वक़्त के साथ बदलते बाबाओं के अवतार

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आज एक बाबा ने कहर ढा रखा है। रेप के आरोप में दोषी पाए गए हैं और उनके भक्त दो राज्यों में आपातकाल जैसे हालात लाने पर उतारू हैं। 25 से ज़्यादा जानें जा चुकी हैं और जगह-जगह आगजनी की खबरें सामने आ रही हैं। हर कोई सोच रहा है कि बाबा में ऐसा क्या है जो लोग जान लेने-देने पर उतारू हैं। दरअसल यह बाबा बाकियों से अलग हैं, नाम है बाबा गुरमीत राम रहीम जी इंसां.. हर धर्म से कुछ न कुछ उधार ले लिया है और राम, रहीम से पहले इंसान होने का दावा करते हैं। यह कूल टाइप बाबा हैं, रॉकस्टार हैं और मल्टी-टैलंटेड भी। अब जब रेप के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं तो पंजाब और हरियाणा को जलने के लिए छोड़ दिया है।

समझना जरूरी है कि एक के बाद एक बाबा और उनके अलग-अलग अवतार आते कहां से हैं। दरअसल बाबाओं से पहले संत महात्मा और भगवान का कॉन्सेप्ट आया। भगवान की परिकल्पना ही इसलिए की गई थी जिससे लोगों का जब खुद पर भरोसा टूटने लगे तो किसी तीसरी शक्ति पर भरोसा करके काम पूरा करने की हिम्मत करें। पहले यह शक्ति तकलीफ के वक़्त याद की जाती थी, फिर इसका नाम लेकर डराया जाने लगा। बात तो तब बिगड़ी जब भगवान को धरती पर उतारने का दावा करके अलग-अलग तरह के सेंटर खोल दिए गए। यहां लोगों को तकलीफ के वक़्त खुशी मिलने उम्मीद में और तकलीफ न होने पर डराकर बुलाया जाने लगा।

अगला कदम भगवान के सेंटरों में काम करने वालों ने उठाया और भगवान से सीधा कनेक्शन होने का दावा करने लगे। जिन लोगों का अट्रैक्शन पहले भगवान और फिर उनके सेंटरों तक ही था, अब भगवान के दूतों से अट्रैक्ट होने लगे। ये दूत संत और बाबा बनकर लोगों की मदद करने लगे। कुछ सच में दूसरों की मदद करना चाहते थे और कुछ अपनी। रोज़ सैकड़ों लोग उनके सामने सिर झुकाने लगे और उन्हें लगने लगा कि वह खुद ही भगवान हैं। भक्तों को भी इस बात पर यकीन करने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा।

पहले ऋषि, महात्मा और सन्यासी होते थे जो सब कुछ छोड़कर सत्य की तलाश में जंगल और पर्वतों पर निकल जाते थे। वह हमेशा सत्य और ईश्वर की तलाश में लगे रहे लेकिन उतना सुख-शांति न पा सके, जितना नए जमाने के बाबाओं को बिना जंगल गए ही मिल गया। जंगल जाने में कोई फायदा नहीं मिलता इसलिए अब बाबा जंगल और पर्वतों के बजाय लोगों के बीच में रहने लगे हैं। लोगों की डिमांड और अपनी जरूरतों के हिसाब से बाबा ने अपना नाम रखना, मेकअप करना और प्रसाद देना शुरू कर दिया है। अब नए अवतार हैं राधे मां, गोल्डन बाबा, निर्मल बाबा, बिजनस बाबा, फ्रॉड बाबा और राम रहीम सिंह इंसां…

यह बाबा भगवान की नहीं अपनी भक्ति करवाते हैं। ये बाबाओं के अपडेटेड और लेटेस्ट वर्जन हैं। मॉल में शॉपिंग करने वालों और फाइव स्टार होटल में रहने वालों को पेड़ के नीचे या फूस की झोपड़ी में बैठे बाबा रास नहीं आने इसलिए नए बाबा आसमान से उड़कर या लाइट्स से सजे रंगबिरंगे स्टेज से निकलकर आते हैं। प्रसाद बताशों का नहीं, चॉकलेट और पेस्ट्री का होता है। भक्तों की अपने भगवान से बात करने की चाह ये बाबा पूरी कर रहे हैं। भक्त अपने नए भगवान के साथ अठखेलियां कर सकते हैं, उनके हाथ से प्रसाद खा सकते हैं। चंद दान-दक्षिणा के बदले राधे मां अपने भक्तों की गोदी में बैठकर उन्हें दुलार सकती हैं, आई लव यू कह सकती हैं… कहां मिलेगा ऐसा भगवान! बाबा राम रहीम को ‘पापा जी’ कहने वाले उनके रॉक म्यूजिक पर ठुमके लगाते हैं और खुद को भगवान का रूप कहने वाले अपने पसंदीदा कैरक्टर के साथ सच्चा सुख उठाते हैं।

बाबा बदलते गए लेकिन भक्त नहीं बदले। भक्त कल भी अपने भगवान के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकते थे, आज भी नहीं सुनेंगे। भक्त कल भी अपने भगवान के लिए जान लेने-देने की हिम्मत रखते थे, आज भी रखते हैं। चुनौती बहुत बड़ी है क्योंकि चुनौती है नए भगवान पैदा न होने देने की… जो बदलते माहौल में लगभग नामुमकिन हो चुका है। पुराने भगवान तस्वीरों और मूर्तियों में हैं जिन्हें अपडेट नहीं किया जा सकता और नए भगवान हर जगह तैयार हो रहे हैं… जिनसे सवाल नहीं किए जा सकते।

(उपरोक्त विचार लेखक के अपने हैं| इससे लिटरेचर इन इंडिया समूह का कोई सम्बन्ध नहीं है|)

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