farmer_protest.jpeg

भारत के दिल में बसा मध्यप्रदेश इन दिनों सुलग रहा है| शिवराज सरकार पर संकट के बादल छाये हुए है, कारण है उग्र हो छुआ किसान आन्दोलन| उग्र हो चुके आन्दोलन को शांत करने हेतु मध्यप्रदेश पुलिस और सीआरपीएफ़ को तथाकथित रूप से गोली चलानी पड़ी जिसमे ६ किसानो की मौत हो गयी|

मध्यप्रदेश आखिर किसानो की मांग क्या है:

1) किसानों को कर्ज माफी मिले।
2) सरकारी डेयरी दूध के ज्यादा दाम दे।
3) स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशें लागू हों।
4) किसानों पर दायर केस वापस लिए जाएं।

आखिर क्या है स्वामीनाथन कमेटी रिपोर्ट? दैनिक ट्रिब्यून में एक लेख छपा था, २ मार्च को छपी इस रिपोर्ट में यशपाल ने पूर्ण जानकारी उपलब्ध करायी थी:

“सभी को भरपेट व गुणवत्ता वाला भोजन मिले, यह देश के लिए 21वीं सदी की मुख्य चुनौती है। इस चुनौती को पूरा करने में अन्नदाता किसान का अहम योगदान है। लेकिन यदि वही किसान कर्ज की चपेट में से निकलने को छटपटा रहा हो, उसकी हालत दयनीय हो और आत्महत्या तक की नौबत आ जाए तो चिंताजनक बात है। मुख्यत: अन्न की आपूर्ति यकीनी बनाने और किसान की आर्थिक हालत को बेहतर करने के दो मकसदों को लेकर सन‍् 2004 में केंद्र सरकार ने डाक्टर एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया। इसे आम लोग स्वामीनाथन आयोग कहते हैं। इस आयोग ने अपनी पांच रिपोर्टें सौंपी। अंतिम व पांचवीं रिपोर्ट 4 अक्तूबर, 2006 में सौंपी गयी। रिपोर्ट ‘तेज व ज्यादा समग्र आर्थिक विकास’ के 11वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य को लेकर बनी है।

क्यों बनाया गया आयोग

सबको अच्छा भोजन उपलब्ध हो, उत्पादकता बढ़े, खेती से किसान को पर्याप्त लाभ हो, खेती की सस्टेनेबल तकनीक विधियां अपनाई जाएं, किसानों को आसान व पर्याप्त ऋण मिले, सूखे, तटवर्ती एवं पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि की विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लागू हों, कृषि लागत घटे और उत्पादन की क्वालिटी बढ़े, कृषि पदार्थों के आयात की दशा में किसान को सरकारी संरक्षण मिले तथा पर्यावरण संरक्षण के मकसद को पंचायतों के माध्यम से हासिल किया जाए- उक्त सभी उद्देश्यों के साथ इस आयोग का गठन किया गया था। नालेज व स्किल बढ़ाना, टेक्नोलोजी का खेती में ज्यादा इस्तेमाल व मार्केटिंग सुविधाएं बढ़ाना भी आयोग की प्राथमिकतों में शुमार था। पानी की कमी दूर करने संबंधी योजनाओं को बढ़ावा देना भी उक्त कमीशन की मंशा थी।

आयोग में कौन क्या था

चेयरमैन : एमएस स्वामीनाथन, पूर्णकालिक सदस्य : राम बदन सिंह, वाईसी नंदा, पार्टटाइम मेंबर : आरएल पिटाले, जगदीश प्रधान, अतुल कुमार अंजान। सदस्य सचिव : अतुल सिन्हा, आयोग के अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर एमएस स्वामीनाथन को भारत की हरित क्रांति का जनक माना जाता है जिसके जरिये बढ़ती जनसंख्या को पर्याप्त अन्न मुहैया करवाना संभव हुआ। उनका लक्ष्य पूरी दुनिया को भूख से निजात दिलाने के साथ ही खेती को पर्यावरण मित्र बनाना भी था।

कौन-कौन सी सिफारिशें थी रिपोर्ट में

भूमि सुधारों की गति को बढ़ाने पर आयोग की रपट में खास जोर है। सरप्लस व बेकार जमीन को भूमिहीनों में बांटना, आदिवासी क्षेत्रों में पशु चराने के हक यकीनी बनाना व राष्ट्रीय भूमि उपयोग सलाह सेवा सुधारों के विशेष अंग हैं। सिंचाई के लिए सभी को पानी की सही मात्रा मिले, इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग व वाटर शेड परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात रिपोर्ट में वर्णित है। इस लक्ष्य से पंचवर्षीय योजनाओं में ज्यादा धन आवंटन की सिफारिश की गई है। भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही खेती के लिए ढांचागत विकास संबंधी भी रिपोर्ट में चर्चा है। मिट्टी की जांच व संरक्षण भी एजेंडे में है। रिपोर्ट में बैंकिंग व आसान वित्तीय सुविधाओं को आम किसान तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। क्रॉप लोन सस्ती दरों पर, कर्ज उगाही में नरमी, किसान क्रेडिट कार्ड व फसल बीमा भी सभी किसानों तक पहुंचाने की बात है। मिलेनियम डेवलपमेंट गोल (यानी 2015 तक भूखों की तादाद आधी रह जाए) पूरे हों व प्रति व्यक्ति भोजन उपलब्धता बढ़े, इस मकसद से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आमूल सुधारों पर बल दिया गया है। कम्युनिटी फूड व वाटर बैंक बनाने व राष्ट्रीय भोजन गारंटी कानून की संस्तुति भी रिपोर्ट में है। किसान आत्महत्या की समस्या के समाधान, राज्य स्तरीय किसान कमीशन बनाने, सेहत सुविधाएं बढ़ाने व वित्त-बीमा की स्थिति पुख्ता बनाने पर भी आयोग ने विशेष जोर दिया। मार्केटिंग सुधार भी इन्हीं के साथ-साथ अहम स्थान रखते हैं। किसानों की फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य कुछेक नकदी फसलों तक सीमित न रहें, इस लक्ष्य से ग्रामीण ज्ञान केंद्र व मार्केट दखल स्कीम भी लांच करने की सिफारिश रिपोर्ट में है। एमएसपी औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश भी की गई है ताकि छोटे किसान भी मुकाबले में आएं, यही ध्येय खास है।”

दैनिक भास्कर में खबरों के अनुसार:

“- महाराष्ट्र में पुणतांबा के किसानों से प्रभावित हो कर छोटे-बड़े किसान संगठन, नेता इकट्ठा हो गए। 1 जून से किसान क्रांति मोर्चा के नाम से आंदोलन शुरू कर दिया गया। पश्चिम महाराष्ट्र के किसानों ने आंदोलन शुरू किया। नासिक और अहमदनगर आंदोलन का केंद्र है।
– मध्यप्रदेश में 2 जून से इस आंदोलन की शुरुआत हुई। यहां इंदौर, धार, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, खंडवा और खरगोन के किसान आंदोलन कर रहे हैं।”
मंदसौर में तनाव क्यों है?
– मंदसौर और पिपलियामंडी के बीच बही पार्श्वनाथ फोरलेन पर मंगलवार सुबह 11.30 बजे एक हजार से ज्यादा किसान सड़कों पर उतर आए। पहले चक्का जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने सख्ती दिखाई तो पथराव शुरू कर दिया। पुलिस किसानों के बीच घिर गई। किसानों का आरोप है कि सीआरपीएफ और पुलिस ने बिना वॉर्निंग दिए फायरिंग शुरू कर दी। इसमें 6 लोगों की मौत हो गई।

एसपी-कलेक्टर पर कहां हमला हुआ?

– मंदसौर जिले के बरखेड़ा पंत में फायरिंग में मारे गए स्टूडेंट अभिषेक का शव रोड पर रखकर किसान चक्का जाम कर रहे थे। इनकी मांग थी कि सीएम शिवराज सिंह यहां आएं और फायरिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का वादा करें। एसपी ओपी त्रिपाठी और कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह इसी मामले को सुलझाने के लिए बरखेड़ा पंत पहुंचे थे। तभी एक किसान ने कलेक्टर को पीछे से सिर पर चांटा मारा। लोगों ने उनके साथ बदतमीजी की। उनके कपड़े फाड़ दिए।
– हालांकि, बाद में अभिषेक के परिजन अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गए। कलेक्टर ने अभिषेक के परिजनों को उसका स्मारक बनाने का आश्वासन दिया।

देवास में ट्रेन रोकी, बस में आग लगाई

– देवास में किसानों ने दो ट्रेनों को स्टेशन पर रोक लिया। करीब आधे घंटे तक समझाने के बाद इन्होंने ट्रेन को जाने दिया। इस प्रदर्शन का नीमच-रतलाम रेल ट्रैफिक पर असर पड़ा है। कुछ ट्रेन को इन स्टेशन पर ही रोक दिया है।
– वहीं, भोपाल से आ रही चार्टर्ड बस को सोनकच्छ में रोककर उसमें आग लगा दी। पैसेंजर्स ने भागकर जान बचाई। इससे पहले आंदोलनकारियों ने बस के शीशे तोड़ दिए गए। जब तोड़फोड़ की जा रही थी, तब बच्चे और महिलाएं बस के अंदर थीं। घटना के जो वीडियो सामने आए हैं, उनमें बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनी जा सकती है।
कहां-कहां लगा है कर्फ्यू?
– मंदसौर, पिपलिया मंडी, नारायणगढ़ और मल्हारगढ़ में कर्फ्यू लगा रहा। वहीं, दलोदा और सुमात्रा में भी धारा 144 लगा गई। मंदसौर में सभी मोबाइल सर्विसेस सस्पेंड कर दी गईं। इंदौर में मंगलवार को शांति रही, लेकिन बुधवार को पड़ोसी जिले देवास के हाट पिपलिया में आंदोलनकारियों ने थाने के अंदर खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी।
कांग्रेस ने रखा था बंद, आने वाले थे राहुल गांधी
– दिग्विजय सिंह ने कहा था कि बुधवार को मध्य प्रदेश में बंद रहेगा। लोग इसमें मदद करें। बंद का असर सबसे ज्यादा इंदौर, धार और मंदसौर जिले में दिखा। इंदौर जिले में राऊ, सांवेर, मांगलिया, देवगुराड़िया इलाकों में बंद का ज्यादा असर दिखा। उज्जैन में भी ज्यादातर मार्केट बंद रहे। जो खुले थे, उन्हें कांग्रेस वर्कर्स ने बंद करवा दिए।
– धार में भी बंद का असर दिखा। बाजार पूरी तरह बंद रहे। उधर, सीहोर में कल किसानों के प्रदर्शन के बाद बंद का मिला-जुला असर रहा। आष्टा में दुकानें बंद रहीं, जबकि इछावर में कम असर रहा।
– राहुल गांधी के मंदसौर पहुंचने की खबर थी। लेकिन बुधवार को वे नहीं आए। वे एक-दो दिन में मंदसौर आ सकते हैं।

एकजुट होने की कोशिश में विपक्ष, मांगा शिवराज का इस्तीफा

– विपक्षी दल शिवराज सिंह चौहान की सरकार को घेरने की कोशिश में हैं। जेडीयू नेता शरद यादव ने बुधवार को राहुल गांधी से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हम एक साथ मंदसौर जाने की योजना बना रहे हैं। हमने इस तरह का आंदोलन पहले नहीं देखा। मध्य प्रदेश सरकार 6 मौतों का आंकड़ा दे रही है, लेकिन हमें लगता है कि मौतें ज्यादा हुई हैं।
– कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। वे अपनी जिम्मेदारी किसी पुलिस अफसर पर नहीं मढ़ सकते। मंदसौर में लाशों पर बोलियां लगाई जा रही हैं। 5 लाख, 10 लाख, 1 करोड़ (मुआवजे) की बात की जा रही है। ये शर्मनाक है।

बड़ा सवाल : किसने चलाई गोली?

– एमपी के होम मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह का एक बयान मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें वे यह कहते सुनाई दिए कि पुलिस ने किसानों पर फायरिंग की। ‘भास्कर’ ने जब ऑडियो टेप के बारे में सिंह से पूछा तो उन्होंने कहा कि सब कुछ ज्यूडिशियल इन्क्वायरी से सामने आ जाएगा। उधर, मंदसौर के कलेक्टर ने घटना के बाद कहा था कि हमने गोली चलाने के आदेश नहीं दिए।

शिवराज ने क्या कहा?

– सीएम ने बुधवार को मीडिया में विज्ञापन जारी कर किसानों से अपील की। उन्होंने कहा- दो दिन में किसानों से जो चर्चा हुई, उसके मुताबिक मांगें मंजूर कर ली गई हैं। कुछ असामाजिक तत्व अपने स्वार्थ के कारण प्रदेश में अशांति फैलाना चाहते हैं। आप उनसे सावधान रहें। बहकावे में ना आएं। अभी भी कोई समस्या है तो हम आपस में मिल-बैठकर, चर्चाकर उसका समाधान निकाल लेंगे।
किसानों की सरकार से क्या मांगें हैं?
– किसान जमीन के बदले मुआवजे के लिए कोर्ट जाने का अधिकार देने, फसल पर आए खर्च का डेढ़ गुना दाम देने, किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, कर्ज माफ करने और दूध खरीदी के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
– सीएम चौहान ने दो दिन की चर्चा के बाद किसानों पर केस खत्म करने, जमीन मामले में किसान विरोधी प्रावधानों को हटाने, फसल बीमा को ऑप्शनल बनाने, मंडी में किसानों को 50% कैश पेमेंट और 50% आरटीजीएस से देने का एलान किया था। यह भी कहा था कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी।

घाटे में सरकार

मध्य प्रदेश सरकार किसानों से आठ रुपए प्रति किलो प्याज खरीद कर उसे खुले बाजार में दो रुपए प्रति किलो बेचेगी। यह कम से कम 10 किलो के बैग में मिलेगा। प्याज की पैदावार करने वाले जिलों में सरकार की एजेंसी मार्कफेड ने खरीदी शुरू कर दी है। साफ है कि इस बार फिर सरकार को प्याज की खरीदी में बड़ा नुकसान होगा। स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट मिलाकर सरकार को प्याज 14 रुपए प्रति किलो की पड़ेगी। पिछली बार भी प्याज से सरकार को 50 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।

ये सब जानकारी हमने आपको इसलिए दी ताकि आपको पता लग सके कि आखिर ये आन्दोलन क्यों हुआ, कहाँ हुआ और कैसे हुआ? इन खबरों में आप सिर्फ ऊपर-ऊपर की जानकारी से अवगत हुए हैं लेकिन अब हम आपको इस आन्दोलन की वास्तविक वजह और तह तक ले जायेंगे| हम आपको यह बताएँगे कि कैसे भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ने पूरे योजनाबद्ध तरीके से किसानो के शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक आन्दोलन को हिंसक बनाने हेतु महत्वपूर्ण भूमिका निभाई| कैसे कांग्रेस के लोकल, वरिष्ठ नेताओं और उपद्रवियों ने किसान आन्दोलन की आड़ में अपनी राजनितिक रोटियां सेंकी है|

महाराष्ट्र में चल रहे शांतिपूर्ण आन्दोलन की आंच जैसे ही मध्यप्रदेश को पहुंची; किसान संगठनों ने सड़क पर उतर कर प्रतीकात्मक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान कर दिया| किसानों की दुखती रगों पर हाथ पड़ते ही किसान खुद-ब-खुद सड़कों पर उतर आये| भारी संख्या में सड़क पर उतर चुके किसानों से राजनीतिक लाभ लेने के लिए कांग्रेस के मध्यप्रदेश संगठन ने दिल्ली से आये आदेश को अपने लोकल नेताओं तक पहुँचाया| उन्हें निर्देश दिया गया कि किसी भी तरह आन्दोलन को हिंसक करो, पटरियां उखाड़ो, दूध ले जा रही डेयरी की गाडियों पर हमला करो, यातायात को बाधित करो और सरकारी तंत्र एवं पुलिस को कार्यवाही हेतु उकसाओ ताकि जवाब में किसान भी उग्र हो जाए और शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे आन्दोलन को हिंसा की चपेट में आने पर मजबूर होना पड़े|

यह सब पर्दे के पीछे हो जाता और किसी को कानों-कान ख़बर तक नहीं होती| लेकिन मदमस्त मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन ने नौसिखिया नेताओं को ज़िम्मेदारी थमा अपने षड्यंत्र की पोल खुद ही खोल दी|

सबसे पहले आप इंडियन यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्याम गुर्जर का फेसबुक प्रोफाइल देखिये और उसका फेसबुक पोस्ट देखिये| हाई कमान के आदेश पर यह युवा नेता आह्वान कर रहा है कि कार्यकर्ताओं तैयार हो जाओ, डेयरी पर हमला कर ४०००० लीटर दूध तबाह करना है और भारी संख्या में उपस्थित होकर उपद्रव मचाना है|

Congress local leaders behind Mandsaur Farmer Protest and Violence

Congress workers inciting violence behind farmers

दूसरे पोस्ट में वह फिर अनुरोध या यूँ कहे कि आदेश दे रहा है कि जो इस उपद्रव में शामिल न हो, कांग्रेस के बाहुबलियों उनपर हमला कर दो|

Congress workers in Madhya Pradesh Mandsaur provoking farmers and threatening for violence

दूसरे लोकल नेता और कांग्रेस आईटी सेल के प्रदेश सचिव की प्रोफाइल देखिये और फिर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किसान बनकर सड़क जाम और उपद्रव भरा पोस्ट देखिये|

Jitu Patwari and Jyotiraj Sindhiya behind Mandsaur ViolenceCongress workers blocked road and set ablaze vehicles in Mandsaur

कुछ लोग यह भी कह सकते है कि माना यह इन लोकल नेताओं ने किया है लेकिन इससे यह साबित तो नहीं हो जाता कि इसमें कांग्रेस का हाथ है| लेकिन अब हमें जो सबूत हाथ लगा है उससे यह साबित हो जाता है कि यह पूरी साजिश के तहत किया गया उपद्रव है| नीचे दिए गये सन्देश में आप पढ़ सकते है कि वही श्याम गुर्जर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से जानकारी ले रहा है कि प्लान के मुताबित पटरी उखड़ी की नहीं? इसके जवाब में दूसरा कार्यकर्ता कहता है कि जेसीबी चाहिए| तीसरा कहता है कि “खोद डालो और मरवा दो” जवाब में श्याम बोलता है कि जेसीबी ज़रूरी है क्या?

कार्यवाही के दर से चौथा कार्यकर्ता कहता है कि उनसे (हाई कमान) से कहियेगा कि हमारी सजा कुछ कम करवा देंगे

A whatsapp chat is viral where local congress leaders and workers are planning for violence in Mandsaur

अपने इस सबूत को हमने पुख्ता करने के लिए यह जानने की कोशिश कि क्या यह नंबर श्याम गुर्जर का ही है| और हमारी पड़ताल में यह नंबर श्याम गुर्जर का ही निकला|

Mandsaur violence is congress stroke, confirmed by whatsapp chat

इस सबसे एक बात तो साफ़ होती है कि यह सब आकस्मिक उपजा आक्रोश नहीं बल्कि कांग्रेस के आदेश पर एक सोचा समझा षड्यंत्र है|

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनितिक फायदे के लिए कोई दल या समूह इतना नीचे गिर सकता है? क्या किसानों की लाश पर राजनीति जायज़ है?

(नोट: आगे की रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित की जाएगी)

 

Advertisements