कर पूर्ण उन्हें संकल्प जो तेरा

तेरे पग न रुके हो घोर अंधेरा

अब दरी नही मंज़िल है सामने

ख़त्म हुआ अब वक्त़ ये तेरा।

Sankalp Poem- Mukesh Negi

इन राहों में हजार हो उलझन

साँस थमे तेरी तेज हो धड़कन

न घबराना देख इन्हें तू

अभी है आगे और भी दलदल।

 

रुकने न दे अपने ये कदम

लगाले जितना तुझमें है दम

कर साकार वो सपना जिसमें

भले ही वक्त़ है थोड़ा कम।

 

मेहनत से ये दिल न चुरा

हिम्मत अपनी देख जरा

घुटने टेक न मुश्किल में

खुद में एक विश्ववास जगा।

 

कर दिन-रात ये एक सभी

पूरी कर रह गई जो कमी

न कम है किसी और से तू

तेरे सामने होंगे फीके सभी।

 

साबित कर दुनिया को दिखा

अपने दिल से डर को भगा

सोच ये मत करना है तुझे

सपने को सच करके दिखा।

 

मन मे एक विश्ववास तू रख

नजरों से सब देख परख

नफ़रत से कई देख तुझे

पर मंज़िल मे ध्यान तू रख।

 

संकल्प हो तेरा सबसे महान

विश्व मे गूंजे तेरा नाम

देखके तुझको जग भी सीखे

करे तुझे शत-शत प्रणाम।

Mukesh Negi| TihriFarm| Dehradun

मुकेश नेगी

टिहरीफार्म, रायवाला, देहरादून

गर आप भी लिखते है तो हमें ज़रूर भेजे, हमारा पता है:

साहित्य: 

editor_team@literatureinindia.com

समाचार: 

news@literatureinindia.com

जानकारी/सुझाव: 

adteam@literatureinindia.com

हमारे प्रयास में अपना सहयोग अवश्य दें, फेसबुक पर अथवा ट्विटर पर हमसे जुड़ें