कहाँ गया है चाँद हमारा
आज प्रिये की पूजा है ।
कब तक ऐसे छुपा रहेगा
बिना तेरे न दूजा है ।

भूख प्यास से व्याकुल है वो
कुछ तो उसका ख्याल करो ।
जल्दी से आ जाओ प्यारे
उसको न बेहाल करो ।

मांग भरे वो कब से बैठी
बस तेरा इंतजार करे ।
क्यों इतना तरसाता इनको
तुझको इतना प्यार करे ।

थाल सजाकर लिये आरती
एकदम से तैयार खड़ी ।
नहीं सूझता उसे और कुछ
ऐसे वो बेचैन पड़ी ।

बिना चाँद के देखे उसका
न होगा व्रत पूर्ण यहाँ ।
करती है ये पती की सेवा
करके व्रत संपूर्ण यहाँ ।

कहाँ छुपे हो चंदा भाई
आ जाओ इक बार यहाँ ।
मेरी प्रिये को मत तड़पाओ
अब बढ जायेगा प्यार यहाँ ।

तेरा साँझ सवेरे करे निवेदन
फिर क्योँ इतना दूर हुआ ।
कैसा तेरा दया कलेजा
निर्दयी में मजबूर हुआ ।

धक धक करता उसका दिल है
गर कहीं छुपा तू रहा ही गया ।
पतिव्रता धर्म ही टूटेगा
ऐसा वेदों में कहा ही गया ।

प्रेम प्रतिष्ठा का पावन व्रत
जो दिल से संपूर्ण करे ।
नहीं कोई है वो शक्ति जो
उन सभी पति को चूर्ण करे ।

ओम नारायण कर्णधार | लिटरेचर इन इंडिया
ओम नारायण कर्णधार

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