पलकों के पालने में सजा है एक सपना,

जब मैं जागती तो वो भी जागता,

जब मैं सोती तो भी वो जागता ।

 

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एक दिन पूछा मैंने उसको –

नींद नहीं आती तुमको ?

तो कहा सपने ने मुस्कुराते हुए ,

 कौन आता है रोज़ तुम्हे उठाने के लिए !

तू जब भी है सोती ,

मेरे ही बीज बोती।

और जब जागती ,

तो मुझे बड़ा करने की आरज़ू में लग जाती।

तेरी नींद ही मेरा सुकून है।

और तेरा जागना मेरा ही जूनून है।

Neha Singh Parihar | Satna| Madhya Pradesh

नेहा सिंह परिहार

सतना, मध्यप्रदेश

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