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ओ मेरे साथी
तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो
मैं कर सकती हूँ तुमसे अधूरा प्रेम
क्योंकि बहुत कुछ घट जाने के बाद
अधूरा हिस्सा ही बचा रह सकता है किसी के जीवन मे
पर मैं अब करना भी नहीं चाहती पूरा प्रेम
मैं जानती हूँ वह प्रेम हो सकता है
खतरनाक किसी भी स्त्री के लिए
वह प्रेम बना सकता है किसी स्त्री को बहुत ही कमजोर
मैं कर सकती हूँ तुमसे अधूरा प्रेम
क्योंकि मैं बचा लेना चाहती हूँ
खुद में एक पूरा संसार
अपनी इच्छाओं और सपनों की संभावित दुनिया का
एक प्रेम जो लील लेना चाहता है समूचे स्त्री जीवन को
एक प्रेम जो नहीं मानता
एक स्त्री का प्रेम रह सकता है जिंदा अपनी
तमाम आकांक्षाओं के साथ
एक प्रेम जो ले आता एक स्त्री को घर
और उस घर की परिक्रमा करते करते वह
सच में मानने लगती है कि वो समूची पृथ्वी की परिक्रमा कर रही है
एक स्त्री सपनों में उड़ने के दृश्य नहीं
वो देखने लगती है एक बच्चे के रोने का स्वप्न
तब वह स्त्री करने लगती है पूरा प्रेम
पर मैं करना चाहती हूँ अधूरा प्रेम
अपनी पूरी दुनिया के साथ

अंकिता रासुरी

अंकिता रासुरी

टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड

संपर्क: सावित्रीबाई फुले छात्रावास, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा-442001 (महाराष्ट्र)