्रेजों के पिठ्ठुओं ,
    गोडसे के पूजकों ,
    गांधी के हत्यारों ,
    भगवे के भक्तों,
    तिरंगे के विरोधियों,
    संविधान के आलोचकों ,
    अफजल को शहीद
    कहनेवाली पीडीपी के प्रेमियों,
    हक ही क्या है तुमको
    लोगों की देशभक्ति पर
    सवाल उठाने का ?

    बिहार के एक
    गरीब मां बाप का बेटा
    जो गरीबी, भुखमरी,
    बेराजगारी,बंधुआ मजदूरी,
    साम्प्रदायिकता और जातिवाद
    से चाहता है आजादी

    फासीवाद समर्थक
    आधुनिक कंसों !
    तुम्हें संविधानवादी
    एक कन्हैया भी बर्दाश्त ना हुआ।
    तुम्हें कैसे बर्दाश्त होंगे
    हजारों कन्हैया,
    जो किसी गांव, देहात
    दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक
    या पिछड़े वर्ग से आते हो,
    और पढ़ते हो जहां रह कर,
    वो जगह ,कैसे बरदाश्त होगी तुमको ?
    मनुस्मृति और स्मृति ईरानी
    दोनों को नापसंद है यह तो।
    इसलिये शटडाउन
    करने का मंसूबा पाले हो।
    वाकई तुम बेहद गिरी
    हरकतों वाले हो ।

    जेएनयू को तुम
    क्या बंद कराओगे ?
    जेएनयू महज
    किसी जगह का नाम नही ।
    मात्र यूनीवर्सिटी होना ही
    उसकी पहचान नही ।
    जेएनयू एक आन्दोलन है,
    धमनियों में बहने वाला लहू है।
    विचार है जेएनयू
    जो दिमाग ही नही
    दिल में भी बस जाता है।
    इसे कैसे मारोगे ?
    यह तो शाश्वत है,
    जिन्दा था, जीवित है
    जीवंत रहेगा सदा सर्वदा।
    तुम्हारे मुर्दाबादों के बरक्स
    जिन्दाबाद है जेएनयू
    जिन्दाबाद था जेएनयू
    जिन्दाबाद ही रहेगा जेएनयू ।
    उसे सदा सदा
    जिन्दा और आबाद
    रखने के लिये ही
    कह रहे है हम भी
    स्टेंड विद जे एन यू ।

    जेएनयू
    अब पूरी दुनिया में है मौजूद
    हर सोचने वाले के
    विचारों में व्यक्त हो रहा है जेएनयू ।
    शिराओं में रक्त बन कर
    बह रहा है जेएनयू ।
    लोगों की धड़कनों में
    धड़क रहा है,
    सांसे बन कर
    जी रहा है जेएनयू ।
    वह सबके साथ खड़ा था
    आज सारा विश्व
    उसके साथ खड़ा है
    और कह रहा है –
    वी स्टेंड विद जेएनयू ।

    मैं भी
    अपनी पूरी ताकत से
    चट्टान की भांति
    जेएनयू के साथ
    होकर खड़ा
    कह रहा हूं,
    यस ,आई स्टेंड विद जेएनयू
    फॉरएवर ।
    डोन्ट वरी कॉमरेड कन्हैया
    वी शैल कम ओवर ।
    वी शैल फाईट
    वी शैल विन ।

    मुझे यकीनन यकीन है
    जेएनयू के दुश्मन
    हार जायेंगे ।
    मुंह की खायेंगे ।
    दुम दबायेंगे
    और भाग जायेंगे।
    जेएनयू तो
    हिमालय की भांति
    तन कर खड़ा रहेगा
    अरावली की चट्टानों पर,
    राजधानी के दिल पर,
    लुटियंस के टीलो की छाती पर ….

    -भंवर मेघवंशी
    स्वंतत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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  4. मुझे सिर्फ इतना बता दिजीऐ राहूल गांधी किसका साध दे रहे है ।।उसका जो देश विरोधी नारे लगाते है।मुद्दा ये जब ये सब हो रहा तो ये कन्हैया चुप क्यो था वहा । ये तो अध्यक्ष हे ना छात्र संघ का ।।उसे तो पता होगा ये सब होने वाला है।।और ये कन्हैया उमर खालिद के साथ क्या कर रहा था ।।

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  5. मुझे सिर्फ इतना बता दिजीऐ राहूल गांधी किसका साध दे रहे है ।।उसका जो देश विरोधी नारे लगाते है।मुद्दा ये जब ये सब हो रहा तो ये कन्हैया चुप क्यो था वहा । ये तो अध्यक्ष हे ना छात्र संघ का ।।उसे तो पता होगा ये सब होने वाला है।।और ये कन्हैया उमर खालिद के साथ क्या कर रहा था ।।

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  6. पहले खबर का हेडर सही करें । जब इंडिया न्यूज़ ने खबर गलत दिखाई है तो इंडिया न्यूज़ लिखो।
    और यहाँ मै देख रहा हूँ कुछ ऐसे कमेंट भी हैं की जो बिना खबर को पढ़े उसके हेडर(हेड लाइन) के आधार पर ही अपना फैसला सूना दे रहे हैं। इतनी भी अंध भक्ति ना करो यारो की हसी के पात्र के सिवाय कुछ ना रह जाए।

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  7. ABP, aaj tak, ND TV ये तीन चैनल कभी ददेशभक्ति हित की बात नहीं करते हैं ना किसी शहीद फौजी के अंतिम समय की गाथा दिखाते है, हिंदु मुस्लिम का दंगा यही कराते है सिर्फ पैसे के लिए

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