इन हस्तियों को नवाज़ा गया पद्म श्री पुरस्कार से

भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है| इस बार कुल 73 हस्तियों को पद्मश्री पुरस्कार से नवाज़ा गया है| आइये इन हस्तियों के नाम और उनके योगदान की चर्चा करते हैं| 

Padma Shri Dr. Abhay Bang and Rani Bang
डॉ अभय बंग एवं राणी बंग (महाराष्ट्र)

डॉ अभय बंग और राणी बंग को संयुक्त रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया है| इन्होने अपना पूरा जीवन गढ़चिरौली के आदिवसियों की सेवा में समर्पित किया है| इतना ही नहीं, इनके द्वारा अविष्कार किये गये गृह शिशु देखभाल प्रणाली को भारत सरकार ने ‘आशा‘ नामक योजना के रूप में पूरे देश में एवं संयुक्त राष्ट्र तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूरे विश्व में लागू किया है|

 

बात 1978 की है। महाराष्ट्र के वर्धा जिले के कान्हापुर में एक महिला डॉ. बंग के पास पहुंची। महिला का पति पहले ही चल बसा था, वह महिला उसकी नवजात बेटी का इलाज कराना चाहती थी। बच्ची निमोनिया और पेट की तकलीफ से परेशान थी। डॉ. बंग ने उसे अस्पताल ले जाने को कहा, लेकिन वह भूमिहीन मजदूर किस तरह से अस्पताल का खर्च उठाती, जिसके चार बच्चे और थे। दो दिन बाद वह महिला फिर डॉ. बंग के पास आई। उसे श्वास लेने में तकलीफ हो रही थी और कुछ ही देर में बच्ची चल बसी। इस घटना को डॉ. बंग ने सबक के रूप में लिया और यह जाना कि सेहत केवल दवा या इलाज नहीं है, बल्कि मरीज के प्रति संवेदनशील होना भी है। शादी गांधीवादी अभय बंग से हुई। दोनों ही नागपुर यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में टॉपर थे। पति अभय को मेडिसिन में तीन और रानी बंग को गायनेकोलॉजी में एक गोल्ड मेडल मिला। शादी के बाद दोनों अमेरिका पढ़ने चले गए। अभय शुरू से गांधीवादी सिद्धांतों से प्रभावित रहे। अमेरिका से लौटकर दोनों ने गढ़चिरौली में प्रभावित इलाके में लोगों का मुफ्त इलाज कर रहे हैं।

Padma Shri Damodar Ganesh Bapat
दामोदर गणेश बापट (छत्तीसगढ़)

दामोदर गणेश बापट एक समाजसेवी हैं जिन्हें कुष्ठ रोगियों के लिए किये गए सामाजिक कार्यो के लिए जाना जाता है| उन्होंने पूरा जीवन कुष्ठ रोगियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा में व्यतीत किया है| इन्होने कुष्ठ रोगियों के प्रति प्रचलित हीन भावना और अवधारणा को ख़त्म करने के लिए उनके साथ रहना, उनके द्वारा बनाये भोजन को ही खाना शुरू किया|

 

कुष्ठ आश्रम की स्थापना सन 1962 में कुष्ठ पीड़ित सदाशिवराव गोविंदराव कात्रे द्वारा की गई थी, जहां गणेश दामोदर बापट सन 1972 में सोंठी कुष्ठ आश्रम पहुंचे और कात्रे जी के साथ मिलकर उन्होंने कुष्ठ पीड़ितों के इलाज और उनके सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास के लिए सेवा के अनेक प्रकल्पों की शुरूआत की, दामोदर गणेश बापट, मूलतः महाराष्ट्र के अमरावती के ग्राम पथरोट के हैं, लेकिन उन्होंने छग की पवित्र धरती को अपना जीवन समर्पित कर कुष्ठ पीड़ितों की सेवा में लगा दिया। 82 साल के समाजसेवी दामोदर गणेश बापट के व्यक्तित्व से समाज को सीख मिलती है कि कुष्ठ पीड़ितों की सेवा कर उनमें बढ़ रही भिक्षावृत्ति को खत्म किया और हजारों कुष्ठ पीड़ितों को नया जीवन देने का काम किया है।

 

Padma Shri Prafulla Govind Baruah
प्रफुल्ल गोविन्द बरुआ (असम)

असम ट्रिब्यून के एमडी प्रफुल्ल गोविन्द बरुआ को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में योगदान हेतु पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया है|

 

Padma Shri Mohan Swaroop Bhatia - Literature in India
मोहन स्वरुप भाटिया (उत्तरप्रदेश)

ब्रज सांस्कृतिक गायक मोहन स्वरुप भाटिया को कला के क्षेत्र में पद्मश्री पुरस्कार से नवाज़ा गया है| पांच हज़ार से भी अधिक ब्रज गीतों को लिख कर अपनी आवाज़ देने वाले मोहन स्वरुप भाटिया ब्रज साहित्य और कला में एक बड़ा नाम हैं|

 

नामचीन साहित्यकार, पत्रकार और लोककला एवम ब्रज संस्कृति को दशकों से समर्पित मोहन स्वरूप भाटिया को पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनके नाम की दिल्ली में घोषणा हुई। इस पर ब्रजवासियों में हर्ष का माहौल है।

 

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गिरिधर लाल भाटिया के पुत्र मोहन स्वरूप भाटिया का जन्म 1935 में मथुरा में हुआ। उन्होंने किशोरी रमण डिग्री कॉलेज से स्नातक किया। 83 वर्षीय भाटिया ने 22 वर्ष की उम्र से ही वर्ष 1957 में पत्रकारिता की शुरुआत की। महादेवी वर्मा और अमृतलाल नागर के काल में उन्होंने लेखन कार्य किया। पिछले छह दशक से अधिक समय से पत्रकारिता और लेखन कार्य से जुड़े हैं। विभिन्न समाचार पत्र में पत्रिकाओं में लेखन कार्य कर चुके हैं। यह सिलसिला इस उम्र में भी अनवरत जारी है।

 

1969 में उन्होंने ज्ञानदीप शिक्षण संस्थान की स्थापना की। 1994 में उप्र संगीत नाटक एकेडमी के वाइस चेयरमैन रहे। लोकगीतों पर उन्होंने बहुत काम किया है। साइकिल से वे लोकगीतों के संकलन को गांवों में निकल जाते थे। वह 5000 लोकगीतों का संकलन कर चुके हैं। मथुरा आकाशवाणी व दूरदर्शन से भी जुड़े रहे। जन्माष्टमी और होली जैसे अवसरों पर सीधा प्रसारण भी किया। इस समय देहदान के पुनीत कार्य से जुड़े हैं। ब्रज साहित्य और संस्कृति में उनके योगदान को उन्हें पद्मश्री सम्मान दिया जा रहा है।

 

Padma Shri Sudhanshu Biswas - Literature in India
सुधांशु बिस्वास (पश्चिम बंगाल)

स्वतंत्रता सेनानी सुधांसु बिस्वास को पद्मश्री अवॉर्ड सोशल सर्विस के लिए मिला है। सुधांसु बिस्वास 99 साल की उम्र में 18 स्कूल चलाते हैं जिसमें वो मुफ्त शिक्षा और खाना देते हैं।

 

सुधांशु जी जब सातवीं कक्षा में थे, तो पहली बार मुलाकात स्वतंत्रता सेनानी नृपेन चक्रवर्ती से हो गई। वे उनसे जुड़ गए। कोलकाता के अलबर्ट हॉल में जब स्वतंत्रता सेनानियों पर ब्रिटिश पुलिस के नृशंस अत्याचार हो रहे थे, तब बिस्वास वहां से भाग निकले। 1939 में मैट्रिक की परीक्षा दे रहे थे, तभी परीक्षा हॉल से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि बाद में उन्हें परीक्षा देने की अनुमति दी गई, लेकिन तभी से बच्चों की निर्बाध शिक्षा का बीज मन में घर कर गया था। 1942 में वे अनुशीलन समिति के सदस्य बने।

 

1948 में सुधांशु जी विवेकानंद से प्रभावित हो गए और घर छोड़कर हिमालय में साधुओं के साथ रहने लगे। 14 साल की साधना के बाद 1961 में वे फिर सामने आए। वे ऑल इंडिया प्लास्टिक एसोसिएशन से जुड़े और संसद के समक्ष भूख हड़ताल पर बैठे। 1962 में उन्होंने कुछ कारोबार किया, ताकि कुछ पैसा जुटाकर समाज के काम में लगा सके।

 

उन्होंने एक स्कूल और आश्रम स्थापित किया। ये स्कूल पश्चिम बंगाल के सुदूर ग्रामों में था। नाम दिया गया श्री रामकृष्ण सेवाश्रम। बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाने लगी। कुछ समय तक सरकारी अनुदान मिलता रहा, लेकिन इन्होंने बाद में यह भी लेना बंद कर दिया। अब स्वयं ही स्कूल और आश्रम चलाते हैं।

 

Padma Shri Saikhom Mirabai Chanu
साईखोम मीराबाई चानू (मणिपुर)

साइखोम मीराबाई चानू भारत की एक खिलाड़ी हैं। इन्होंने ग्लासगो में हुए 2014 राष्ट्रमण्डल खेलों में भारोत्तोलन स्पर्धा के 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक प्राप्त किया। उन्होंने कुल 170 किलो वजन उठाया, जिसमें 75 स्नैच में और 95 क्लीन ऐंड जर्क में था। इन्होंने ब्राज़ील के रियो डी जेनेरो में आयोजित २०१६ ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक के लिए क्वालीफाई किया, किंतु वहाँ कोई पदक जीतने में असफल रहीं।

 

Padma Shri Pandit Shyam Lal Chaturvedi
पंडित श्याम लाल चतुर्वेदी (छत्तीसगढ़)

मूलतः छत्तीसगढ़ी के साहित्यकार और कवि, पत्रकार जनसत्ता और नवभारत टाइम्स के प्रतिनिधि रह चुके हैं। 1940-41 से लेखन आरम्भ, प्रारम्भ में हिन्दी में किन्तु ‘विप्र’ जी की प्रेरणा से छत्तीसगढ़ी लेखन आरम्भ। छत्तीसगढ़ी पर पूर्ण अधिकार, पेशे से शिक्षक भी थे। भोलवा भोलाराम नामक कहानी संग्रह भी प्रकाशित है।

विस्तृत परिचय

श्यामलाल चतुर्वेदी का जन्म सन् 1926 में कोटमी गांव, जिला बिलासपुर में हुआ था, वे छत्तीसगढ़ी के गीतकार भी हैं। उनकी रचनाओं में “बेटी के बिदा” बहुत ही जाने माने हैं। उनको बेटी को बिदा के कवि के रुप में लोग ज्यादा जानते हैं। उनकी दूसरी रचनायें हैं – “पर्रा भर लाई”, “भोलवा भोलाराम बनिस”, “राम बनबास” ।

Padma Shri Jose Joey A Concepcion
जोस जोए ए कांसेपशिअन (फिलीपिंस)

व्यापर एवं औद्योगिकीकरण में योगदान हेतु आरऍफ़एम कॉर्प के अध्यक्ष जोस जोए ए कांसेपशिअन को पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया है|

 

अनवर अहमद उर्फ अनवर जलालपुरी (मरणोपरांत)- साहित्य एवं शिक्षा

नौफ अल मारवाई- योग

मोहनस्वरूप भाटिया- लोकसंगीत
नारायण दास- अध्यात्म
सोमदेव किशोरदेव बर्मन- खेल (टेनिस)

डॉ. येशी दोनदेन- चिकित्सा

डॉ. अरुप कुमार दत्ता- साहित्य एवं शिक्षा

अरविंद कुमार गुप्ता- साहित्य एवं शिक्षा

प्रो. दिगंबर हंसदा- साहित्य एवं शिक्षा

एम पियोंग्तम्जन जमीर- साहित्य एवं शिक्षा

मालती जोशी- साहित्य एवं शिक्षा

प्राण किशोर कौल- कला

लक्ष्मीकुट्टी- परंपरागत चिकित्सा

डॉ. जयश्री गोस्वामी महंत- साहित्य एवं शिक्षा

प्रभाकरण महाराणा- मूर्तिकला

डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र- साहित्य एवं शिक्षा

सुबासिनी मिस्त्री- समाजसेवा

वी नानम्माल- योग

सूलगित्ति नरसम्म- समाजसेवा

गोवर्धन पाणिका- कला (बुनाई)

मुरलीकांत राजाराम पेटकर- खेल (तैराकी)

संपत तुका राम टेके (मरणोपरांत)- समाजसेवा

सत्यनारायण सिंह शिवसिंहजी राठौर- सिविल सेवा

अमिताभ रॉय- विज्ञान एवं इंजीनियरिंग

आर सत्यनारायण- कला एवं संगीत

भज्जू श्याम- चित्रकला

महाराव रघुवीर सिंह सिरोही- साहित्य एवं शिक्षा

किदांबी श्रीकांत- खेल (बैडमिंटन)

लेंटिना आओ ठक्कर- समाजसेवा

रुद्रपट्टनम नारायणस्वामी थारंथन और रुद्रपट्टनम नारायणस्वामी त्यागराजन- कला एवं संगीत

प्रो. राजगोपालन वासुदेवन- विज्ञान एवं इंजीनियरिंग
मानस बिहारी वर्मा- विज्ञान एवं इंजीनियरिंग
योगेंद्र – कला

(नोट : लेखन प्रगति में है| अधिक जानकारी हेतु इस लेख को अगले दिन अवश्य पढ़ें)

गर आप भी लिखते है तो हमें ज़रूर भेजे, हमारा पता है:

साहित्य: 

editor_team@literatureinindia.com

समाचार: 

news@literatureinindia.com

जानकारी/सुझाव: 

adteam@literatureinindia.com

हमारे प्रयास में अपना सहयोग अवश्य दें, फेसबुक पर अथवा ट्विटर पर हमसे जुड़ें

Advertisements

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this:
search previous next tag category expand menu location phone mail time cart zoom edit close