किसी दिन मुझको ही सपनों का ये घर मार डालेगा।
मेरी ख्वाबों की दुनिया को ये लश्कर मार डालेगा।।

भिखारी आज इक़ फुटपाथ पे देखा ठिठुरता है।
यकीनन आज फिर मुझको ये बिस्तर मार डालेगा।।

poor sleeping on footpath in India
चित्र स्रोत : गूगल

खिलौना मानकर ये खेलता फिर जानवर से है।
इसी वहशत में जाने कितने बंदर मार डालेगा।।

उसे मैं इसलिये ही खत नहीं हूँ भेजता कोई।
मेरा खत फाड़कर के वो कबूतर मार डालेगा।।

कहीं भी हूँ बुरा मैं काम कोई कर नहीं सकता।
बुरा कुछ गर करूँ भगवान का डर मार डालेगा।।

मुझे इस पिंजरे में रख मगर ये जान ले दानव।
उड़ा पंछी नहीं तो उसको ही पर मार डालेगा।।

राहुल गर्ग

 

अगर आप भी लिखते है तो हमें ज़रूर भेजे, हमारा पता है:

साहित्य: editor_team@literatureinindia.com

समाचार: news@literatureinindia.com

जानकारी/सुझाव: adteam@literatureinindia.com

हमारे प्रयास में अपना सहयोग अवश्य दें, फेसबुक पर अथवा ट्विटर पर हमसे जुड़ें