Acharya Balwant

खतरे में सम्मान देश का।
क्या होगा भगवान देश का!
देश में ऐसी हवा चली है,
बदल गया ईमान देश का।
क्या होगा भगवान देश का!

आए दिन घपला-घोटाला
दाल में है काला ही काला।
झुग्गी-झोपड़ियों के अंदर,
सिसक रहा अरमान देश का।
क्या होगा भगवान देश का!

बदल गयी भावों की भाषा।
बदली मूल्यों की परिभाषा।
नाम, पता और परिचय बदला,
बदल गया परिधान देश का।
क्या होगा भगवान देश का!

स्वार्थ की ऐसी आँधी आयी।
अपनी पीड़ा हुई परायी।
सबको अपनी-अपनी धुन है,
नहीं किसी को ध्यान देश का।
क्या होगा भगवान देश का!

मन में कोमल आशा लेकर।
अधरों पर अभिलाषा लेकर।
कब तक अपनी देह छिपाये,
चिथड़ों में ईमान देश का?
क्या होगा भगवान देश का!

Acharya Balwant
Acharya Balwant

आचार्य बलवंत

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