सबका साथ सबका हाथ
मिलकर बनाएंगे एक नया इतिहास
कोई वर्ग न छूटे कोई धर्म के नाम पर न लूटे
जीवन की हर सांस पर क़दमों के हर ताल पर
सुनेगे और सुनायेंगे
हर बात पर जोर लगाएंगे पीछे मुड़कर न आयेंगे
मिलकर माशल जलाएंगे
एक अनुपम भारत बनाएंगे
जहां प्रगति धारा की होगी प्रवाह
हर निश्चल मानस का होगा प्रवास
न धर्म होगा न जाति होगी
सिर्फ मानवता की राशि होगी

 

खिलेगा फूल खुशियों का
न रहे देश दुखियों का
निर्मल स्वच्छ बनाएंगे
देश को और आगे ले जायेंगे
सबका साथ सबका हाथ
मिलकर बनाएंगे एक नया इतिहास.

मनीष कुमार

रांची, झारखण्ड

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