Hum Radical Santaane
चित्र: गूगल

रेडिकल होना जूझना है वस्तुस्थिति के विपरीत
पेंडुलम होना भी है आधुनिकता और परम्परा के बीच।
न तो पूर्णतः सम्मानित और न ही नकारने योग्य
हम रेडिकल संतानें दुनियां से लड़ते-लड़ते
खुद ही हो जाते हैं संक्रमित क्योंकि हमारे वाद को
न कोई पचा पाता है न ही ठुकरा पाता है।
हमारे तर्कपूर्ण विचार सामने वाले को करता है निरुत्तर
तब स्त्री-पुरुष दोनों के शरीर से मर्दवादी गंध आती है
हमें काट नहीं सकते तर्को से तो धकेलती हैं हाशिए पर।
हमें उपमाओं, व्यंजनाओं से करते हैं सुशोभित कि
शुलामिथ फायरस्टोन की संतानें वंशवाद विरोधी हैं।
संस्कृति और परम्परा के नाम पर धब्बा हैं,
ये रेडिकल संतानें परिवार नामक संस्था को
निगलने के लिए हुईं हैं पैदा और
विवाह नामक शोषण कारी संस्था के समानांतर
गढ़ती हैं नए लोकतान्त्रिक सहमति वाला प्रेम।
करती हैं वैवाहिक बलात्कार का विरोध और
लूटती हैं पुरुषवाद की अस्मत दिन-दहाड़े।
नहीं समझे! पुरुष एकाधिकार को चुनौती देना
उनके मर्दवाद की अस्मत लूटना ही तो है!

ये रेडिकल संताने बड़े-बूढ़ों का करती हैं अपमान
नहीं पैदा करतीं हैं बच्चे, नहीं बनना चाहती हैं मशीन।
सहस्त्रावतार की भक्त भी नहीं ये मानवतावाद की पुजारन
स्त्री के सहस्त्र शोषणकारी रूप की समझती हैं राजनीति।
जानती हैं कि उनकी परीक्षा हो गई है और कठिन।
लोगों के अंदर पैदा है भय उनकी मुक्त अभिव्यक्ति से।
कोई अपना नहीं रहा इनकी स्वतंत्र चाहत को।
इनका हो रहा विरोध क्योंकि किसी को पसंद नहीं
इन रेडिकल संतानों का मुक्त आकाश में विचरण करना।

Dr Chitralekha Anshu | डॉ. चित्रलेखा अंशु
Dr Chitralekha Anshu

डॉ. चित्रलेखा अंशु

प्राध्यापक महिला अध्ययन केंद्र
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, बिहार
 
साहित्यिक परिचय:
डॉ. चित्रलेखा अंशु जेंडर, मानवाधिकार तथा नारीवादी साहित्य की विषय विशेषज्ञ होने की योग्यता रखती हैं। इनके कई आलेख तथा शोध आलेख विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय जर्नल तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। दो पुस्तकों में अध्यायों का लेखन भी किया है। ऑल इंडिया रेडियो में महिला विषय पर इनका वक्तव्य कई बार ब्राडकास्ट किया जा चुका है। सामाजिक कार्य तथा साहित्य से विशेष लगाव होने के कारण डॉ अंशु लगातार लेखन के द्वारा अपनी अभिव्यक्ति परिलक्षित करती रहती हैं। सम्प्रति मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा, बिहार के महिला अध्ययन केंद्र में प्राध्यापक के पद पर आसीन हैं।

 

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