कमला प्रसाद यादव

आज़मगढ़ : पूर्व एमएलसी एवं कद्दावर नेताओं में शुमार कमला प्रसाद यादव की वापसी सपा के लिए मुनाफ़े का सौदा है क्योंकि जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है सपा पूरे दम-ख़म से अपने पुराने सिपाहियों को सहेजने में लग गयी है| कारण भी साफ़ है कि जिस तरह हाल में सपा विधानसभा चुनावों और निकाय चुनावों में संतोषजनक प्रदर्शन करने में असफल हुई है उससे सीख लेते हुए पार्टी पुरानी गलती को दोहराने के मूड में बिलकुल नहीं है|

वैसे कमला प्रसाद यादव की वापसी के पीछे पूर्व मंत्री एवं वर्तमान में सदर विधायक दुर्गा प्रसाद यादव का भी हाथ माना जा रहा है| अपने भतीजे प्रमोद यादव से खटास और निकाय चुनाव में उनके प्रत्याशी की अप्रत्याशित हार ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आख़िर इन सब के पीछे कहीं अपनों का असहयोग तो नहीं| इसी कारण से वो अब अपने सगे-सम्बन्धियों को एकजुट करने में जुट गए हैं|

कमला प्रसाद यादव २०१२ में बसपा के संग हो चले थे| इसके पीछे भी कारण मामा दुर्गा प्रसाद यादव से टिकट न मिलने के कारण मनमुटाव ही माना जाता रहा है| हालाँकि समाजवादी पार्टी ने ही उन्हें विधान परिषद में एमएलसी बना कर भेजा था लेकिन राजनितिक हाशिये पर जाने से बेहतर उन्होंने बसपा का दामन थाम लेना ही समझा|

बसपा प्रमुख मायावती के करीबियों में उनका नाम शुमार किया जाता था| यही कारण था कि वर्ष २०१२ में मिली करारी हार के बाद भी दुबारा बसपा ने उन्हें गोपालपुर विधानसभा से दुबारा प्रत्याशी बनाया गया लेकिन उन्हें दुबारा हार का सामना करना पड़ा|

अब जब उनकी वापसी सपा में खुद अखिलेश यादव के माध्यम से हुई है तो यह कयास लगाना लाज़मी है कि जल्द ही पार्टी उन्होंने कोई प्रमुख दायित्व निभाने का सौभाग्य प्रदान कर सकती है| जहाँ उनकी वापसी से सपा में ख़ुशी का माहौल है तो वही दूसरी तरफ़ बसपा खेमे में निराशा है क्योंकि जिला स्तर पर कमला ही एक मात्र यादव चेहरा थे और बहुत हद तक यादव मतों को बसपा में जोड़ने का प्रयास भी किया था|अब जहाँ कमला के जाने से यादव मतों का बिखराव रुक जायेगा तो वही दूसरी तरफ़ बसपा को नए सिरे से अपनी रणनीति तय करनी होगी|

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