Jab se guzra hoon un raaton se

जब से गुज़रा हूँ इन बातों से

Jab se Guzra Hoon un raaton se

वह औरत जो सुहागिन
बनी रहने के लिए
करती है लाख जतन
टोना-टोटका से मन्दिर में पूजा तक
अपने पति से कह रही है —
तुम कारगिल में काम आए होते तो
पन्द्रह लाख मिलते
अब मैं तुम्हारा क्या करूँ
जीते जी तुम
मकान नहीं बना सकते ।

कह रहे हैं हमदर्द
साठ साल के पिता की बीमारी के बाद
वे चले गए होते तो
अच्छा होता, उनकी जगह
उनका बेटा लग जाता ।

बैरागी का वह हुनरवान लड़का
जो चारों में अव्वल है
बाप से लड़ रहा है
मैं तुम्हारे यहाँ क्यों पैदा हुआ ।

कालेज में एडमीशन के समय
कैटेगरी पूछे जाने पर
एक लड़की दे रही है जवाब
मैं उस जाति से हूँ
जिसे अब कोई नहीं पूछता ।

मित्रों जब से गुज़रा हूँ इन बातों से
तब से लगता है मेरी कनपटी पर
एक कील गड़ी है
आपको भी गड़े इसके पहले
कोई उपाय सुझाइए
जल्दी कीजिए
दर्द बेतहाशा बढ़ता जा रहा है ।

Anil Tripathi

अनिल त्रिपाठी

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s