जागा ¨सचाई विभाग, पहुंचे एई, बोल्डर डालने के निर्देश

सूरजपुर (मऊ) :

मधुबन तहसील क्षेत्र के रसूलपुर मोर्चा व सूरजपुर गांव में घाघरा की कटान से बरपते कहर की खबर आखिरकार सिंचाई विभाग के कानों तक पहुंच ही गई। 16वें दिन अधीक्षण अभियंता बलिया अजय कुमार राय के निर्देश पर अवर अभियंता अशोक सिंह को कटान का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने दूरभाष पर अधीक्षण अभियंता को कटान की भयावहता की जानकारी दी। इस पर अधीक्षण अभियंता ने अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान को कटान स्थल पर लोहे की जाली में बोल्डर बांधकर गिराने और बचाव कार्य अतिशीघ्र किए जाने का निर्देश दिया।

सोमवार को घाघरा की लहरों द्वारा गांवों में कटान का कहर लगातार जारी रहा। नदी की लहरें बदस्तूर उत्तर से दक्षिणी छोर की ओर कटान करती हुई आबादी व उपासना स्थलों की तरफ 13 मीटर की गहरी खाई बनाती हुई लगातार कटान कर रही है। अब लहरें आबादी व उपासना स्थलों के काफी नजदीक तक पहुंच गई हैं। तटवर्ती इलाकों में बसे लोग काफी दहशत में जीवन यापन कर रहे हैं।

सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता बलिया अजय कुमार राय कटान पर लगातार नजर रखे हुए हैं।उनके निर्देश अवर अभियंता अशोक सिंह ने कटान क्षेत्र का दौरा किया। अवर अभियंता ने अधीक्षण अभियंता अजय कुमार राय व अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान को दूरभाष पर कटान की जानकारी दी। उन्हें जानकी मंदिर के पास हो रही भयावह कटान से अवगत कराया। इस पर अधीक्षण अभियंता बलिया अजय कुमार राय ने अधिशासी अभियंता को निर्देश दिया कि तत्काल कटान रोकने हेतु लोहे की जाली में बोल्डर डालकर नदी से हो रही कटान को रोका जाय।

कटान के चलते रसूलपुर मोर्चा गांव के पृथ्वी यादव, सुखनंदन यादव, सुखई यादव, रामनरायन यादव, बलिराम यादव, रामाश्रय यादव, जगधारी यादव, अवधेश यादव, बाढू यादव, मुन्ना यादव, गिरिजा यादव आदि लोगों का घर कभी भी घाघरा नदी अपनी गोद में समाहित कर सकती है। भीषण कटान के चलते रसूलपुर मोर्चा स्थित डीह बाबा का स्थान भी खतरे में है।

वहीं सूरजपुर गांव में भी घाघरा नदी में पानी के तेजी के साथ बढ़ाव व बहाव के चलते घाघरा नदी उत्तर के तरफ से दक्षिणी छोर पर 13 मीटर गहरी खाई बनती हुई कटान करती हुई आबादी व उपासना स्थल के पास तक पहुंच गई है। इससे नाथ बाबा मंदिर, राम जानकी मंदिर, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय बैदापुर, सूरजपुर सहित रामप्रसाद गोंड, शिवप्रसाद, रामदुलारे, संतोष सहित दो दर्जन से अधिक मकान भयंकर कटान के चलते खतरे में हैं।

अगर आप भी लिखते है तो हमें ज़रूर भेजे, हमारा पता है:

साहित्य: editor_team@literatureinindia.com

समाचार: news@literatureinindia.com

जानकारी/सुझाव: adteam@literatureinindia.com

हमारे प्रयास में अपना सहयोग अवश्य दें, फेसबुक पर अथवा ट्विटर पर हमसे जुड़ें