शब्दशक्ति के प्रकार

हिन्दी व्याकरण में शब्दशक्ति तीन प्रकार की होती है: अभिधा वे वाक्य जिनका साधारण शाब्दिक अर्थ और भावार्थ समान हो तो उसे अभिधा शब्द शक्ति कहते हैं। इसमें सभी पाठकों अथवा वाचकों अथवा श्रोताओं के लिए वाक्य अथवा वाक्यांश का अर्थ समान होता है। इसमें उत्पन्न भाव को वाच्यार्थ कहा जाता है। उदाहरण हिन्दी एक भाषा है। : पाइलेट बाजार जाता है वाक्य का अर्थ … पढ़ना जारी रखें शब्दशक्ति के प्रकार

डर के गठबंधन पर दूरगामी प्रश्नचिन्ह

लगभग दो दशक यानि 1993 के बाद, देश के दो सबसे बड़े क्षेत्रीय दल अपने अस्तित्व को बचाने की कवायद में फिर से एक हो चले हैं| बसपा के संस्थापक कांशीराम और मुलायम सिंह यादव की दोस्ती जब परवान चढ़ी थी तो उस वक़्त मुलायम सिंह यादव द्वारा अस्तित्व में आई समाजवादी पार्टी उत्तरप्रदेश की राजनीति में पाँव ज़माने की कोशिश में लगी हुई थी| … पढ़ना जारी रखें डर के गठबंधन पर दूरगामी प्रश्नचिन्ह

कमला प्रसाद यादव की वापसी बसपा के लिए झटका तो सपा के लिए रामबाण

आज़मगढ़ : पूर्व एमएलसी एवं कद्दावर नेताओं में शुमार कमला प्रसाद यादव की वापसी सपा के लिए मुनाफ़े का सौदा है क्योंकि जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है सपा पूरे दम-ख़म से अपने पुराने सिपाहियों को सहेजने में लग गयी है| कारण भी साफ़ है कि जिस तरह हाल में सपा विधानसभा चुनावों और निकाय चुनावों में संतोषजनक प्रदर्शन करने में असफल हुई है … पढ़ना जारी रखें कमला प्रसाद यादव की वापसी बसपा के लिए झटका तो सपा के लिए रामबाण

अगस्त हो या सितम्बर, बच्चे तो मरते ही हैं

गोरखपुर की त्रासदी को अभी बहुत ज्यादा दिन नहीं बीते हैं, घाव अभी भी हरा है, सांस अभी भी फूली है, दर्द अभी भी बेशुमार है; और साथ ही साथ यह भी याद है कि कैसे उपचार में हुई लापरवाही और कमिशनखोरी पर लगाम कसने में नाकाम सरकार की वजह से सैकड़ों बच्चे मार दिए गये| जी हाँ, वो बच्चे मरे नहीं, मारे गए…लेकिन योगी … पढ़ना जारी रखें अगस्त हो या सितम्बर, बच्चे तो मरते ही हैं

Congress planned Mandsaur Violence behind Farmers protest against Shivraj Singh Chauhan

खुलासा: कांग्रेस की साजिश है मंदसौर किसान आन्दोलन, पूरी प्लानिंग के तहत हुआ उपद्रव

भारत के दिल में बसा मध्यप्रदेश इन दिनों सुलग रहा है| शिवराज सरकार पर संकट के बादल छाये हुए है, कारण है उग्र हो छुआ किसान आन्दोलन| उग्र हो चुके आन्दोलन को शांत करने हेतु मध्यप्रदेश पुलिस और सीआरपीएफ़ को तथाकथित रूप से गोली चलानी पड़ी जिसमे ६ किसानो की मौत हो गयी| मध्यप्रदेश आखिर किसानो की मांग क्या है: 1) किसानों को कर्ज माफी … पढ़ना जारी रखें खुलासा: कांग्रेस की साजिश है मंदसौर किसान आन्दोलन, पूरी प्लानिंग के तहत हुआ उपद्रव

Nancy Jha of Bhagalpur, Bihar was brutally raped and murdered but Nitish Kumar government and Police is silent

मैं नैन्सी की लाश बोल रही हूँ…

पूरी रात सो न सका वो विभत्स मंज़र देख कर, सोचा कि अगर नैन्सी सच में आज कुछ लिख पाती तो यही लिखती: नमस्कार! मैं नैन्सी की लाश बोल रही हूँ… श्श्श्श…आत्मा। मैं तो लाश थी… सड़ गयी पर आख़िर कैसे आप सभी का ज़मीर सड़ गया? मैं अपने पापा की गुड़िया थी…अम्माँ की परी…लेकिन जिन दरिंदों ने मुझे नोचा, फाड़ा, हवस से जला दिया, … पढ़ना जारी रखें मैं नैन्सी की लाश बोल रही हूँ…

Atal Bihari Vajpayee speaking in front of Huge mass about Nehru

जिन नेहरु को आज भाजपाई गरिया रहें है, उनकी मौत पर अटल जी की आखें हुई थी नम

महोदय, एक सपना था जो अधूरा रह गया, एक गीत था जो गूँगा हो गया, एक लौ थी जो अनन्त में विलीन हो गई। सपना था एक ऐसे संसार का जो भय और भूख से रहित होगा, गीत था एक ऐसे महाकाव्य का जिसमें गीता की गूँज और गुलाब की गंध थी। लौ थी एक ऐसे दीपक की जो रात भर जलता रहा, हर अँधेरे … पढ़ना जारी रखें जिन नेहरु को आज भाजपाई गरिया रहें है, उनकी मौत पर अटल जी की आखें हुई थी नम

उत्तरप्रदेश पुलिस संवेदना, साहस एवं दायित्व के सफ़र में गंभीर

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री पद को सँभालने के बाद ही जिस प्रकार योगी आदित्यनाथ ताबड़तोड़ फैसले कर रहे थे उससे यह साफ़ ज़ाहिर हो गया था कि मौजूदा योगी सरकार महिला सुरक्षा हेतु अति गंभीर है| इसी क्रम में योगी सरकार ने जैसे ही ‘एंटी-रोमियो स्क्वाड’ का गठन किया, ठीक उसी वक़्त उत्तरप्रदेश पुलिस की जिम्मेदारियां और बढ़ गयी| जनसँख्या के हिसाब से सबसे बड़े सूबे … पढ़ना जारी रखें उत्तरप्रदेश पुलिस संवेदना, साहस एवं दायित्व के सफ़र में गंभीर

खुलासा: अखिलेश सरकार में हाई कोर्ट आरओ भरती में हुआ बड़ा घोटाला, एसडीएम भर्ती के बाद सबसे बड़ी धांधली!

उच्च न्यायालय यानि हमारा हाई कोर्ट, जहाँ सब न्याय की आस लेकर जाते है…उसी न्यायालय की भर्ती में घोटाला करवा दिया गया और किसी को कानों-कान ख़बर तक नहीं लगी! जी हाँ! एसडीम भर्ती में हुए घोटाले के बाद भी, पैसे ने सर चढ़कर प्रतिभागियों एवं मेधावियों की उम्मीदों पर चुना लगाया और यह सब होता रहा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाक़ के नीचे! … पढ़ना जारी रखें खुलासा: अखिलेश सरकार में हाई कोर्ट आरओ भरती में हुआ बड़ा घोटाला, एसडीएम भर्ती के बाद सबसे बड़ी धांधली!

किसान हूँ, आत्महत्या मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है…

हाँ साहब! मैं वही हूँ जिसने धरती का सीना फाड़, अपने पसीने से सींच वो फ़सल उगाई है जो आज आपके थालियों की शोभा बढ़ा रही हैं| मैं वही हूँ जो चिलचिलाती धूप में, बिलबिलाते से खेतों में कीचड़ से सने हुए अपने खून के कतरे को बूंद-बूँद टपका रहा हूँ, इस उम्मीद में कि शायद मेरी बेटी की शादी हो जाए…मेरा बेटा भी किसी … पढ़ना जारी रखें किसान हूँ, आत्महत्या मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है…

अगर आप समाजवादी पार्टी से है तो अखिलेश बबुआ की पुलिस आपकी ज़ेब में है

भले ही आजकल समाजवाद का झंडा बुलंद किये उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी साफ़ छवि का ढिंढोरा पीट रहे हो पर उन्हीं की पार्टी के कार्यकर्ता कुछ न कुछ ऐसा कर जाते हैं जिससे उनके किये कराये पर पानी फिर जाता है| हाल में जिस नाटकीय घटनाक्रम से उत्तरप्रदेश का यादव परिवार गुज़र रहा है, अखिलेश यादव हर जगह अपनी साफ़ छवि की ब्रांडिंग … पढ़ना जारी रखें अगर आप समाजवादी पार्टी से है तो अखिलेश बबुआ की पुलिस आपकी ज़ेब में है

डिजिटल क्रांति एवं जनसेवा की ओर अग्रसर यूपी पुलिस

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Jharkhand Girl Tied with rope by police

आखिर किस हद तक गिर चुकी है पुलिस?

हाल ही में झारखण्ड पुलिस का एक बेहद ही शर्मनाक चेहरा सामने आया है| घटना राजस्थान के अलवर जिले से है जहाँ झारखण्ड पुलिस, एक महिला द्वारा दहेज़ उत्पीड़न के एक मामले में सास, ससुर और महिला के पति को गिरफ्तार करने पहुंची थी| पुलिस जब बैंक कॉलोनी पहुंची तो नामजद सास, ससुर और पति फ़रार थे| घर पर अपर्णा से पहले तो पूछताछ की गयी फिर उसकी कमर को रस्सी में बांधकर घसीटते हुए रेलवे स्टेशन तक लाया गया, हद तो तब हो गयी जब ये बेहया पुलिस टीम क़ानून को ही ताख पर रख कर अपर्णा को रस्सी में बंधे हुए ही ट्रेन में बैठाकर झारखण्ड रवाना हो गयी|

ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेशानुसार किसी महिला को हथकड़ी नहीं लगायी जा सकती परन्तु यहाँ पुलिस ने उस लड़की की इज्ज़त को बीच सड़क सैकड़ो लोगों के सामने तार-तार कर दिया| पुलिस द्वारा यह कृत्य रेप जैसे जघन्य अपराध की श्रेणी में दर्ज किया जा सकता है पर वही बात ‘जब सैयां थानेदार तो…”…मुकदमा दर्ज करे तो कौन करे? पढ़ना जारी रखें आखिर किस हद तक गिर चुकी है पुलिस?

Maovad.. - Literature in India

माओवाद सही भी है, गलत भी…बस नज़रिए का फर्क है|

नई दिल्ली से धनबाद की यात्रा पर हूँ| लोगों से बहुत सुना था कि झारखंड प्राकृतिक सौन्दर्य को अभी भी संवारे हुए है, इसलिए प्रकृति के इस नायाब करिश्मे और सुन्दरता को देखने का मन हुआ| बहुत सोचने के बाद तय किया कि भारतीय रेल से यात्रा की जाय क्यूंकि रेल की पटरियों के किनारे ही आपको आधी सुन्दरता का दर्शन हो जाएगा| तो फिर क्या था, मैं ठहरा महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन का अनुयायी, चुनाव आते ही अम्बेडकरवाद में पगलाए मेरे देश के नेताओं और लेखकों से कहीं दूर….सैर कर दुनिया की गाफ़िल जिंदगानी फिर कहाँ….को महसूस करने…वास्तव में असली लेखक वही है जो प्रकृति और मानव विज्ञान में निहित प्रेम के दर्पण में खुद की मानवता का प्रतिबिम्ब उद्धृत कर ले| मैंने भी इसी परिपाटी को आगे बढाने की ठानी| मैंने भी सोचा क्यूँ न एक लेखक होने के नाते महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन हो जाया जाय| अथाह सुख की अनुभूति है प्रकृति की बाहों में|

इसी बीच जब मेरे अंदर का मानव जाग जाता है तो मेरी निगाहें पास बैठे लोगों के पास पहुँच जाती है…कुछ लोग मस्त हवा के आनंद में इस कदर जन्म भर से थकाए है कि उंघ रहे है…कुछ दुसरे के कंधे पर सर मार कर सो रहे है और मैं एक बन्दर की तरह सब सुत्तक्कड़ो के बीच प्रकृति की सुन्दरता ही निहार रहा कर अघा रहा हूँ| भले ही ढंग से हिंदी न आती हो लेकिन सुबह होते ही सबके हाथ में टाइम्स ऑफ़ इंडिया, द हिन्दू और द टेलीग्राफ है| मेरे हाथ में सब अमर उजाला देख कर यूँ घुर रहे है जैसे मैं भारत में नहीं रूस के किसी ट्रेन के डिब्बे में बैठ कर हिंदी अखबार को सबकी निगाहों में चुभने के लिए खोल दिया हूँ| खैर ज्यादा पढ़े – लिखे लोग खतरनाक होते है इसलिए मैं अपनी निगाहों को फिलहाल अपने अखबार में ही समेट कर रखा हूँ| इसी बीच ट्रेन के बीच कुछ अतिसज्जन लोग घुस कर बोल रहे है कि “तनी खिसका हो, काहें इतना दूरे ले बैठल हवा, हमनो के तनी स जगह चाही मतलब चाही…बुझाइल|”
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आखिर कितना सही है मैगी पर प्रतिबन्ध? नियमों का पालन या कुछ और?

मैगी की शुरुआत इतनी नयी नहीँ है जितना की आम आदमी भारत में सोचता है। मैगी का प्रचलन 2004 के बाद बहुत ज्यादा बढ़ गया पर क्या आपको पता है कि आपके पसंदीदा खाद्य पदार्थो में से एक रहे मैगी का इतिहास क्या है? आखिर कितना पुराना है आपका मैगी ब्राण्ड? आइए हम आपको बताते है। मैगी का इतिहास मैगी ब्रांड के जनक जूलियस मैगी … पढ़ना जारी रखें आखिर कितना सही है मैगी पर प्रतिबन्ध? नियमों का पालन या कुछ और?

चार सवाल बनाम भूमि अधिग्रहण बिल/विधेयक – ठाकुर दीपक सिंह कवि

यह लेख आपके समक्ष प्रस्तुत करने से पहले मैं आप सभी को अवगत कराना चाहता हूँ कि इस लेख के कुछ अंश मैंने पढ़ कर या फिर विभिन्न रचनाकारों की राय के आधार पर लिखे है, अगर यहाँ पर प्रस्तुत विचार आप की रचना के किसी अंश से थोड़ा बहुत भी मेल खाता प्रतीत हो समझ लीजियेगा कि हाल फिलहाल में मैं आपके लेख, विचार … पढ़ना जारी रखें चार सवाल बनाम भूमि अधिग्रहण बिल/विधेयक – ठाकुर दीपक सिंह कवि

कितना ख़ास है सशक्त लोकतंत्र के मुखिया का सबसे बड़े लोकतंत्र में आगमन?-ठाकुर दीपक सिंह कवि (प्रधान संपादक)

भारत और अमेरिका के सुर अतीत में भले ही एक दूसरे से मेल न खाते रहे हो परंतु आज स्थिति में वांछित बदलाव है। दोनों ही देश के प्रमुख विकास के मुद्दे पर आम सहमति रखने वाले है। वैश्विक मंचो पर दोनों ही देश गर्मजोशी से मिले है और विचारधारा में भी आपसी समन्वय है। रिश्तों और आकांक्षाओं की बात करने से पहले पूर्व में … पढ़ना जारी रखें कितना ख़ास है सशक्त लोकतंत्र के मुखिया का सबसे बड़े लोकतंत्र में आगमन?-ठाकुर दीपक सिंह कवि (प्रधान संपादक)