हम किसी से कम नही
हम किसी से कम नही

न जाने कैसा हुआ ये समां
वो कैसे आया एक झोंका हवा का
दिल तोड़ गया सारे अरमानों का
पिघला गया बने हुए खरे सोने को
कर गया उनका मोल रिश्तो से
जो बनने से पहले बिखर गये
तो उन फूलों का आशियाना बनाये भी तो कैसे
जो खिलनें से पहले ही मुरझा गये
बात करते है निभाने की अपना धर्म
जिन्हें ये ही नही पता क्या है उनका कर्म

ले जा तू ये सन्देशा उनको
और जा के बता दे कि यहाँ वो हीरा रहता है
जो भले ही पत्थर से बना हो
फिर भी किसी के सिर का ताज बना हुआ हैं।
अब देख लो, देखने वालो
सुन लो सुनने वालो, हम क्या है
भले ही छोटा-सा पत्थर ही सही
लेकिन अनमोल कोहिनूर का हीरा हैं।

मनीषा जाजोरिया

मनीषा जाजोरिया

(नव लेखन प्रोत्साहन हेतु प्रकाशित)

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