कि जो कहना है कहूँगा भी, जो करना है करूँगा भी

अंधेरो को खलूँगा भी, हवाओं से लडूंगा भी

 

न सोचा है मिला क्या है, न सोचूंगा मिलेगा क्या

दिया है तो जलूँगा भी, जलूँगा तो बुझूंगा भी

अँधियारा है बहुत यहाँ, अब तुम दहलो या मैं दहलू

औ एक कहानी उजियारो की तुम कह लो या मैं कह लूँ

 

ज़ख्म भले ही अलग-वलग हो, लेकिन दर्द बराबर है

कोई फर्क नहीं पड़ता है, तुम सह लो या मैं सह लूं

 

आँखों की दहलीज़ पे आके, सपना बोला आंसू से

कि घर तो आखिर घर होता है, तुम रह लो या मैं रह लूँ

Pramod-tiwari-literature in india
प्रमोद तिवारी

 

(हिंदी जगत ने अपने अनमोल सितारे प्रमोद तिवारी जी को एक सड़क दुर्घटना में खो दिया| लिटरेचर इन इंडिया समूह की तरफ़ से प्रमोद तिवारी जी को भावभीनी श्रद्धांजली)

 

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