Subsidised Gas on Aadhar Card

मेरी गैस की सब्सिडी बंद हो गई। हमेशा की तरह हड़काने पर एजेंसी वाला नहीं हड़का, बल्कि इस बार उसने लिख कर और मुहर मार कर दे दिया कि बिना आधार के सब बेकार है। मेरा इकलौता निजी बैंक खाता बंद होने के कगार पर आ गया है। एक संभावनाशील संयुक्‍त खाते की केवाइसी के अभाव में भ्रूण हत्‍या हो गई है। दूसरे संयुक्‍त खाते से मेरा नाम कट गया है। सीए ने कहा है कि 1 जुलाई से मेरा पैन कार्ड भी बंद हो जाएगा। ड्राइविंग लाइसेंस बरसों पहले गल चुका है। चौतरफा दबाव में मैं यूआइडी की साइट पर पहुंचा और पाया कि ईश्‍वर सामने वाली गली में है- ”बालाजी पैन एंड आधार एजेंसी”।

सैद्धांतिक संकल्‍प की बलि चढ़ाने के उत्‍साह में उछलते हुए मैं बालाजी के दरवाज़े पहुंचा। दो लौंडे बैठे थे। मैंने पूछा- भाई साब, आधार बन जाएगा? वे बोले- हां जी, क्‍या लाए हैं? मैंने पैन कार्ड दिखाया तो उन्‍होंने एड्रेस प्रूफ मांगा। वो मेरे पास था नहीं। मैंने अपनी पत्‍नी का आधार दिखाया जिस पर उनके मायके का पता दर्ज था। एक लौंडे ने दूसरे से कहा- कर दे यार! दूसरे ने अहसान जताया- ‘वैसे हम लोग पति के पते पर पत्‍नी का आधार बनाते हैं, लेकिन चलिए, आपका कर देते हैं।’ फॉर्म पर प्रूफ की जगह उसने रेंट अग्रीमेंट पर सही का निशान लगा दिया। मैंने पूछा ये चलेगा? ‘आप टैंसन न लो सरजी’, जवाब मिला। अपराधी की तरह दस उंगलियां छापकर और आंख की पुतली नपवा कर मैं आश्‍वस्‍त हो गया।

पान दबाते हुए मैंने ऐंवेई पूछा- आप तो ऑथराइज्‍़ड सेंटर हैं न? पहले लौंडे ने कहा- ‘नहीं, प्राइवेट’। मैंने उसे यूआइडी की वेबसाइट पर प्रकाशित सेंटर लिस्‍ट दिखाई जिसमें उसका नाम-पता दर्ज था। थोड़ा गंभीर मुद्रा बनाते हुए लड़के ने कहानी सुनाई जो कुछ यूं है: ”ऐसा है कि मोहनजी के नाम पर एजेंसी रजिस्‍टर हुई थी इसी नाम से… बालाजी। यहीं पर। उन्‍हें सरकार ने इक्विपमेंट नहीं दिया, तो उन्‍होंने हमें ये एजेंसी दे दी। हमारे पास इक्विपमेंट अपना है तो काम चल रहा है। जिस दिन हमारा रजिस्‍ट्रेशन हो जाएगा, उस दिन नाम भी बदल जाएगा। अभी तो हम 200 रुपया ले रहे हैं। कंपनी को कमीशन भी तो देना होता है।” कौन सी कंपनी? क्‍या ये डेटा सरकार के पास नहीं जाएगा? उसने बताया, ”हम भेजते तो यूआइडी में ही हैं लेकिन काम प्राइवेट कंपनी के लिए करते हैं।”

अभिषेक श्रीवास्तव

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