Ye jo Mar Mar ke -Shailja Pathak.jpg

एक बार में जरा सा काम करना और धप्प्प से बैठ जाना
फिर उठना और थोडा और काम करना
फिर बैठ लेना लम्बी लम्बी सांस
पसीने से तर ब्लाउज का आखिरी हूक खोलना और कहना
जैसे चल नही रही सांस
कि और सांस लेने को नही बची ताकत
माटी हो गई देह को गरियाना

कि यही हाथ से कैसे दस किलो आलू का पापड़ बना देती थी ठीक दुपहरिया में
जब सो रहे होते थे सब
शाम चूल्हा जलने से पहले अपनी पांच मीटर साडी का पापड़ मजे से तहाती रख देती थी कोने के स्टूल पर
पापड़ अचार बड़ी के काम को कभी काम में नही किया गया दर्ज
कि ये तो शगल है दोपहर काटने का

बाद दिनों खाना पकाना के मध्य किया गया सारा ही काम शगल में शामिल हुआ
स्वेटर सिलाई बुनाई
जब तमाम बीमारिया घात लगा रही हैं
ये हैं की काम के पीछे मरी जा रही हैं
फरमाइशी चटनी पर घिसटती सी तोड़ने लगती हैं धनिया
अपराध बोध से भरी बताती है
नहीं बना पाई कुछ ज्यादा
आज खा लो ऐसे ही कुछ सादा

हम इनके थकने पर सवाल नही करते
इनकी तेज फूलती सांस का मलाल नही करते
पखुरा से उतर कर दर्द पीठ पर फ़ैल गया है इनके
ये बताती कम छुपाती ज्यादा हैं
ये डरती हैं कि ये बीमार हो रही हैं
इन्हें घर में काम के लिए होना था
ये जो रुक रुक के काम कर रही हैं
ये जो झुक झुक के बुहार रही है आँगन
ये जो तीन सीढ़ी चढ़ लेती हैं लम्बी लम्बी सांस

घर की औरतें थक कर बीमार हो रही हैं
इन्हें चाहिए वाजिब इलाज
इन्हें चाहिए प्यार भरी आवाज
ये रंगीन साडी पर सूखे पापड़ सी चरमरा जाएँगी
बाद हरी चटनी का जिक्र सुनते
ये कमबख्त
खुद के ही दर्द को सील पर पीस लाएंगी
ये काम पर लगाई गई हैं
काम छोड़ कहीं नही जाएँगी

एक बार में नही कर सकती क्या पूरा काम क्या बिच बिच में पसर जाती हो कमाल की औरत हो
एक जरा से घर का काम करने में इतना वक्त्त लगाती हो

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