शब्दशक्ति के प्रकार

हिन्दी व्याकरण में शब्दशक्ति तीन प्रकार की होती है:

अभिधा

वे वाक्य जिनका साधारण शाब्दिक अर्थ और भावार्थ समान हो तो उसे अभिधा शब्द शक्ति कहते हैं।

इसमें सभी पाठकों अथवा वाचकों अथवा श्रोताओं के लिए वाक्य अथवा वाक्यांश का अर्थ समान होता है। इसमें उत्पन्न भाव को वाच्यार्थ कहा जाता है।

उदाहरण
हिन्दी एक भाषा है। : पाइलेट बाजार जाता है
वाक्य का अर्थ और भावार्थ
यहाँ वाक्य का अर्थ साधारण है। चूँकि हिन्दी एक भाषा है और भाषा किसी से वार्तालाप करने का एक माध्यम है, ठीक उसी प्रकार हिन्दी भी वार्तालाप का एक माध्यम है।

लक्षणा

यहाँ वाक्य का साधारण अर्थ और भावार्थ भिन्न होता है।

जिस वाक्य का सामान्य अर्थ कोई महत्च रखे अथवा नहीं लेकिन वह वाक्य किसी संज्ञा अथवा सर्वनाम की विशेषता प्रकट करने के लिए प्रयुक्त होता है। सामान्य शब्दों में यह शब्द शक्ति वहाँ प्रयुक्त होती है जहाँ वक्य का लक्षण बताया जाता है। यहाँ उत्पन्न भाव को लक्ष्यार्थ कहा जाता है।

उदाहरण
रामू शेर है।
वाक्य का अर्थ और भावार्थ
यहाँ दिया गया वाक्य एक लघु वाक्य है और इसका अर्थ सामान्य नहीं है। अर्थात रामू एक व्यक्ति है। चूँकि वह आदमी है तो शेर नहीं हो सकता क्योंकि शेर एक जानवर है। लेकिन उसके हावभाव, विचार एवं कार्य शेर जैसे हो सकते हैं। अर्थात यहाँ रामू की विशेषता बतायी गई है।

व्यंजना

व्यंजना शब्द शक्ति वहाँ प्रयुक्त होती है जहाँ वाक्य तो साधारण होता है लेकिन उसका प्रत्येक पाठक अथवा श्रोता के लिए अपना-अपना भिन्न अर्थ होता है। इससे उत्पन्न भाव को व्यंग्यार्थ कहा जाता है।

उदाहरण
सुबह के 08:00 बज गये।
वाक्य का अर्थ और भावार्थ
यहाँ वाक्य साधारण है लेकिन इसका प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न अर्थ है। जैसे एक ऐसा व्यक्ति जो जिसका कार्य रात के समय पहरेदारी करना है तो वह इसका अर्थ लेगा कि उसकी अब छुट्टी हो गयी है। एक साधारण कार्यालय जाने वाला व्यक्ति इसका अर्थ लेगा कि उसे कार्यालय छोड़ना जाना है। एक गृहणी महिला इसका अर्थ अपने घर के कार्यों से जोड़कर देखेगी। बच्चे इसका अर्थ अपने विद्यालय जाने के समय के रूप में लेंगे। पुजारी इसका अर्थ अपने सुबह के पूजा-पाठ से जोड़कर देखेगा। अर्थात वाक्य एक है लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के लिए भावार्थ अलग-अलग।

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शब्दशक्ति के प्रकार&rdquo पर एक विचार;

  1. तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।
    सिंह गर्जना के रव घनघोर,नभमण्डल में करते जाओ।।

    काली – चण्डी – भैरव का रूप धरो ,
    यदि आये कदन राह में उसका भी वरण करो ,
    जब तक हैं श्वास तुम्हारे , अरि से लड़ते जाओं ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    रण – देवी के खातिर स्वयं फूल बन ,
    अर्पण कर दो अपना तन यह जीवन ,
    धूप-अर्घ्य-नैवेद्य अपरिमित,मन से अर्पित करते जाओ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    तुम पथ पर निज नित बढ़ कर ,
    पग चिन्ह छोड़ते जाओ केवल ,
    उन पग चिन्हों पर देश चलेगा, राह सरल करते जाओ ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    एक धर्म हो केवल राष्ट्रप्रेम का ,
    एक जाति हो एकाकी मानवता का ,
    पथ चाहे कितने भिन्न मगर , गीत एक ही गाते जाओ ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    हारा है वीर सदा अपनी ही दुर्बलता से ,
    या घर में बैठे गद्दारों की कायरता से ,
    छोड़ो गद्दारी, शुद्ध करो मन, नमक अदा करते जाओ ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    पत्थर बाज नहीं यदि तुम सपूत सच्चे होते,
    क्या घाटी में कोई आतंकवाद के बच्चे होते,
    छोड़ो नादानी भ्रम-जाल, निज अस्तित्व गढ़ते जाओ ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    पूछ रहा जन नेताओं से क्या उत्तर दे सकते हैं,
    जोड़ तोड़ की राजनीति से क्या ऊपर उठ सकते हैं ,
    छोड़ो आपस में टकराना संग – संग सब चलते जाओ ।
    तुम भारत के वीर ! ले विजय पताका बढ़ते जाओ ।।

    🙏 जय हिन्द, जय भारत 🙏
    ✍रमेश तिवारी लल्लन गुलालपुरी

    10/10/2018 7:09 PM को “लिटरेचर इन इंडिया | Literature in India |
    literatureinIndia” ने लिखा:

    ठाकुर दीपक सिंह कवि posted: “हिन्दी व्याकरण में शब्दशक्ति तीन प्रकार की
    होती है: अभिधा वे वाक्य जिनका साधारण शाब्दिक अर्थ और भावार्थ समान हो तो उसे
    अभिधा शब्द शक्ति कहते हैं। इसमें सभी पाठकों अथवा वाचकों अथवा श्रोताओं के
    लिए वाक्य अथवा वाक्यांश का अर्थ समान होता है। इसमें उत्पन्”

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