आँख में चुभ रहा,
आज प्रतिक्षण यहाँ
जान लेकर रहेगा
प्रदूषण यहाँ !

Poem on Pollution in Hindi
चित्र स्रोत : गूगल

रोज बढ़ता हुआ
वाहनों का धुआँ
वायु में घुल रहा
जहर भीषण यहाँ !

उजड़ते वन यहाँ
जानता है ख़ुदा
चीड़ का हो रहा
रोज खण्डन यहाँ !

परत ओज़ोन का
तीव्र अवक्षय यहाँ
ऊष्मा लाँघता
व्योम घर्षण यहाँ !

कोल की कालिमा
उगलती चिमनियाँ
नित्य बढ़ता हुआ
उत्सर्जन यहाँ !

जानते हम सभी
मानते पर कहाँ
ज़हर अब डस रहा
बनकर सहस्त्रफण यहाँ  !

जगदीश शर्मा सहज Jagdish Sharma Sahaj

जगदीश शर्मा सहज
अशोकनगर मध्यप्रदेश.

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