हम सिसक सिसक सो जाते है

तेरा मेरी गली से गुजरना,
मेरी नजरों पे आके वो रुकना ।
उन यादों के दामन थामे,
हम संभल-संभल रुक जाते हैं।।

 

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तेरी बातों पे मेरा बिखरना,
मेरे साये से तेरा लिपटना।
उन लम्हों को पास यू पाके,
हम मचल-मचल रह जाते हैं।।

तेरी रातों में मेरा वो सपना,
मेरी सुबहो में तेरा वो जगना।
उन यादों को दिल से लगा के,
हम सिसक-सिसक सो जाते है।।

smriti shankar bihar

स्मृति शंकर

ग्राम+पोस्ट – खिरहर, मधुबनी, बिहार

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2 विचार “हम सिसक सिसक सो जाते है&rdquo पर;

  1. सुंदर रचना । शुभकामनाएं ।

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