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बढ़े चलो -बढ़े चलो ! प्रचंड वेग से चलो ,
अनन्त जिगीषा लिए सत्य पे अड़े चलो !
गजारि सी दहाड़ से सिंहनाद घोर कर,
दंभ कीर्ण कूट -कर सूर से बढ़े चलो !!

न चाटुकारिता सहो न अपचार को सहो,
न अर्थना करो यहाँ स्वम् ही खड़े चलो !
ओर छोर तक कदन न्याय के लिए रुदन,
सचेत हो बढ़े चलो ! दीर्घिमा गढ़े चलो !!

समानता लिए चलो विराटता लिए चलो,
बढे चलो न अब डरो धीर से मढ़े चलो !
सहस्र फनों सा खड़ा दानवी उछाह अब,
दैन्यता को त्यागकर कुतंत्र से लड़े चलो !!

Jagdish Sharma Sahaj

जगदीश शर्मा सहज

अशोकनगर मध्‍यप्रदेश

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