buffaloएक थे सुदामा राय..जिला बलिया द्वाबा के भूमिहार,एक मेहनती किसान,एक बड़े खेतिहर.
कहतें हैं उनके पास दो गाय और एक भैंस थी..

एक साँझ की बात है..राय साहेब गाय भैंस को खिला पिलाकर झाड़ू लगा रहे थे.तब तक क्षेत्र के एक प्रसिद्ध पशु व्यापारी आ धमके..
व्यापारी जी ने भैंस जी को बड़े प्यार से देखा..आगे-पीछे,दांये-बांये,ऊपर-नीचे…मानों वो भैंस नहीं साक्षात होने वाली महबूबा को देख रहे हों।.
कुछ देर तक लगातार भैंस जी को देखने के बाद व्यापारी जी राय साब से मुखातिब हुये. और धीरे से कहा…
“राइ साब अब तो इ भैंसीया बेच दिजिये महराज..हम आज दो साल से आपसे मांग रहे हैं..समझ नहीं आ रहा कि इसका कौन सा अँचार डालेंगे आप..”

राय साहेब के कान पर जूं तक न रेंगी..दुआर को खरहर से बहारते रहे….नाद,चरन साफ करते रहे..भूसा,लेहना,सानी-पानी करते रहे..
बड़ी देर बाद खरहर रखकर बुलंद आवाज में कहा……” “भाई व्यापारी जी…इ भैंस तो हम कब्बो नहीं बेचेंगे..आप चाहें दस लाख क्यों न दें..काहें कि ये बड़ी दुर्लभ चीज है….बहुत ज्यादा”
व्यापारी जी को घोर आश्चर्य..उन्होंने झट से पूछा..”बे महाराज कइसन दुर्लभ…कौन सा मोती झर रहा?..दूध कुछ ख़ास नहीं..नैन-नक्श,डील-डौल भी बेकार है..मरखाह भी बहुत है…आ हम अच्छा खासा पैसा दे रहे तो भी आप नहीं बेच रहे..आखिर का बात है…कवन ऐसी खूबी है,बताइये जरा ?
राय साहेब ने झट से खुद को सम्भाला और कहा….
“तुम नहीं समझोगे भाई..ये बड़ी चरित्रवान भैंस है..”

व्यपारी जी हँसे…. “चरित्रवान भैंस..
मने का मजाक कर दिये राय साहेब..अरे इहाँ गाय भैंस खरीदते बेचते बुढ़ौती आ गया जी..बाल पक कर झड़ गये हमारे…सरवा आज तक हम हजारों भैंस किने बेचे लेकिन चरित्रवान भैंस का नाम तक नहीं सुना..तनी सुरती खिलाइये आ खुलासा समझाइये..बात का है?”

राय साब खैनी की डिबिया निकाले और व्यापारी जी की तरफ बढ़ाते हुये प्रेमपूर्वक बोले….
“भाई इ जो भैंस है न..बहुते चरित्रवान है…रिकार्ड है कि आज तक एक ही भैंसा से गाभिन हुई है..मने दूसरे भैंसा को तो पास सटने नहीं देती.. बहुत चरित्रवान है..एकदम से पतिव्रता भैंस”
व्यापारी खूब हंसा…लगातार हंसा.

आप भी हंस सकतें हैं..
लेकिन इधर दो तीन दिन से मैं हंस नहीं रहा, मैं उदास हूँ..
फेसबुक,ट्वीटर पर मैं पढ़ता ज्यादा, लिखता कम हूँ..
दो चार दिन से कई नामी गिरामी सर्टिफाइड बुद्धिजीवियों को पढ़ चुका..
इनको पढ़ता रहा लगातार और मुझे सुदामा राय की वो चरित्रवान भैंस याद आती रही..

देख रहा कि ये वही चरित्रवान बुद्धिजीवी हैं..जो अकलाख की मौत के बाद तुरन्त गर्भवती हो गये थे..और असहिष्णुता नामक बच्चे को जन्म देकर दुनिया भर में ढिढोरा पीट दिया था..
“हाय! भारत रहने लायक नहीं रहा…’
इस प्रसव की खुशी में न जाने कितने अपनी हरी हरी चूड़ियाँ तोड़ पुरस्कार तक वापस करने लगे थे..
मोदी संघ को पानी पी पी कर इस अंदाज में गरियाने लगे थे, मानों मोदी ने अकलाख की हत्या अपने हाथों से की हो..
वो तो भला हो बिहार चुनाव में भाजपा के रिजल्ट का…सब एकाएक सही हो गया..बिहार में राम राज्य आ गया..लव कुश गद्दी सम्भाल लिये।वरना अल्लाह जाने और क्या क्या पैदा हो गया होता।
कुछ इस ख़ुशी में लौटाया हुआ पुरस्कार वापस ले आये।

लेकिन इधर देख रहा असहिष्णुता साइलेंट मोड में बहुत दिन से है..केरल में संघ के कार्यकर्ता सन्दीप की हत्या, उसके माँ बाप के सामने घर में घुसकर मार्क्सवादी गुंडों ने कर दी..कर्नाटक में लगातार संघ के कार्यकर्ता मारे गये…
उधर प्रशांत पुजारी की हत्या हुई..
वैसे इ सब तो संघी हैं.
वो बस्तर दंतेवाड़ा में रोज नक्सली, मासूम आदिवासी और सैनिकों की लगातार हत्या कर रहे हैं..उनकी भी कोई खोज खबर नही।
पता न क्यों असहिष्णुता पैदा ही नहीं हो रही।

न इनकी कविता आ रही न लेख छप रहे..न बड़े बड़े इंटरव्यू हो रहे..
आखिर कैसे हो जाय..?
अब पंकज नारंग बेचारे उत्तराखण्ड के घोड़े थोड़े हैं… न ही वो नसीम,नदीम,अकलाख,अफज़ल,याकूब या रोहित वेमुला हैं।

अब किसी आदिवासी,सैनिक या किसी संघी के लिये रो कर का मिलेगा भाई?
सो बेचारे बता रहे कि “अरे ये तो साधारण सी छोटी मोटी घटना है..ये तो आये दिन होती रहती है..इ उस टाइप की नही है..असहिष्णुता टाइप.. की पुरस्कार लौटाना पड़े…अरे मारने वाले हिन्दू भी थे….न जाने कितनी हत्या रोज देश में हो रही..ये कोई बड़ी बात नहीं.”

हाय!देखिये तो जरा..अकलाख रोहित की मौत पर कविता करके कई लीटर आंशू बहाने वाले अब मौत का वर्गीकरण कितनी होशियारी से कर रहे हैं….छोटी मौत, बड़ी मौत, कम्युनल मौत,सेक्यूलर मौत,दलित मौत,सवर्ण मौत।
एक गंवार भी जानता है कि मौत और हत्या तो हत्या होती है..जिसमें किसी की जान चली जाती है…वो चाहें अकलाख की हो या सन्दीप की..डॉक्टर नारंग मारे जाएँ या कल हम आप मारें जाएं..
हर बार हिन्दू मुसलमान से पहले आदमी मरता है.
संवेदना का ये तकाजा है की वो सबके लिये बराबर हो..
लेकिन नहीं…संवेदना के ये सर्टिफाइड होल सेलर ऐसा न सोचकर सिर्फ बौद्धिक दलाली कर रहे हैं।..
मौत का टाइप देखकर निकलने वाले इनके घड़ियाली आंसू महज फरेब हैं। ये वैचारिक उल्लू सीधा कर रहे।
इन्हें न रोहित वेमुला से मतलब है न अकलाख की मौत से दुःख..न उत्तराखण्ड के घोड़े की टांग से हमदर्दी।
वरना केरल के सन्दीप,और कर्नाटक के संघ कार्यकर्ता. बस्तर अबूझमाड़ में मारे जा रहे आदिवासी…डाक्टर पंकज नारंग के लिये भी जरूर दो चार बून्द टपक जाता।
लेकिन ऐसा सोचना बेवकूफी है…
ये दलाल बुद्धिजीवी वही सुदामा राय के खूंटे में बंधे चरित्रवान भैंस हैं..जो हमेशा एक खास किस्म के वैचारिक भैंसा से गर्भधारण करतें हैं..

©http://atulkumarrai1.blogspot.in/2016/03/blog-post_27.html

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(अतुल कुमार राय के फेसबुक वाल से)

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