जीवनसंगिनी – मनीष कुमार

संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी
रुको नहीं थको नहीं ओ मेरी हृदयनयनी

poem on life partner
चित्र स्रोत : गूगल

अपलक नयनों के तार जुड़े हैं तेरे मेरे
सांसों को बेजार मत करो मृगनयनी
संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी

आसमान की ऊंचाई से , जीवन की गहराई तक
धूपो की अगुवाई से , रात्रि की विदाई तक
स्वप्नों की अनुभूति से, हकीकत की सच्चाई तक
फूलों की पंखुिड़यों से, काँटों  की चुभन तक
संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी

मदमस्त रहे जीवन के अवसान तक
प्रेम करें जीवन के आखरी मक़ाम तक
साथी और लाठी बने हम
माटी की बाटी में साथ घुले हम
संग संग चलो मेरी जीवनसंगनी

मनीष कुमार
मनीष कुमार
c/o संभु साहू
अमरूद बागन रातू रोड रांची
पिन – 834005
manish_ggn2008@yahoo.com

 

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