भारत की मूल समस्या यह है कि यहां शासक और जनता के बीच कभी कोई तारतम्य नहीं रहा है

डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा था कि भारत की मूल समस्या यह है कि यहां शासक और जनता के बीच कभी कोई तारतम्य नहीं रहा है. यह हिंदू शासकों के लिए भी उतना ही सही है, जितना कि मुस्ल‍िम शासकों के लिए. अतीत के लिए भी, आज के लिए भी. ग़ौरी, गज़नवी, चंगीज़, तैमूर, दुर्रानी, अब्दाली जैसे मुस्ल‍िम आक्रांता लूटखसोट की फ़िराक़ में थे. हिंदुस्तान … पढ़ना जारी रखें भारत की मूल समस्या यह है कि यहां शासक और जनता के बीच कभी कोई तारतम्य नहीं रहा है

फोटो में दिख रहा लड़का रांची का है…पढ़िए पूरा मामला

फोटो में दिख रहा लड़का रांची का है। इलाहाबाद में एसएससी की तैयारी करता है। अपना खर्चा निकालने के लिए लक्ष्मी टाकीज के पास चिकन रोस्ट की दुकान लगाता है। दुकान की आमदनी से अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ घर वालों को भी पैसे भेजता है। घर वालों को इस बारे में कुछ नहीं पता है। पहली बार जब उसने पैसे बचाकर १५ हज़ार … पढ़ना जारी रखें फोटो में दिख रहा लड़का रांची का है…पढ़िए पूरा मामला

बड़ा महत्व है – रमा सिंह

कार्यालय में क्लर्क का, व्यवसाय में संपर्क का जीवन में वर्क का, रेखाओं में कर्क का बड़ा ही महत्व है   इलेक्शन में वोट का, गिरने में चोट का ड्रेस में कोट का, पॉकेट में नोट का बड़ा ही महत्व है   कवियों में बिहारी का, कथा में तिवारी का सभा में दरबारी का, भोजन में तरकारी का बड़ा ही महत्व है   रत्नों में … पढ़ना जारी रखें बड़ा महत्व है – रमा सिंह

कृष्णवट : सुशोभित सक्तावत

“गीता” में श्रीकृष्ण ने स्वयं को “अश्वत्थ वृक्ष” कहा है। “समस्त वृक्षों में मैं “अश्वत्थ” हूं।” “अश्वत्थ” यानी पीपल का पेड़। किंतु श्रीकृष्ण केवल अश्वत्थ ही नहीं हैं, वे स्वयं में एक “महावन” हैं! ब्रज में एक नहीं दो नहीं सोलह वन हैं! और वनखंडियां तो अगणित! मैं उसी ब्रज की भूमि में “वंशीवट” की तरह स्वयं को रोप देना चाहता हूं! इन सोलह वनों … पढ़ना जारी रखें कृष्णवट : सुशोभित सक्तावत

क्या “अयोध्या”, क्या “अमरनाथ”

अमरनाथ यात्रा के प्रति कश्मीरियों का द्वेष अयोध्या के प्रति मुस्ल‍िमों के द्वेष से कम नहीं है, ऐसी धारणा अगर बन गई है, तो यह निर्मूल नहीं है। अमरनाथ इधर पिछले नौ सालों से कश्मीर का “अयोध्या” जो बन गया है। और यही कारण है कि अमरनाथ यात्र‍ियों पर हमला करने के अनेक मायने होते हैं। आतंकी कहीं भी हमला कर सकते थे, लेकिन अमरनाथ … पढ़ना जारी रखें क्या “अयोध्या”, क्या “अमरनाथ”

अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता

जिस कश्मीर में मानवाधिकार के नाम पर ज्यूडिशियली खुद संज्ञान ले कर एक पत्थरबाज आतंकी को दस लाख का मुआवजा देने की सरकार को सिफ़ारिश करती हो उस कश्मीर में अगर अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता । जिस देश में गल्फ फंडिंग और क्रिश्चियन मिशनरी फंडिंग पर पल रहे एन … पढ़ना जारी रखें अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता

लिबरल कम्‍युनिस्‍ट व्‍यावहारिक होते हैं

  “लिबरल कम्‍युनिस्‍ट व्‍यावहारिक होते हैं। उन्‍हें सैद्धांतिकी वाले तरीके से नफ़रत होती है। उनके लिहाज से आज कोई एकल शोषित वर्ग नहीं है। केवल कुछ ठोस समस्‍याएं हैं जिन्‍हें हल किया जाना है- अफ्रीका में भुखमरी, मुस्लिम औरतों की बदहाली, धार्मिक कट्टरपंथी हिंसा। जब कभी अफ्रीका में मानवीय संकट होता है- और लिबरल कम्‍युनिस्‍ट मानवीय संकटों से वाकई मोहब्‍बत करते हैं, जो उनके भीतर … पढ़ना जारी रखें लिबरल कम्‍युनिस्‍ट व्‍यावहारिक होते हैं

जीएसटी से भारतीय लेखकों को नुकसान

जी एस टी के चक्कर में मेरी कई किताबें फ्लिप्कार्ट पर आने से रह गई हैं । कुछ समय पहले बड़ी मुश्किल से प्रकाशक को समझा-बुझा कर किताबों को आन लाईन करवाया था । प्रकाशक ने आज बताया कि हो सकता है जो कुछ किताबें फ्लिप्कार्ट पर हैं , वह भी कुछ दिन में हट जाएं । इस लिए कि फ्लिप्कार्ट वाले सभी प्रकाशकों से … पढ़ना जारी रखें जीएसटी से भारतीय लेखकों को नुकसान

किसान आंदोलन और गांधी-टैगोर डिबेट

किसान आंदोलन चल रहा है। आंदोलन महाराष्ट्र से शुरू हुआ था और अब इसने मध्यप्रदेश को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है। आंदोलनकारियों की अनेक मांगें हैं, जिनमें कर्जमाफ़ी जैसी अनैतिक मांग भी शामिल है। आंदोलनकारी किसानों ने आपूर्ति तंत्र को अपहृत कर लिया है। दूध, फल और सब्ज़ियों के उत्पादन और वितरण के “मैकेनिज़्म” में ये किसान बीच की अहम कड़ी की भूमिका निभाते … पढ़ना जारी रखें किसान आंदोलन और गांधी-टैगोर डिबेट

मांसभक्षियों के कुतर्क : 3

“पेड़-पौधों में भी तो जीवन होता है।” ## यह मांसभक्षियों का सबसे प्रिय तर्क है। और मज़े की बात यह है कि मांसभक्षियों को यह भी नहीं पता कि यह एक “आत्मघाती” तर्क है, यानी यह तर्क स्वयं की ही काट करता है। ज़ाहिर है, मांसभक्षण से “प्रोटीन” मिले या ना मिले, “तर्कक्षमता” तो अवश्य ही नहीं मिलती है। वो इसलिए कि जब मांसभक्षियों से … पढ़ना जारी रखें मांसभक्षियों के कुतर्क : 3

मांसभक्षियों के कुतर्क : 2

_______________________________________________ [ मेरी मंशा है कि शृंखलाबद्ध रूप से मांसभक्षियों के कुतर्कों का एक-एक कर उच्छेदन किया जाए। उसी कड़ी में यह ] *** कुतर्क : “मनुष्य की हत्या की तुलना पशु की हत्या से नहीं की जा सकती, क्योंकि मनुष्य पशुओं से श्रेष्ठ है।” ## यह मांसभक्षियों का प्रिय तर्क है। आश्चर्य होता है कि इतने अनैतिक, जघन्य, अन्यायपूर्ण और लचर तर्क के आधार … पढ़ना जारी रखें मांसभक्षियों के कुतर्क : 2

मांसभक्षियों का तर्क

“सरकार यह कैसे तय करेगी कि हम क्या खाएं और क्या नहीं.” अत्यंत वीभत्स, धूर्ततापूर्ण तर्क! यह ठीक वैसे ही है, जैसे हत्यारों द्वारा यह कहना कि सरकार कैसे तय करेगी कि हम किसको मारें और किसको नहीं. या बलात्कारियों द्वारा यह कहना कि यह सरकार कैसे तय करेगी कि हम किसके साथ बलात् यौनाचार करें और किसके साथ नहीं! सर, बहुत पुराना समाचार यह … पढ़ना जारी रखें मांसभक्षियों का तर्क

इलाहाबाद के बारे में कुछ भी लिखना जैसे जलते हुए तवे पर उंगलियों से अपनी ही कहानी लिखना है

इलाहाबाद के बारे में कुछ भी लिखना जैसे जलते हुए तवे पर उंगलियों से अपनी ही कहानी लिखना है। दो हज़ार से लेकर चार हज़ार रुपये तक के सिंगल से कमरे में सैकड़ों ख्वाब, हज़ारों किताबें और अनगिनत तमाम हो चुके रजिस्टरों के जोड़-तोड़ में कैसे जिंदगी बीतती है, ये यहाँ रहने वाला ही बता सकता है। यहाँ जब घर से भेजे गए पैसे पर … पढ़ना जारी रखें इलाहाबाद के बारे में कुछ भी लिखना जैसे जलते हुए तवे पर उंगलियों से अपनी ही कहानी लिखना है

समझदारी आने पर यौवन सचमुच चला जाता है और पैसा और स्थायित्व आ जाने पर साहस – हिम्मत रूपी टायर की हवा निकल जाती है !

#चलकहींदूरनिकलजाएँ समझदारी आने पर यौवन सचमुच चला जाता है और पैसा और स्थायित्व आ जाने पर साहस – हिम्मत रूपी टायर की हवा निकल जाती है ! जैसे मायके से बुलावा आने पर तंग करने वाले ससुरालियों को छोड़कर नवेली बहू भागती है वैसे ही दो दिन की भी छुट्टियां आ जाने पर हम दिल्ली छोड़ पहाड़ों की ओर भाग खडे़ होते थे ! ना … पढ़ना जारी रखें समझदारी आने पर यौवन सचमुच चला जाता है और पैसा और स्थायित्व आ जाने पर साहस – हिम्मत रूपी टायर की हवा निकल जाती है !

कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा मानवाधिकार की राजनीति हो रही है

भारतीय सेना के अधिकारी मेजर गोगोई द्वारा कश्मीर में एक पत्थरबाज को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल के मुद्दे पर देश के कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा मानवाधिकार की जो राजनीति हो रही है, वह दुर्भाग्यपूर्ण और सेना का मनोबल तोड़ने की सुनियोजित साज़िश है। उपरी तौर पर सेना की यह कारवाई अमानवीय ज़रूर लगती है, लेकिन घटना की परिस्थितियों पर गौर किया जाय तो व्यापक हित में सेना का यह बेहद व्यवहारिक और मानवीय क़दम था। पढ़ना जारी रखें कुछ बुद्धिजीवियों द्वारा मानवाधिकार की राजनीति हो रही है

गैंगरेप का गैंग शर्माता क्यों नहीं, माहवारी में तो शर्म आज भी है !

उसका हल्का सा टॉप खिसक गया था, ब्रा की स्ट्रैप दिखाई देने लगी। कई लड़कों की निगाहें हवा से भी तेज रफ्तार के साथ उस काली स्ट्रिप को झांकने लगीं। निगाहें सिर्फ स्ट्रिप पर नहीं सीमित थीं। तभी शायद लड़की की मां ने देख लिया…इशारे में कहा जल्दी से संभालो। लड़के देख रहे हैं। स्ट्रिप संभालते हुए बस में चढ़ गई। अचानक से एक अधेड़ … पढ़ना जारी रखें गैंगरेप का गैंग शर्माता क्यों नहीं, माहवारी में तो शर्म आज भी है !

प्रश्न किसी एक कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के मध्य उत्पन्न तनाव का नहीं है।

प्रश्न किसी एक कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के मध्य उत्पन्न तनाव का नहीं है। प्रश्न इस विराट लोकतंत्र के वैभवशाली इतिहास में सन्निहित विचारवान मस्तिष्कों के सम्मान की परंपरा के खण्डित होने का है। साहित्य और अध्यात्म का यद्यपि शासन-प्रशासन से प्रत्यक्ष संबंध गोचर नहीं होता है किंतु आदियुग से राजदरबारों में ऋषि वशिष्ठ, कृपाचार्य, विष्णुगुप्त चाणक्य, बिनोवा भावे, अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना, ज़ौक़, कालिदास, रामप्रसाद … पढ़ना जारी रखें प्रश्न किसी एक कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के मध्य उत्पन्न तनाव का नहीं है।

सुंदर लड़कियों वाला शहर

बरसों बाद वह इस अपने पुराने शहर आया था। पुरानी यादों में डूबता उतराता। साथ में अपने एक ख़ास दोस्त को भी लाया था। लाया क्या था वह खुद नत्थी हो कर आ गया था। नत्थी हो कर आया था और अब नकेल बन कर सारे शहर को धांग लेना चाहता था। ऐसे जैसे वह कोई शहर न हो किसी औरत की देह हो और एक-एक पोर, एक-एक अंग, एक ही सांस में भोग लेना चाहता था। उस ने कहा भी कि, यह औरत नहीं शहर है ! वह शहर जो कभी उस का सपना था। इस सपने की शिफत में बड़ी शिद्दत और तफसील में वह उसे घुमाना चाहता था, उसी मन, उसी तड़पन के साथ जो कभी बीते बरसों में उस ने शेयर किया था। पढ़ना जारी रखें सुंदर लड़कियों वाला शहर

मेरी गैस की सब्सिडी बंद हो गई

मेरी गैस की सब्सिडी बंद हो गई। हमेशा की तरह हड़काने पर एजेंसी वाला नहीं हड़का, बल्कि इस बार उसने लिख कर और मुहर मार कर दे दिया कि बिना आधार के सब बेकार है। मेरा इकलौता निजी बैंक खाता बंद होने के कगार पर आ गया है। एक संभावनाशील संयुक्‍त खाते की केवाइसी के अभाव में भ्रूण हत्‍या हो गई है। दूसरे संयुक्‍त खाते … पढ़ना जारी रखें मेरी गैस की सब्सिडी बंद हो गई