अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता

Image result for amarnath attack 2017जिस कश्मीर में मानवाधिकार के नाम पर ज्यूडिशियली खुद संज्ञान ले कर एक पत्थरबाज आतंकी को दस लाख का मुआवजा देने की सरकार को सिफ़ारिश करती हो उस कश्मीर में अगर अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता । जिस देश में गल्फ फंडिंग और क्रिश्चियन मिशनरी फंडिंग पर पल रहे एन जी ओ बात बेबात देश को गृह युद्ध में धकेलने को लगातार युद्धरत हों तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता ।

जिस देश में लेखक और पत्रकार अपना जमीर बेच कर विचारधारा के नाम पर कश्मीरी पंडितों के विस्थापित होने पर बरसों से चुप्पी साध कर सेक्यूलरिज्म के नाम पर मुस्लिम सांप्रदायिकता के पालन – पोषण में दिलोजान से लगे हों तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता । जिस देश के राजनीतिज्ञ सिर्फ़ वोट बैंक के लिए देश और समाज बांटने के लिए हर क्षण तैयार खड़े मिलते हों तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता ।

जिस देश में किसी भ्रष्ट राजनीतिज्ञ को सेक्यूलरिज्म के नाम पर तमाम सारे लोग सेफगार्ड बन कर , दीवार बन कर रक्षा में खड़े हों तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता । जिस देश में लोग सिर्फ़ हिंदू मुसलमान , आरक्षण की राजनीति को ही प्रोग्रसिव होना मान लेते हों तो तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता ।

जिस देश में कुछ लोग गाय का मांस खाने के लिए ही पैदा होते हों , जान दे कर भी गाय का मांस खाने का ज़ज्बा रखते हों , गाय बचाने के नाम पर इंसान की जान ले लेना ही धर्म समझते हों तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता । जिस देश में केरल , बंगाल हों , बशीर हाट और मालदा की सांप्रदायिकता पर फैशन और पैशन की हद तक ख़ामोशी हो तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता । कश्मीर के पत्थरबाज आतंकियों को जो लोग नादान बच्चा कह कर सीना फुला कर बैठते हों तो अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता ।

आश्चर्य हो भी भला क्यों । अब तो इन घटनाओं पर मुझे दुःख भी नहीं होता । संवेदनहीनता की नाव में बैठ गया हूं मैं । आप क्या कर लेंगे मेरा ?

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दयानंद पाण्डेय
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