Ranchi_boy_Street_Shop_for_Education

फोटो में दिख रहा लड़का रांची का है। इलाहाबाद में एसएससी की तैयारी करता है। अपना खर्चा निकालने के लिए लक्ष्मी टाकीज के पास चिकन रोस्ट की दुकान लगाता है। दुकान की आमदनी से अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ घर वालों को भी पैसे भेजता है। घर वालों को इस बारे में कुछ नहीं पता है। पहली बार जब उसने पैसे बचाकर १५ हज़ार रुपए में ठेला लिया था तो वो दूसरे दिन ही चोरी हो गया था। पहले दिन की कमाई मात्र तीस रुपए थी। लेकिन लड़के ने हार नहीं मानी। उसने तय किया कि अब वो ये जरूर कर के रहेगा। कुछ महीने बाद उसने किराए के ठेले पर फिर से दुकान शुरू की। अब महीने में अच्छी खासी कमाई कर लेता है।

अनुभव पूछने पर बता रहा था कि शुरू में ये सब करने में शर्म आती थी। बाद में उसे यह एहसास हुआ कि मेहनत करना और आत्मनिर्भर होना शर्म की बात नहीं है।

उसके प्रेरणाश्रोत उसके गुरु है जिससे उसने यह काम सीखा है। वह दिल्ली में यही काम करते थे। आज वह सेंट्रल गवर्मेंट में अच्छी खासी नौकरी करते हैं। नौकरी के साथ पुराना काम भी देखते हैं। दिल्ली में उनकी तीन शटर की दुकान है जहां हर तरह के नानवेज आईटम मिलते हैं। दुकान से महीने में लगभग ५ लाख रुपए की कमाई होती है। कर्मचारियों की सैलरी देने के बाद ४ लाख बचते हैं। कर्मचारी के रूप में ऐसे लड़के रखे और प्रशिक्षित किए जाते हैं – जो जरूरतमंद और पढ़ने लिखने वाले होते हैं ।

यह देखकर अच्छा लगा कि भारत में इस तरह का बिजनेस और स्टडी कल्चर धीरे-धीरे डेवलप हो रहा है। यह यहां के युवाओं के लिए अच्छा संकेत है। अपनी पढ़ाई के लिए स्किल्ड और आत्मनिर्भर होना कोई बुरी बात नहीं है। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। दुनिया में वही इंसान असल मायने में सफल है जो अपने पैरो पर खड़ा होकर आगे बढ़ता है। चरम बेरोजगारी के दौर में इस कल्चर को अपनाने और प्रोत्साहित किए जाने की सख्त जरूरत है ।

इनको और इनके गुरु को सलाम !

Pradyumna Yadav's profile photo, Image may contain: 1 person, standing, outdoor and water

प्रद्युम्न यादव

अगर आप भी लिखते है तो हमें ज़रूर भेजे, हमारा पता है:

साहित्य: editor_team@literatureinindia.com

समाचार: news@literatureinindia.com

जानकारी/सुझाव: adteam@literatureinindia.com

हमारे प्रयास में अपना सहयोग अवश्य दें, फेसबुक पर अथवा ट्विटर पर हमसे जुड़ें

Advertisements