देखो तो शब्दों में
कितना जादू है!
मेरे शब्द मुझे उस लोक में ले आये हैं

 

Dekho to Shabdo me| Literature in India

जहाँ सब सुन्दर हैं!
यहाँ हर और बिखरते
रुप, रंग, रस, राग के झरने
यहाँ हर पल उत्सव है
दुख की तो परछाई भी नहीं
जीवन फूट-फूट पड़ता है ।

देखो तो शब्दों में
कितना जादू है!
मैं जब लिखती हूं ‘प्रेम’

रोम-रोम
पुलकित हो उठता है
मैं जब लिखती हूं ‘दर्द’
झरने लगती हैं आँखे
मैं शब्दों से ही
इन झरनों पर
बाँध लगाती हूं!
जब-जब लिखती हूँ ‘खुशियाँ’
आँखो में चाँदनी छा जाती है!
तुम फूल लिखकर देखो
कैसे बिखर जाती है खुशबू
मँडराती हैं तितलियाँ

कभी जानो तो…
शब्दों में कितना जादू है!
मैं भोर लिखती हूं
उतर आती है
गालों पर लालिमा
प्रकृति पर लिखते ही
छा जाती है हरियाली
चारो ओर
देखो तो…
शब्दों में कितना जादू है!

Minakshi Vaishth | मीनाक्षी वशिष्ठ

मीनाक्षी वशिष्ठ
१८/९/२०१७

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