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रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

रहें ज़िन्दा वतन के लिए, वतन के लिए ही खाक हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

करें मुहब्बत सभी से, मुहब्बत के हम शैदाई हो
करें उल्फ़त सदा वतन से, ना हमारी वतन से जुदाई हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

यहाँ कोई पराया ना हो, सभी अपने ही अपने हो
गम मिलकर सब का मिटाएं, बेगानों के गम भी अपने हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

महके खुशियों के चमन से वतन, गम हमसे कौसों दूर हो
फैले रौशनी सभी सिम्त इल्म की, चारों ओर नूर ही नूर हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

करें परदेश में ऐसे अमल, मक़सद भारत का मान हो
कहें देखकर हमें विदेशी सारे, मुल्क हमारे भी भारत समान हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

हिन्दू हो या हो मुस्लिम, या देश का कोई बिरादर हो
करें हर एक खिदमत-ए-वतन, जहां में भारत का आदर हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

रहें जज़्बा हमारा हिमालय सा, हर भारतवासी तेरा रखवाला हो
रहें मोम अपनों के लिए, दुश्मनों को जलाएं ऐसी ज्वाला हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

मक़सद रहे सभी का, मेरे वतन का निहार हो
रहे तेरे लिए सदा, जान को तुझपे ही करार हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

रहें तन्हा या हो साथ, सब वतन पर निसार हो
तेरे लिए ही जीना वतन, जान तुझ पे ही निसार हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

दुःख में हो या सुख में, चाहें कैसे भी गुजारा हो
रहें हम किसी भी हाल में, ज़हन में अमन का नजारा हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

गुनाहों से हमारी दूरी हो, ज़ुल्मत का वतन से ख़ात्मा हो
फैले रौशनी जहाँ में हमारी, भारत जहाँ का महात्मा हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

रहें गर्दिशों में सदा हम, सदा हमारे ऐसे जतन हो
रहें सारे जहाँ में चमकता, सितारों सा हमारा वतन हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो

ये दिल-ए-“आबिद” की दुआ, कयामत तक वतन आबाद हो
सर सब्ज़ हो वतन हमारा, कायनात में सदा शादाब हो
रहें सलामत वतन हमारा, वतन का ही नाम हो |

आबिद हुसैन शेख़
आबिद हुसैन शेख़

बागोर तह मंडल, भिल्वारा, राजस्थान

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