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गौरक्षा का अर्थ है गाय की रक्षा करना। गौरक्षा किसी एक वर्ग का कॉपीराइट नहीं है। ये हर भारतीय का मानवीय धर्म है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ हिन्दू गौरक्षा कर सकता है और बाकी धर्मों के लोगों से इसका कोई सरोकार नहीं है। या सिर्फ बीजेपी गौरक्षा करेगी और बाकी राजनैतिक पार्टियां नहीं करेंगी।

ये हर एक हिंदुस्तानी का कर्त्तव्य है कि वो गौरक्षा करे। गाय सिर्फ एक पशु नहीं है, यह एक आस्था है मानवीय मूल्यों की। गाय का सर्वाधिक उपयोग दुग्ध उत्पादन में किया जाता है और दूध पिलाने वाली माँ से कम नहीं है। इसीलिए हर भारतीय की अप्रत्यक्ष रूप से गाय माता समान है। अगर सही वर्णों में कहा जाए तो गाय हमारी माता ही है।

प्रकृति के सिर्फ दो नियम है – एक सही तो एक गलत। सही और गलत के इलावा और कुछ नही हो सकता। जीवों में सर्वोपरि गाय है। और जीव हत्या एक पाप है। उसी प्रकार गौहत्या महापाप है। क्योंकि गौहत्या, माता की हत्या है। और माँ की हत्या से बड़ा कोई पाप नहीं है।

एक होता है गौरक्षक और एक होता है गौपालक। गौरक्षक वो होता है जो गाय की रक्षा करता है किसी भी प्रकार की चोट पहुँचने से। गौपालक वो होता है जो गाय को पालता है, सेवा करता है। गौपालक और गौरक्षक में समानता भी है। हर गौपालक गौरक्षक होता है। लेकिन हर गौरक्षक गौपालक नहीं हो सकता। जो प्राण देता है भगवान है, प्राण बचाने वाला वैद्य और प्राण की रक्षा करने वाला क्षत्रिय। उसी तरह गौरक्षक का ये सामाजिक धर्म है कि वो गाय की रक्षा करे। इस धर्म का एक महत्वपूर्ण बिंदु ये भी है कि गौरक्षक रक्षा करे सिर्फ भक्षकों से। किसी निहत्ते, गरीब, और बेकसूर को प्रताड़ित करने का उनके पास कोई नैतिक हक नहीं है। अगर कोई ऐसा करता है तो वो भी उन भक्षकों की श्रेणी में आ जायेगा। क्योंकि भक्षक सिर्फ जीव हत्या करता है, चाहे वो जीव गाय हो, बैल हो, पक्षी हो या मनुष्य हो या कोई और हो।

मेरा आप सभी से अनुरोध है कि हम किसी भी धर्म-जाति से क्यो न हो, हैं तो हम एक इंसान ही। और इंसानियत ये नही सिखाती की जीव हत्या करो। और गौहत्या तो कभी भी नही। इसलिए गौरक्षा को अपना मानवीय कर्तव्य मानिये और इंसानियत का रास्ता चुनिए। किसी निहत्ते और बेकसूर को प्रताड़ित न करिए। ये गौहत्या के पाप से थोड़ा ही कम है लेकिन है एक पाप ही।

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