शहाबुद्दीन
शहाबुद्दीन

बात कितनी चले, वजन के लिए घटना जरुरी है।
चीज चमकदार सही, कीमत के लिए बिकना जरूरी है।

आया तूफ़ां तो लगा इक बारगी सब साफ होगा अब।
गर्द ओ गुबार मगर,सच के लिए हटना जरूरी है।।
है जंगलराज तभी ‘सीवान’पर हैवान हावी है।
जुल्म ओ कानून की, खाई के लिए ‘पटना’जरुरी है।।

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