पिछले 72 सालों से इस घर में रह रही है 97 साल की बुजुर्ग महिला! अंदर का नजारा होश उड़ा देगा!

पिछले 72 सालों से इस साधारण से घर में रह रही है 97 साल की बुजुर्ग महिला! लेकिन अंदर का नजारा होश उड़ा देगा!

72 साल से इस घर में रह रही है महिला, अंदर से देखकर नहीं होगा यकीन

72 साल से इस घर में रह रही है महिला, अंदर से देखकर नहीं होगा यकीन

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साभार पत्रिका न्यूज़

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भारत की मूल समस्या यह है कि यहां शासक और जनता के बीच कभी कोई तारतम्य नहीं रहा है

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डॉ. राममनोहर लोहिया ने कहा था कि भारत की मूल समस्या यह है कि यहां शासक और जनता के बीच कभी कोई तारतम्य नहीं रहा है. यह हिंदू शासकों के लिए भी उतना ही सही है, जितना कि मुस्ल‍िम शासकों के लिए. अतीत के लिए भी, आज के लिए भी.

ग़ौरी, गज़नवी, चंगीज़, तैमूर, दुर्रानी, अब्दाली जैसे मुस्ल‍िम आक्रांता लूटखसोट की फ़िराक़ में थे. हिंदुस्तान पर राज करने की उनकी नीयत ना थी.

ख़ास तौर पर 1739 में पहले नादिर शाह और फिर 1761 में अहमद शाह ने तो हिंदुस्तान की केंद्रीय सल्तनत को उसके घुटनों पर झुका दिया था.

अनेक इतिहासकारों को अचरज होता है कि नादिर शाह महज़ “तख़्तेताऊस” की लूट से ही ख़ुश था, जबकि चाहता तो हिंदुस्तान की बादशाहत उसके नाम होती!

चंगीज़ो तैमूर के वंशज बाबर ने अपने लश्कर का रुख़ हिंदुस्तान की ओर इसलिए मोड़ा था, क्योंकि समरकन्द को जीतने में वो लगातार नाकाम रहा था. लेकिन चंगीज़ो तैमूर के उलट उसने हिंदुस्तान में खूंटा गाड़ दिया, जैसे उससे पहले गाड़ा था मामलूक़ों, तुग़लकों, खिलजियों और लोदियों ने.

लेकिन अवाम?

इतिहासकार इस समूची परिघटना को “कॉन्क्वेस्ट” के तर्क के साथ याद रखते हैं और निहायत ग़ैरसहानुभूतिपूर्ण तरीक़े से अवाम के अंतर्तम पर बात करने से इनकार करते हैं.

जिसकी तलवार, उसका ज़ोर!
जिसकी लाठी, उसकी भैंस!

तब सदियों तक चले “हिंदू जेनोसाइड” की तो बात ही क्या करें, जब कश्मीर में पंडितों के जेनोसाइड को ही रद्द करने के लिए महाकविगण कमर कसे हों!

ये तमाम सिलसिला जैसे भुला देने लायक़ हो और “प्रतिशोध के काव्य-न्याय” का, “सामूहिक अवचेतन की तुष्टि” का यहाँ कोई महत्व ही ना हो, जिसे कि “सामाजिक न्याय” की व्यवस्था की धुरी माना गया!

हुक़ूमत और अवाम के रिश्तों को लेकर लोहिया की बात सही है और “ग्रेट मुग़ल्स” के राज में भी हिंदुस्तान में “ह्यूमन राइट्स इंडेक्स” बहुत ऊपर चला गया हो, वैसा नहीं था.

अकबर के राज में बहुत अमन था, कलाओं का बहुत विस्तार था, गंगा जमुनी का स्वर्णकाल था, ऐसा कहते हैं, लेकिन हिंदू बहुसंख्य समाज यवनों के राज में मनोवैज्ञानिक रूप से मुतमईन कैसे रह सकता था? हमारा इतिहास इस मनोवैज्ञानिक बेचैनी का अध्ययन करने के बजाय उस पर संगीन चुप्पी साध लेता है.

आज अगर अरब देशों पर कोई हिंदू या यहूदी राजा अधिकार कर ले और बेहतर सुशासन स्थापित कर दे, तो क्या वहां के मुसलमान इस पर राज़ी ख़ुशी से रहेंगे?

आज़ादी की लड़ाई में “गंगा जमुनी” का “पर्सपेक्टिव” बदल गया था और अब वे दोनों मिलकर एक “साझा दुश्मन” से लड़ रहे थे. तो क्या उस साझा दुश्मन का वजूद ही उस भाईचारे का परिप्रेक्ष्य था? और अगर, वह शत्रु परिदृश्य से हट जाए तो?

आज़ादी के समय हिंदू मुसलमान दोनों ही समान रूप से ग़रीब और पसमंदा इसलिए भी थे कि अधिकतर मुसलमान तो “कनवर्टेड” थे. वे वही थे, जो उनसे पहले हिंदू हुआ करते थे, और हुक़ूमत के मेवे उन तक नहीं पहुँचे थे.

आज अकसर भारतीय मुसलमान कहते हैं कि हम तो “कनवर्टेड” हैं, इसलिए हम तो इसी देश के मूल निवासी हैं. लेकिन यह बात 1947 में उनको याद क्यों नहीं आई थी, जब उन्होंने अपना अलग मुल्क मांगा था?

मुझे बार बार लगता है हिंदुस्तान का इतिहास एक नए “नॉन सेकुलर” और “मोर एनालायटिकल पर्सपेक्टिव” के साथ लिखे जाने की ज़रूरत है.

हमें एक भ्रामक इतिहास पढ़ाया जाता रहा है.

“अ पोलिटिकली मोटिवेटेड एंड अपोलोजेटिक रीडिंग ऑफ़ हिस्ट्री”. इसको दुरुस्त करना ज़रूरी है!

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सुशोभित सक्तावत

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फोटो में दिख रहा लड़का रांची का है…पढ़िए पूरा मामला

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फोटो में दिख रहा लड़का रांची का है। इलाहाबाद में एसएससी की तैयारी करता है। अपना खर्चा निकालने के लिए लक्ष्मी टाकीज के पास चिकन रोस्ट की दुकान लगाता है। दुकान की आमदनी से अपनी पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ घर वालों को भी पैसे भेजता है। घर वालों को इस बारे में कुछ नहीं पता है। पहली बार जब उसने पैसे बचाकर १५ हज़ार रुपए में ठेला लिया था तो वो दूसरे दिन ही चोरी हो गया था। पहले दिन की कमाई मात्र तीस रुपए थी। लेकिन लड़के ने हार नहीं मानी। उसने तय किया कि अब वो ये जरूर कर के रहेगा। कुछ महीने बाद उसने किराए के ठेले पर फिर से दुकान शुरू की। अब महीने में अच्छी खासी कमाई कर लेता है।

अनुभव पूछने पर बता रहा था कि शुरू में ये सब करने में शर्म आती थी। बाद में उसे यह एहसास हुआ कि मेहनत करना और आत्मनिर्भर होना शर्म की बात नहीं है।

उसके प्रेरणाश्रोत उसके गुरु है जिससे उसने यह काम सीखा है। वह दिल्ली में यही काम करते थे। आज वह सेंट्रल गवर्मेंट में अच्छी खासी नौकरी करते हैं। नौकरी के साथ पुराना काम भी देखते हैं। दिल्ली में उनकी तीन शटर की दुकान है जहां हर तरह के नानवेज आईटम मिलते हैं। दुकान से महीने में लगभग ५ लाख रुपए की कमाई होती है। कर्मचारियों की सैलरी देने के बाद ४ लाख बचते हैं। कर्मचारी के रूप में ऐसे लड़के रखे और प्रशिक्षित किए जाते हैं – जो जरूरतमंद और पढ़ने लिखने वाले होते हैं ।

यह देखकर अच्छा लगा कि भारत में इस तरह का बिजनेस और स्टडी कल्चर धीरे-धीरे डेवलप हो रहा है। यह यहां के युवाओं के लिए अच्छा संकेत है। अपनी पढ़ाई के लिए स्किल्ड और आत्मनिर्भर होना कोई बुरी बात नहीं है। कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। दुनिया में वही इंसान असल मायने में सफल है जो अपने पैरो पर खड़ा होकर आगे बढ़ता है। चरम बेरोजगारी के दौर में इस कल्चर को अपनाने और प्रोत्साहित किए जाने की सख्त जरूरत है ।

इनको और इनके गुरु को सलाम !

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प्रद्युम्न यादव

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बाढ़ से निपटना तो हमें सीखना ही होगा

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पूरब में असम, पश्चिम में गुजरात और दक्षिण में कर्नाटक तक बाढ़ का प्रकोप जारी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से वर्षा की कुल मात्रा पूर्ववत रहेगी पर बारिश के पैटर्न में बदलाव आएगा। गर्म हवा में पानी धारण करने की शक्ति अधिक होती है। गर्म बादल बरसते है तो ताबड़तोड़ ज्यादा पानी गिरता है, लेकिन फिर सूखा पड़ जाता है। जैसे 120 दिन के मॉनसून में तीन दिन भारी वर्षा हो और शेष 117 दिन सूखा रहे। वर्षा के पैटर्न में इस बदलाव का हमारी खेती पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

धान की फसल को लगातार 120 दिन पानी की जरूरत होती है। उतना ही पानी तीन दिन में बरस जाए तो फसल मारी जाएगी। वर्षा के पैटर्न में बदलाव का दूसरा प्रभाव बाढ़ पर पड़ेगा। पानी धीरे-धीरे बरसता है तो वह भूमिगत ऐक्वीफरों (भूजल भंडार) में समा जाता है जैसे वर्षा का आधा पानी ऐक्वीफर में रिस गया और आधा नालों-नदियों में बहा। ताबड़तोड़ बरसने पर वह ऐक्वीफरों में नहीं रिस पाता है। पूरा पानी नालों और नदियों की ओर बहने लगता है जिससे बाढ़ आ जाती है।

सरकारी रणनीति

इस कठिन परिस्थिति का सामना करने की सरकारी रणनीति यही है कि भाखड़ा और टिहरी जैसे नए बांध बनाए जाएं, जैसे कि लखवार व्यासी तथा पंचेश्वर में प्रस्तावित हैं। पहाड़ में होने वाली वर्षा के पानी को इन डैमों में जमा कर लिया जाए। वर्षा धीरे-धीरे हो या ताबड़तोड़, इससे डैम की भंडारण क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बाद में इस पानी का उपयोग खेती के लिए किया जा सकता है। साथ-साथ बाढ़ वाली नदियों के दोनों तटों पर तटबंध बना दिए जाएं जिससे नदी का पानी नहर की तरह अपने रास्ते चले और बाढ़ का रूप न ले। इस नीति का फेल होना तय है क्योंकि डैम में केवल पहाड़ी वर्षा का पानी रोका जा सकता है। मैदानों की ताबड़तोड़ वर्षा का पानी तो बह ही जाएगा। गंगा के कैचमेंट में पहाड़ी हिस्सा 239 हजार वर्ग किलोमीटर का है जबकि मैदानी हिस्सा इससे तीन गुना 852 हजार वर्ग किलोमीटर का है। मैदानी वर्षा के पानी का नुकसान तो होगा ही।

दूसरी समस्या है कि स्टोरेज डैमों की आयु सीमित होती है। टिहरी हाइड्रोपावर कार्पोरेशन द्वारा कराए गए दो अध्ययनों के अनुसार टिहरी झील 140 से 170 वर्षों में पूरी तरह गाद से भर जाएगी। तब इसमें पहाड़ी वर्षा के पानी का भंडारण नहीं हो सकेगा। नदी के दोनों तटों पर बनाए गए तटबंधों में भी गाद की समस्या है। नदी द्वारा तटबंधों के बीच गाद जमा कर दी जाती है। शीघ्र ही नदी का पाट ऊंचा हो जाता है। तब तटबंधों को और ऊंचा किया जाता है। कुछ समय बाद नदी अगल-बगल की जमीन से ऊपर बहने लगती है जैसे मेट्रो ट्रेन का ट्रैक जमीन से ऊपर चलता है। लेकिन तटबंधों को ऊंचा करते रहने की सीमा है। ये टूटेंगे जरूर और तब नदी का पानी झरने जैसा गिरता और फैलता है। बाढ़ और भयावह हो जाती है।

डैमों और तटबंधों से सिंचाई भी प्रभावित होती है। डैम में पानी रोक लेने से बाढ़ कम फैलती है। जब तक तटबंध टूटते नहीं, तब तक ये बाढ़ के पानी को फैलने नहीं देते हैं। बाढ़ के पानी न फैलने से भूमिगत ऐक्वीफरों में पानी नहीं रिसता है और बाद में यह सिंचाई के लिए नहीं उपलब्ध होता। चार-पांच बाढ़ झेल लेने के बाद तटबंधों के टूटने पर पानी का पुनर्भरण अवश्य होता है पर तब तक ऐक्वीफर सूख चुके होते हैं।

सिंचाई में जितनी वृद्धि डैम में पानी के भंडारण से होती है, उससे ज्यादा हानि पानी के कम पुनर्भरण से होती है। अंतिम परिणाम नकारात्मक होता है। लेकिन यह दुष्परिणाम वर्तमान में नहीं दिख रहा है, क्योंकि हम अतीत में संचित भूमिगत जल भंडारों से पानी का अति दोहन कर रहे हैं। जैसे दुकान घाटे में चल रही हो पर पुराने स्टॉक को बेच कर दुकानदार जश्न मना रहा हो, ऐसे ही हमारी सरकार बांध और तटबंध बनाकर जश्न मना रही है।

सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा अन्यथा हम सूखे और बाढ़ की दोहरी मार में डूब जाएंगे। मैदानों में ताबड़तोड़ बरसते पानी का उपयोग भूमिगत ऐक्वीफर के पुनर्भरण के लिए करना होगा। किसानों को प्रोत्साहन देकर खेतों के चारों तरफ ऊंची मेड़ बनानी होगी जिससे वर्षा का पानी खेत में टिके और भूमि में रिसे। साथ-साथ नालों में विशेष प्रकार के ‘रीचार्ज’ कुएं बनाने होंगे जिनसे पानी जमीन में डाला जाता है।

गांवों और शहरों के तालाबों को साफ करना होगा जिससे इनमें पानी इकट्टा हो और भूमि में रिसे। दूसरे, बड़े बांधों को हटाना होगा। इन बांधों की क्षमता सूई की नोक के बराबर है। जैसे टिहरी बांध मे 2.6 अरब घन मीटर पानी का भंडारण करने की क्षमता है। इसकी तुलना में उत्तर प्रदेश के भूमिगत ऐक्वीफरों की क्षमता 76 अरब घन मीटर, यानी लगभग 30 गुना है। टिहरी को हटा दें और बाढ़ को फैलने दें तो टिहरी से ज्यादा पानी भूमिगत ऐक्वीफरों में समा सकता है। यूं भी टिहरी जैसे बांधों की आयु सीमित है। तीसरे, नदियों के किनारे बनाए गए सभी तटबंधों को हटा देना चाहिए।

बदले रहन-सहन

बाढ़ लाना नदी का स्वभाव है। मनुष्य बाढ़ को आत्मसात करे। उसके साथ समायोजन विकसित करे। कुछ वर्ष पहले गोरखपुर में बाढ़ का अध्ययन करने का अवसर मिला था। लोगों ने बताया कि पहले बाढ़ का पानी फैल कर पतली चादर जैसा बहता था। गांव ऊंचे स्थानों पर बसाए जाते थे और सुरक्षित रहते थे। खेतों में धान की ऐसी प्रजातियां लगाई जाती थीं जो बाढ़ में भी अच्छी उपज देती थीं। हमें बाढ़ के साथ जीने की पुरानी कला को अंगीकार करना होगा अन्यथा हम भीषण बाढ़ में डूब जाएंगे और भीषण सूखे में भूखे मरेंगे।

लेखक: भरत झुनझुनवाला।।

डिसक्लेमर : ऊपर व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं

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वक़्त के साथ बदलते बाबाओं के अवतार

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आज एक बाबा ने कहर ढा रखा है। रेप के आरोप में दोषी पाए गए हैं और उनके भक्त दो राज्यों में आपातकाल जैसे हालात लाने पर उतारू हैं। 25 से ज़्यादा जानें जा चुकी हैं और जगह-जगह आगजनी की खबरें सामने आ रही हैं। हर कोई सोच रहा है कि बाबा में ऐसा क्या है जो लोग जान लेने-देने पर उतारू हैं। दरअसल यह बाबा बाकियों से अलग हैं, नाम है बाबा गुरमीत राम रहीम जी इंसां.. हर धर्म से कुछ न कुछ उधार ले लिया है और राम, रहीम से पहले इंसान होने का दावा करते हैं। यह कूल टाइप बाबा हैं, रॉकस्टार हैं और मल्टी-टैलंटेड भी। अब जब रेप के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं तो पंजाब और हरियाणा को जलने के लिए छोड़ दिया है।

समझना जरूरी है कि एक के बाद एक बाबा और उनके अलग-अलग अवतार आते कहां से हैं। दरअसल बाबाओं से पहले संत महात्मा और भगवान का कॉन्सेप्ट आया। भगवान की परिकल्पना ही इसलिए की गई थी जिससे लोगों का जब खुद पर भरोसा टूटने लगे तो किसी तीसरी शक्ति पर भरोसा करके काम पूरा करने की हिम्मत करें। पहले यह शक्ति तकलीफ के वक़्त याद की जाती थी, फिर इसका नाम लेकर डराया जाने लगा। बात तो तब बिगड़ी जब भगवान को धरती पर उतारने का दावा करके अलग-अलग तरह के सेंटर खोल दिए गए। यहां लोगों को तकलीफ के वक़्त खुशी मिलने उम्मीद में और तकलीफ न होने पर डराकर बुलाया जाने लगा।

अगला कदम भगवान के सेंटरों में काम करने वालों ने उठाया और भगवान से सीधा कनेक्शन होने का दावा करने लगे। जिन लोगों का अट्रैक्शन पहले भगवान और फिर उनके सेंटरों तक ही था, अब भगवान के दूतों से अट्रैक्ट होने लगे। ये दूत संत और बाबा बनकर लोगों की मदद करने लगे। कुछ सच में दूसरों की मदद करना चाहते थे और कुछ अपनी। रोज़ सैकड़ों लोग उनके सामने सिर झुकाने लगे और उन्हें लगने लगा कि वह खुद ही भगवान हैं। भक्तों को भी इस बात पर यकीन करने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगा।

पहले ऋषि, महात्मा और सन्यासी होते थे जो सब कुछ छोड़कर सत्य की तलाश में जंगल और पर्वतों पर निकल जाते थे। वह हमेशा सत्य और ईश्वर की तलाश में लगे रहे लेकिन उतना सुख-शांति न पा सके, जितना नए जमाने के बाबाओं को बिना जंगल गए ही मिल गया। जंगल जाने में कोई फायदा नहीं मिलता इसलिए अब बाबा जंगल और पर्वतों के बजाय लोगों के बीच में रहने लगे हैं। लोगों की डिमांड और अपनी जरूरतों के हिसाब से बाबा ने अपना नाम रखना, मेकअप करना और प्रसाद देना शुरू कर दिया है। अब नए अवतार हैं राधे मां, गोल्डन बाबा, निर्मल बाबा, बिजनस बाबा, फ्रॉड बाबा और राम रहीम सिंह इंसां…

यह बाबा भगवान की नहीं अपनी भक्ति करवाते हैं। ये बाबाओं के अपडेटेड और लेटेस्ट वर्जन हैं। मॉल में शॉपिंग करने वालों और फाइव स्टार होटल में रहने वालों को पेड़ के नीचे या फूस की झोपड़ी में बैठे बाबा रास नहीं आने इसलिए नए बाबा आसमान से उड़कर या लाइट्स से सजे रंगबिरंगे स्टेज से निकलकर आते हैं। प्रसाद बताशों का नहीं, चॉकलेट और पेस्ट्री का होता है। भक्तों की अपने भगवान से बात करने की चाह ये बाबा पूरी कर रहे हैं। भक्त अपने नए भगवान के साथ अठखेलियां कर सकते हैं, उनके हाथ से प्रसाद खा सकते हैं। चंद दान-दक्षिणा के बदले राधे मां अपने भक्तों की गोदी में बैठकर उन्हें दुलार सकती हैं, आई लव यू कह सकती हैं… कहां मिलेगा ऐसा भगवान! बाबा राम रहीम को ‘पापा जी’ कहने वाले उनके रॉक म्यूजिक पर ठुमके लगाते हैं और खुद को भगवान का रूप कहने वाले अपने पसंदीदा कैरक्टर के साथ सच्चा सुख उठाते हैं।

बाबा बदलते गए लेकिन भक्त नहीं बदले। भक्त कल भी अपने भगवान के खिलाफ कुछ नहीं सुन सकते थे, आज भी नहीं सुनेंगे। भक्त कल भी अपने भगवान के लिए जान लेने-देने की हिम्मत रखते थे, आज भी रखते हैं। चुनौती बहुत बड़ी है क्योंकि चुनौती है नए भगवान पैदा न होने देने की… जो बदलते माहौल में लगभग नामुमकिन हो चुका है। पुराने भगवान तस्वीरों और मूर्तियों में हैं जिन्हें अपडेट नहीं किया जा सकता और नए भगवान हर जगह तैयार हो रहे हैं… जिनसे सवाल नहीं किए जा सकते।

(उपरोक्त विचार लेखक के अपने हैं| इससे लिटरेचर इन इंडिया समूह का कोई सम्बन्ध नहीं है|)

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जियो फ़ोन में क्या-क्या है ख़ासियत? कैसे करे प्री-बुकिंग?

जियो Jio

प्री-बुकिंग की शुरुआत कब होगी?

२४ अगस्त, २०१७ से

कैसे करें बुकिंग?

माय जियो ऐप या जियो रिटेलर के जरिए

कितने में आएगा जियो फोन?

1,500 रुपये की सिक्योरिटी जमा करानी होगी जो 3 साल बाद वापस मिल जाएंगे। 3 साल बाद अगर आप फोन को रखना चाहते हैं तो रख सकते हैं। लेकिन अगर पैसे वापस लेने है तो आपको अपना जियो फोन कंपनी को लौटाना होगा|

तकनीकी विशेषताएं क्या-क्या हैं?

इसमें 2.4-इंच की क्यूजीवीए डिस्प्ले, सिंगल सिम सपोर्ट, माइक्रो एसडी कार्ड स्लॉट, टॉर्च लाइट, एफएम रेडियो, पैनिक बटन और 22 भाषाओं का सपोर्ट दिया गया है। रियर में 2 मेगापिक्सल कैमरा, फ्रंट में वीजीए कैमरा, 4 जीबी स्टोरेज और 512 एमबी रैम दिया जाएगा। फोन में आपको अल्फान्यूमेरिकल की-पैड मिलता है। इसके साथ ही माइक्रोफोन स्पीकर और 4-वे नेविगेशन दिया गया है। फोन को एक कॉम्पैक्ट डिजाइन दिया गया है। साथ ही फोन में एफएम रेडियो, टॉर्च, जैसे फीचर भी दिए गए हैं। फोन में सिर्फ जियो का सिम होगा। यानी दूसरी कंपनी का सिम इस फोन में यूज नहीं किया जा सकता है।

और क्या-क्या ऑफर है साथ में?

इस फोन के साथ 153 रुपये का ऑफर पेश किया गया है जिसके तहत ग्राहकों को एक महीने तक अनलिमिटेड डाटा, कॉलिंग और मैसेज मिलेंगे। प्रतिदिन हाईस्पीड डाटा यूज की सीमा 500 एमबी होगी। इसके बाद स्पीड 128 केबीपीएस हो जाएगी। इस 153 रुपये में जियो ऐप का एक्सेस भी मिलेगा। यह फाेन 21 भाषाओं को सपोर्ट करेगा। जियो का यह फोन अनलिमिटेड डाटा के इस्तेमाल की सुविधा देगा।

इसके अलावा कंपनी ने 24 रुपये का 2 दिन की वैधता वाला और 54 रुपये का 7 दिन की वैधता वाला प्लान भी लॉन्च किया है। इन दोनों प्लान में 153 रुपये वाले प्लान जैसी सुविधाएं मिलेंगी। वहीं इस फोन के यूजर्स 309 रुपये के धन धना धन प्लान के तहत जियो फोन टीवी-केबल एक्सेसरी का आनंद ले सकेंगे। इसके जरिए कोई भी यूजर्स किसी भी तरह के टीवी से कनेक्ट हो सकेगा।

कितने फोन होंगे उपलब्ध?

जियो के हर सप्ताह 50 लाख फोन सेल के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।

खास बातें-
इस फीचर फोन में कम्‍पैक्‍ट डिजाइन, 4वे नेवीगेशन, एसडी कार्ड स्‍लॉट जैसी कई सुविधाएं हैं. कुछ खास सहूलियतों पर एक नजर :

  • अल्‍फान्‍यूमेरिक की पैड
  • 4 वे नेविगेशन
  • कम्‍पैक्‍ट डिजाइन
  • 2.4″ QVGA डिस्‍प्‍ले
  • बैटरी एंड चार्जर
  • SD कार्ड स्‍लॉट
  • कैमरा
  • माइक्रोफोन और स्‍पीकर
  • हेडफोन जैक
  • कॉल हिस्‍ट्री
  • फोन कॉनटैक्‍ट
  • रिंगटोन
  • टॉर्च लाइट
  • एफ एम रेडियो

जीएसटी से भारतीय लेखकों को नुकसान

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जी एस टी के चक्कर में मेरी कई किताबें फ्लिप्कार्ट पर आने से रह गई हैं । कुछ समय पहले बड़ी मुश्किल से प्रकाशक को समझा-बुझा कर किताबों को आन लाईन करवाया था । प्रकाशक ने आज बताया कि हो सकता है जो कुछ किताबें फ्लिप्कार्ट पर हैं , वह भी कुछ दिन में हट जाएं । इस लिए कि फ्लिप्कार्ट वाले सभी प्रकाशकों से जी एस टी नंबर मांग रहे हैं । लेकिन किसी प्रकाशक के पास जी एस टी नंबर नहीं है । न कोई प्रकाशक जी एस टी नंबर लेना चाहता है । इस लिए भी कि किताबें जी एस टी के फ्रेम में कहीं हैं ही नहीं अभी तक । लेकिन फ्लिप्कार्ट की अपनी बाध्यताएं होंगी। जो हो नुकसान लेखकों-पाठकों का है ।

इस लिए कि सरकारी खरीद के गुलाम बन कर प्रकाशक पहले ही किताबों की दुकानों से कुट्टी कर चुके हैं । किताबें दुकान पर नहीं रखते । अब आन लाईन का तार भी कट जाएगा तो कौन किस किताब को कहां पाएगा और क्यों पढ़ेगा । वैसे भी प्रकाशकों की रूचि आन लाईन किताब बेचने में कभी नहीं रही । क्यों कि यह फुटकर खरीद है । और प्रकाशक फुटकर खरीद में नहीं बल्क परचेजिंग में दिलचस्पी रखते हैं । जहां मोटी रिश्वत दे कर , मोटी कमाई होती है । एक साथ हज़ारों किताबों का आर्डर मिलता है । जब कि फ्लिप्कार्ट पर तीस परसेंट छूट दे कर , फ्लिप्कार्ट को कमीशन दे कर कोरियर खर्च , पैकेजिंग आदि का खर्च भी उठाना पड़ता है । प्रकाशक कहता है कि हमारे पास फिर बचता क्या है । काहे बेचें एक-एक , दो-दो किताब फुटकर में हम।

यह हिंदी के प्रकाशक हैं । न लेखक को रायल्टी देते हैं , न किताब का प्रचार करते हैं , न समीक्षा के लिए कहीं किताब भेजते हैं , न किताब किसी दुकान में रखते हैं । और चाहते हैं कि अंगरेजी की तरह लाखों किताबें चुटकी बजाते ही बिक जाएं । अभी तो वह रिश्वत दे कर सरकारी खरीद में किताब बेच कर सरकारी लाइब्रेरियों में कैद करना जानते हैं । भाड़ में जाएं लेखक , भाड़ में जाएं पाठक । उन का क्या , उन की कमाई तो जारी है । लाखों , करोड़ों में । सभी सरकारें भी चाहती हैं कि कोई कुछ पढ़े नहीं । जब कोई कुछ पढ़ेगा तो सोचेगा । सोचेगा तो सिस्टम के खिलाफ सोचेगा । सो हर साल करोड़ो – अरबो रुपए की किताबें खरीद कर लाइब्रेरियों में सड़ा देते हैं । आप भी नकली सिनेमा देखिए , टी वी देखिए , चाहे फर्जी सीरियल हो , चाहे फर्जी न्यूज और डिस्कशन के नाम पर चीख चिल्लाहट या फिर अश्लील कामेडी शो , यह शो , वह शो आदि-इत्यादि । दिल-दिमाग भ्रष्ट कर , दरिद्र बन कर सो जाईए । सरकार और सिस्टम को यही रास आता है । आप को भी ।

दयानंद पाण्डेय

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(लेखक वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार हैं)

Police Man who stopped resident Pranab Mukherjee convey

वो पुलिस अफ़सर जिसने राष्ट्रपति का काफ़िला रोक दिया!

आमतौर पर यह देखा जाता है कि मंत्री के काफ़िले को लेकर अफ़सरों की भौंहे तनी रहती है तो फिर सोचिये एक राष्ट्रपति का काफ़िला अगर किसी पुलिस कर्मी ने रोक दिया तो कितने साहस की बात है| लेकिन इसके पीछे की वजह जान कर आप भी इस पुलिस अफ़सर को शाबाशी देंगे|

दरअसल मेट्रो के ग्रीन लाइन के उद्घाटन के लिए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी बेंगलुरु में मौजूद थे| उनका काफ़िला बेंगलुरु के ट्रिनिटी सर्किल के रास्ते जाने वाला था. चौकसी के लिए सब इंस्पेक्टर एम एल निजलिंगप्पा को तैनात किया गया था|

राष्ट्रपति का काफ़िला जैसे ही ट्रिनिटी पहुंचा निजलिंगप्पा की नज़र जाम में फंसे एक एम्बुलेंस पर पड़ी| फिर क्या था…उन्होंने राष्ट्रपति का काफ़िला रुकवा दिया और एम्बुलेंस को उस जाम से निकलवाया| भले ही महामहिम को इसकी जानकारी न हो लेकिन निजलिंगप्पा की इस सूझ-बूझ की हर जगह प्रशंसा हो रही है|

डीसीपी ट्रैफिक ने उन्हें इस सूझ-बुझ एवं मानवीय कार्य हेतु सम्मानित किये जाने की घोषणा की है| आईपीएस एसोसिएशन ने भी ट्विटर के माध्यम से उनकी प्रशंसा की है|

लिटरेचर इन इंडिया समूह ऐसे पुलिस अधिकारियों को सलाम करता है|

एक ट्वीट में ही हटवाया अवैध कब्ज़ा Allahabad Police Twitter Seva of UP Police

एक ट्वीट पर इलाहाबाद पुलिस ने हटवाया अवैध कब्ज़ा

एक ट्वीट में ही हटवाया अवैध कब्ज़ा Allahabad Police Twitter Seva of UP Police

इलाहाबाद के थाना-सरायममरेज के अंतर्गत देवा गाँव की मीरा देवी को उनके ही पड़ोसी आये दिन परेशान करते है और उनके साथ मारपीट की घटना को भी अंजाम दे चुके है|दरअसल मीरा देवी और उनके पुत्र के अनुसार उनका और उनके पड़ोसी का ज़मीन सम्बन्धी विवाद लम्बे समय से चला आ रहा है| उक्त सम्बन्ध में पीड़ितों ने कई बार मुकामी थाना एवं अधिकारियों से कार्यवाही हेतु अनुरोध किया लेकिन थाना सरायममरेज द्वारा उचित कार्यवाही नहीं की गयी और न ही अवैध कब्ज़े को हटवाया गया|

Allahabd Police Twitter Seva

कई बार थाने से संपर्क के बाद भी कार्यवाही नहीं हुई तो पीड़ितों ने उत्तरप्रदेश पुलिस की ट्विटर सेवा का सहारा लिया| ट्विटर द्वारा मामला उच्च अधिकारियों की जानकारी में आते ही एवं डीजीपी मुख्यालय के आदेश के बाद इलाहाबाद पुलिस हरकत में आ गयी|

बीजेपी उत्तरप्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी के एक ट्वीट के बाद ही मामले के जांच का आदेश सीओ हंडिया को सौंप दिया गया|

आज पीड़ित द्वारा अवगत कराया गया कि मामले में कार्यवाही करते हुए पुलिस ने आकर अवैध कब्ज़े को हटवा दिया है| लेकिन बेख़ौफ़ विपक्षियो ने पुलिस के जाते ही दुबारा ज़मीन पर कब्ज़ा जमा लिया| कुछ ही देर बाद सीओ हंडिया, एसओ के साथ घटनास्थल पर पहुँच गए और अवैध कब्ज़ा हटवाते हुए विपक्षियो को कड़ी फटकार लगायी|  साथ ही पीड़ित मीरा देवी को उचित कार्यवाही एवं न्याय का आश्वासन दिया|

बीफ़ पार्टी के जवाब में काऊ मिल्क अफ्तार पार्टी

beef party means in hindi

बैतूल (म.प्र): केरल में गौ हत्या और बीफ़ पार्टी के जवाब में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा गाय के पौष्टिक दूध का वितरण कोठी बाजार जामा मस्जिद के पास किया गया। केरल में की गई गाय की हत्या और बीफ़ पार्टी के विरोध में मिल्क पार्टी का आयोजन हुआ|

जिसमें मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक तथा म.प्र. सरकार में राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त एस. के.मुद्दीन ने जामा मस्जिद कोठी बाजार के पास रोजा अफ्तार के बाद गाय के शुद्ध दूध का वितरण करते हुए कहा कि गाय का दूध मुफ़ीद  (फायदेमंद) है। गाय का घी पौष्टिक है और गाय का मख्खन बलवर्धक है जबकि गाय का गोश्त बीमार करने वाला है। श्री मुद्दीन ने कहा कि गाय हमारे करोड़ों भाईयों की आस्था का केंद्र है। हमें भी उसका सम्मान करना चाहिए। हमारी पूजा-पद्धतियां एवं इबादत का तरीका अलग हो सकती है परंतु हमारी संस्कृति एक ही है।

इस अवसर पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच गौ रक्षा प्रकोष्ठ के प्रांत प्रभारी शारिक खान ने कहा कि हमारा देश आपसी सद्भाव और भाईचारे का देश है। गंगा जमुनी तहजीब का देश है। हमें एक दूसरे की आस्थाओं का ख्याल रखना होंगा।

एमआरएम के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य फारूक अहमद, अंजुमन कमेटी के अध्यक्ष वसीम पशु कुरैशी के साथ फरजात पटेल, साकिर अली, असलम काजी, जमाल भाई, जावेद खान सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।

बिहार में जंगलराज पार्ट 2: स्कूल मास्टर की बारह साल की बेटी ‘नैंसी’ के साथ जो हुआ, रूह काँप उठेगी।

मधुबनी। जिले के लौकही प्रखंड के अंधरामठ थाना क्षेत्र के महादेवमठ गांव निवासी कुमार रवींद्र झा की बारह वर्षीया पुत्री नैन्सी झा का शव शनिवार की रात महादेवमठ गांव स्थित तिलयुगा नदी से बरामद किया गया। शव मिलते ही महादेवमठ गांव के लोग निर्मली-कुनौली पथ को महादेवमठ के पास जाम कर डीएम व एसपी को स्वयं आ वार्ता करने की मांग के साथ हत्यारे की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग करने लगे। ग्रामीण शव के साथ सड़क जाम कर रहे थे। बाद में एसडीओ व डीएसपी के साथ वार्ता के बाद जाम हटा दिया गया।

मालूम हो कि नैन्सी का अपहरण गत 25 मई को कर लिया गया था। इस घटना पर नैंसी के पिता कुमार रवींद्र झा द्वारा 25 मई को ही अंधरामठ थाना में अज्ञात के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। नैन्सी के शव का पोस्टमार्टम के लिए शनिवार देर रात ही जिला मुख्यालय सदर अस्पताल भेज दिया गया। घटना को लेकर चौकसी के ख्याल से महादेवमठ सहित आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

लोगों ने बताया कि लाश देखकर साफ़ पता चल रहा था कि दरिंदो ने पहले कुकर्म किया, फिर गला काटा, फिर लाश को जला कर नदी में फेंक दिया।

इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। हालांकि अंधरामठ थाना पुलिस कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। थानाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि घटना का उछ्वेदन करने का पुलिस सार्थक प्रयास कर रही है। शीघ्र ही हत्यारे को पुलिस गिरफ्त में ले लिया जाएगा।

बिहार में जंगल राज: दुल्हन और परिवार की महिलाओं को थाने ले जाकर बेरहमी से पीटा

बिहार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी ने ‘न्याय के साथ विकास’ की बात कर के जनता का विश्वास तो जरूर जीता; परन्तु शासन में, व्यवहार में या विचार में न न्याय दिखता है और न ही विकास। आखिर क्या हो गया है उस छवि को, जिसके लिए आप जाने जाते थे? आम जनमानस ने सुशासन जैसे न्यायप्रिय शब्द से आपको सम्मानित किया। फिर क्यों…न्याय की तो बात ही मत करिए; अन्याय अपने उच्चतम स्तर को पार कर नए रिकॉर्ड बना रहा है।

पुलिस रक्षक होती है लेकिन भक्षक का काम कर रही है। अमानवीय व्यवहार कर पुलिस प्रशासन जनता से लगातार दूर जा रही है। याद रहे लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था मे सत्ता को जनसेवा का सर्वोत्तम साधन मान गया है।

पूर्व के राजशाही व्यवस्था मे पुण्यप्रतापी राजा अपने आप को प्रजापालक मान कर शासन करते थे। परंतु जब राजा ही क्रूर और भोगी (200 साल अंग्रेज/800 साल मुस्लिम आक्रांता) बन अत्याचार करने लगे तब उनके जनघाती प्रवृत्ति और जनता की वेदना कोख से लोकतंत्र का जन्म हुआ । पुलिस जनता के सहयोग के लिए होनी चाहिए परन्तु पुलिस नित्य दिन जनता पर अमानवीय प्रयोग कर आपके सुसाशन की छवि को पैरों तले रौंदने का काम कर रही है| ऐसे पुलिस अधिकारी और इनके सहयोगियों को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करना चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

जिस प्रकार से मुजफ्फरनगर में बिहार पुलिस ने पीड़ित लड़की सहित लड़की पक्ष के परिवार की महिलाओं और पुरुषों को बर्बरता पूर्वक मारा गया है यह संवैधानिक तो छोड़िए मानवीय मूल्यों को भी तार-तार करने वाला है।

पीड़ित लड़की के परिवार के लिए न्याय की व्यवस्था की जाए अन्यथा जागरूक ज़िम्मेदार जनता आंदोलन करने को मजबूर हो जाएगी|

अपने विचार जरूर प्रकट करें कि क्या शादी के दिन दुल्हन को उठा कर थाने में ले जाकर पुरुष पुलिस कर्मियों द्वारा रात भर पिटाई करना न्यायसंगत है? क्या यही सुशासन है? क्या यह जंगल राज नहीं है? आख़िर भारत के किस कानून और संविधान के द्वारा पुलिस कर्मियों को यह अधिकार दिया गया?

अभिषेक कुमार सिंह

‘एनडीए शासन में सैनिकों के साथ बर्बरता की 3 घटनाएं, सेना को पाक के ख़िलाफ़ मिले फ्री हैंड’

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नयी दिल्ली: पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने मंगलवार (2 मई) को कहा कि दो भारतीय सैनिकों के सिर काटे जाने के मामले में पाकिस्तान के खिलाफ सेना को खुले हाथ से समुचित कार्रवाई करने की अनुमति दी जानी चाहिए. पाकिस्तान से लगने वाली नियंत्रण रेखा की सुरक्षा के बारे में सवाल उठाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस घटना ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठा, सम्मान एवं मनोबल को प्रभावित किया है.

उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहते किन्तु उनके आठ वर्ष तक रक्षा मंत्री रहने के दौरान शव को क्षत विक्षत करने की महज एक घटना हुई किन्तु पिछले तीन साल में ऐसी तीन घटनाएं हुई. जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में पाकिस्तानी सेना का एक दल नियंत्रण रेखा को पारकर भारतीय क्षेत्र में 250 मीटर तक भीतर घुस आया और उसने सेना के जूनियर कमीशंड आफिसर नायब सूबेदार परमजीत सिंह एवं बीएसएफ के हेड कांस्टेबल प्रेम सागर की हत्या कर उनका शव क्षत विक्षत कर दिया.

एंटनी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पाकिस्तानी सेना की क्रूरता के बारे में मेरे पास कोई शब्द नहीं हैं. लिहाजा सरकार को सेना को खुला हाथ से कार्रवाई की अनुमति देना चाहिए ताकि वे अपनी तरह से निबट सकें.’’ उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर में लगातार हमलों से सीमा पर सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान लग गया है. मेरा मानना है कि इससे भारतीय सेना की प्रतिष्ठा, सम्मान एवं मनोबल प्रभावित हुआ है.’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सरकार से मेरा एकमात्र अनुरोध है कि उचित समय पर उचित कार्रवाई करने के लिए सेना को स्वतंत्रता दी जाए. मेरा संदेश है कि सेना को स्वतंत्रता दी जाए कि वह पाकिस्तान के अमानुषिक, बर्बर कृत्य के प्रतिक्रिया स्वरूप समुचित कर सके.’’

एजेंसी

क्या पार्टी को बॉय-बॉय कह देंगे विश्वास

Kumar Viswas Vs Amanatullah Khan

नई दिल्ली (जेएनएन)। नगर निगम चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद से दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान के पोलिटिकल अफेयर कमेटी से इस्तीफा देने के बाद भी मामला शांत नहीं हो रहा। अब पार्टी में अंतर्कलह और बढ़ने के आसार बनने लगे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुमार विश्वास ने बैठक में शामिल होने से ही इनकार कर दिया है।

कुछ देर बाद ही दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बयानों को लेकर कुमार विश्वास पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कु्मार विश्वास को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी में बुलाया गया, लेकिन अब वे टेलीविजन पर बयान दे रहे हैं। मनीष सिसोदिया ने कहा कि कुमार विश्वास ऐसा करके किसे फायदा पहुंचा रहे हैं? ये पार्टी के कार्यकर्ता समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं खुद कुमार विश्वास से मिलने गया था, साथ में संजय सिंह भी गए थे। अरविन्द केजरीवाल ने तीन तीन घंटे बात की है उनसे।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास ने अपने गाजियाबाद स्थित आवास पर पत्रकारों से रूबरू होने के दौरान नाराज दिखे। उन्होंने इशारों-इशारों में ओखला से विधायक अमानतुल्ला खान पर कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद थी कि अमानतुल्ला को पार्टी से निकाला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

अमानतुल्ला पर कार्रवाई न होने पर कुमार विश्वास ने कहा कि मुझे विधायक ने भाजपा और आरएसएस का एजेंट बताया था। ऐसा केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ बोला जाता, तो उसे तुरंत पार्टी से निकाल दिया जाता।

इस दौरान भावुक हुए विश्वास ने अमानतुल्लाह को मुखौटा तक बता दिया उन्होंने कहा कि कल उसने (अमानतुल्लाह) जब दोबारा बोला तो मुझे लगा कि यह मुखौटा है और इसके पीछे से कोई और बोल रहा है।

विश्वास ने कहा कहा कि 6-7 साल पहले उन्होंने, मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल तीनों ने मिलकर आंदोलन का सपना देखा था, लेकिन अब उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। विश्वास ने कहा कि पार्टी में कुछ भी गलत होगा तो वह उसके खिलाफ बोलते रहेंगे। उन्होंने कहा कि टिकट वितरण में गड़बड़ी, चुनावों में लगातार हार से कार्यकर्ता मायूस हैं और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री बनने की चाहत नहीं है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि वह किसी पार्टी में नहीं जाएंगे और आम आदमी पार्टी में बने रहेंगे।

उन्होंने कहा है कि पुराने पैंतरे अब नहीं चलेंगे। वहीं, सूत्रों की माने तो पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने इंडिया टुडे से बातचीत में दावा किया है कि कुमार विश्वास ने पार्टी के कुछ विधायकों से मुलाकात की थी और कहा था कि दिल्ली को अगले तीन दिनों में नया मुख्यमंत्री मिलेगा। वहीं, माना जा रहा है कि मंगलवार देर रात तक कुमार विश्वास कोई बड़ा एलान कर सकते हैं।

वहीं, पत्रकार वार्ता के दौरान कुमार विश्वास भावुक हो गए। पार्टी नहीं छोड़ने के एलान के साथ ही उन्होंने पिछले दिनों जारी किए गए वीडियो पर भी अपना बचाव किया। साथ ही कहा कि मैं किसी से माफी नहीं मांगूगा।

 कुमार विश्वास ने कहा कि कहा जा रहा है कि उनके एक वीडियो ‘वी द नेशन’ से लोग नाराज बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘वह कुमार विश्वास की आवाज नहीं देश की आवाज थी…और उसके लिए पार्टी, सरकार या कोई भी व्यवस्था नाराज हो तो मुझे परवाह नहीं।’ विश्वास ने कहा कि वीडियो के लिए वह माफी नहीं मांगेंगे।

कुमार विश्वास ने कहा कि अब उनकी छवि खराब करने की कोशिशें होंगी, लेकिन आंदोलन को खराब करने में लगे घुनों को वह कामयाब नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें न सीएम बनना है, डेप्युटी सीएम बनना है, न मंत्री बनना है, न किसी और पार्टी में जाना है। मसला देश का होगा तो वह बोलेंगे। उन्होंने कहा, ‘चेतावनी नहीं अनुरोध कर रहा हूं….कुछ ऐसा न कीजिए कि आपके लिए लड़ने वाला, अपनी नौकरी छोड़ने वाला कार्यकर्ता आहत हो।’

पार्टी के कुछ विधायकों ने इसकी जानकारी केजरीवाल के करीबी नेता को दी। इसके बाद पार्टी साफ तौर पर दो खेमों में बंटी नजर आ रही है।

गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी सोमवार को पार्टी विधायक अमानतुल्ला खान की ओर से कुमार विश्वास के खिलाफ बयान दिया गया था। इस पर मचे घमासान के बाद केजरीवाल ने पार्टी की पीएसी सदस्यता से खान का इस्तीफा मंजूर कर लिया था। अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए कुमार विश्वास पीएसी की बैठक में गैरमौजूद रहे।

वहीं, बैठक के दौरान दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पार्टी के सभी नेताओं और विधायकों को सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी ना करने की चेतावनी दी थी।

उधर, मंगलवार सुबह कुमार विश्वास के करीबी विधायकों ने घर जाकर विश्वास से मुलाकात की और अमानतुल्ला खान को पार्टी से भी निकलवाने की मांग की है।

दैनिक जागरण समाचार

खुलासा: अखिलेश सरकार में हाई कोर्ट आरओ भरती में हुआ बड़ा घोटाला, एसडीएम भर्ती के बाद सबसे बड़ी धांधली!

उच्च न्यायालय यानि हमारा हाई कोर्ट, जहाँ सब न्याय की आस लेकर जाते है…उसी न्यायालय की भर्ती में घोटाला करवा दिया गया और किसी को कानों-कान ख़बर तक नहीं लगी!

जी हाँ! एसडीम भर्ती में हुए घोटाले के बाद भी, पैसे ने सर चढ़कर प्रतिभागियों एवं मेधावियों की उम्मीदों पर चुना लगाया और यह सब होता रहा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाक़ के नीचे! सरकार में रहते हुए कार्यकाल के अंतिम समय में भी पूर्व मुख्यमंत्री जी और उनके अधिकारी ने अपने वोट बैंक की भूख में मेधावियों के भविष्य को रौंद डाला|

१: आरओ यानि की रिव्यु ऑफिसर की भर्ती का परिणाम घोषित होते ही अखिलेश सरकार के काले कारनामे से खुद-ब-खुद परत खुल गयी| आप साफ़ देख सकते हैं कि तीन सगे भाई, उनका रोल नंबर एक-दूसरे के बाद है और तीनों भाई चयनित कर लिए गये है| तीनों के पिता का नाम कैलाश नाथ यादव है और इनका अनुक्रमांक है: 121311135, 121311137, 121311138.

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२: फिर एक ऐसा ही कारनामा दो सगे भाइयों ने कर डाला है:

फैसल सिद्दकी पुत्र अंसार अहमद सिद्दकी (अनुक्रमांक: 121170402)

निज़ाम सिद्दकी पुत्र अंसार अहमद सिद्दकी (अनुक्रमांक: 121170403)

High Court RO dhaandhli

३: ये कारनामा यही नहीं रुका, इसी पंक्ति में श्याम लाल मिश्र जी के दोनों सगे बेटो सत्येन्द्र कुमार मिश्र (अनुक्रमांक: 121260500) एवं अदित्येंद्र कुमार मिश्र (अनुक्रमांक: 121260501) जी ने भी इस कड़ी में अपना सुनहरा नाम जुड़वा लिया है|

High Court RO Dhaandhli

इसी तरह कई ऐसे नाम है जो इस धांधली पर अपनी मुहर लगा रहे है और पुख्ता सबूत है!

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Scam High Court

Scam High Court

Scam High Court

Scam High Court

अगर आपको विश्वास न हो तो पूरा परिणाम इस लिंक पर देख सकते हैं: RO_Stage1_Result_22-2-2017

ज्ञात हो यह परीक्षा हाई कोर्ट द्वारा सम्पन्न करायी जाती है अतः इस धाँधली को जज, रजिस्ट्रार, सरकारी अधिकारियों, सरकारी प्रतिनिधियों के साथ-साथ बिचौलियों की मिलीभगत के बिना सम्भव कर पाना नामुमकिन है। 

ख़बरों की माने तो इस परीक्षा का पेपर लीक हुआ था और दस नक़लची पकड़े भी गये थे लेकिन उसके बाद भी इस भर्ती को रद्द करके दुबारा नहीं कराया गया। इसके विरोध में जब प्रतिभागी नैनी  पुल, इलाहाबाद के पास धरना देने गये तो जज साहब ने पुलिस भिजवाकर धरना न ख़त्म करने पर एफआईआर दर्ज करवा क़ानूनी कार्यवाही की धमकी दे डाली।

अब देखना ये है कि योगी आदित्यनाथ की मौजूदा सरकार इस धांधली एवं घोटाले पर क्या कार्यवाही करती है और मूकदर्शक बनी उत्तर प्रदेश पुलिस क्या एक्शन लेती है| सम्बंधित अधिकारियों और इस खेल के मास्टरमाइंड पर शिकंजा कस कर, क्या योगी सरकार प्रतिभागियों को न्याय दिला पायेगी? यह देखना दिलचस्प होगा|

यह उन सभी प्रतिभागियों के साथ धोखा है जो ग़रीबी से लड़कर, अपना सब कुछ दाँव पर लगाकर इस परीक्षा और ऐसे ही अन्य परीक्षाओं की तैयरियाँ कर रहे हैं। 

अगर आपके पास इस ख़बर से सम्बंधित और अधिक जानकारी या सुझाव है तो कृपया हमें अवश्य भेजे । हमारा पता: 

news@literatureinindia.com

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘मैं सौ फीसदी निर्दोष हूं, कांग्रेस सरकार ने षड्यंत्र के तहत फंसाया’

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नई दिल्ली: मालेगांव ब्लास्ट मामले की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जमानत पर रिहा होने के बाद गुरुवार को मीडिया के सामने आईं. साध्वी प्रज्ञा ने खुद को सौ फीसदी निर्दोष बताते हुए कहा, कांग्रेस सरकार ने षड्यंत्र के तहत उन्हें फंसाया. ‘भगवा आतंकवाद का पूरा स्क्रिप्ट देख लीजिए. इन्होंने कहानी बनाकर सिद्ध करने की कोशिश. लेकिन सिद्ध हो चुका है कि भगवा आतंकवाद नहीं होता. साथ ही उन्होंने कहा, निचली अदालत से सजा होना अपराधी होने का परिचायक नहीं है. साध्वी ने खराब सेहत के लिए एटीएस मुंबई की प्रताड़ना को जिम्मेदार बताया. जमानत के लिए हाई कोर्ट को धन्यवाद कहते हुए उन्होंने कहा कि अभी जो सरकार केंद्र में है वह षड्यंत्र नहीं करती और न्याय दिलाती है.

भगवा आतंकवाद शब्द प्रयोग के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम का नाम लेते हुए साध्वी प्रज्ञा ने कहा, ‘जो विधर्मी होते हैं उनके लिए तो भगवा बुरा ही है. यह तो निश्चित है कि भगवा आतंकवाद कांग्रेस का षड्यंत्र था. इसे साबित करने के लिए कहानी रची गई. एनआईए तो अभी भी वही है. कोई भी एजेंसी सीधी होती है. एजेंसी जांच करती है और जो भी परिणाम लाते हैं वे आपके सामने हैं.’ उन्होंने कहा, ‘यूपीए सरकार के षड्यंत्र रूपी काले सागर और अन्याय सहकर मैं 9 साल बाद जेल के बंधन से आधी मुक्त हुई हूं. अभी मेरा केस मुंबई हाई कोर्ट में चलेगा. मैं अभी मानसिक रूप से बंधन में रहूंगी. मैं कोर्ट को धन्यवाद करती हूं कि इतने वर्षों में सही, लेकिन न्याय के लिए सुना और मुझे इलाज का अवसर दिया.’ उन्होंने मीडिया को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि शुरू में तो उन्हें आतंकवादी तक कह दिया गया, लेकिन भगवा आतंकवाद शब्द मीडिया को पसंद नहीं आया.

मुंबई एटीएस पर आरोप लगाते हुए साध्वी ने कहा कि उन्हें गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तार कर सूरत से मुंबई ले जाया गया और 13 दिनों तक प्रताड़ना दी गई. कैंसर से पीड़ित प्रज्ञा ठाकुर ने कहा, ‘मैं उस समय पूरी तरह फिट थी, लेकिन आज पराश्रित हूं. इसके लिए एटीएस मुंबई की प्रताड़ना जिम्मेदार है. एटीएस की प्रताड़ना से मेरे फेफड़े की झिल्ली फट गई. मुझे मानसिक और शारिरिक रूप से प्रताड़ित किया गया. लेकिन आत्मिक रूप से मैं नहीं टूटी. मुझे जितना प्रताड़ित किया गया उतना तो परतंत्र भारत में भी किसी महिला को प्रताड़ित नहीं किया गया होगा.’ उन्होंने इसके लिए तत्कालीन एटीएस प्रमुख और मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे का भी नाम लिया. गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी और तकरीबन 80 लोग जख्मी हो गए थे. इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित को 2008 में ही गिरफ्तार किया गया था.

ज़ी न्यूज़ डेस्क

खुशखबरी: गृह मंत्रालय ने जल्लीकट्टू पर अध्यादेश को दिखाई हरी झंडी

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सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ हजारों लोग तमिलनाडु की  सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने लगे थे|

jallikattu-rajnikantरजनीकांत, कमल हसन, विजय सरीखे सुपरस्टार भी लोगों के इस आन्दोलन में शामिल हो गये थे| स्थिति भांपते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री दिल्ली रवाना हो गये थे| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपनी मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमन्त्री से मामले में दखल देकर अध्यादेश लाने की मांग की थी|

इसी क्रम में आज गृह मंत्रालय से हरी झंडी दिखाए जाने के बाद लोगों में उत्साह साफ़ देखा जा सकता है|

Samajwadi Party Supports Terrorism.

समाजवादी पार्टी हमेशा आतंकवादियों का समर्थन करती है – शिवपाल सिंह यादव

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उत्तर प्रदेश के मुख्य राजनीतिक परिवार से सम्बन्ध रखने वाले, मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई और यूपी के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने दावा किया है कि जो लोग आतंकवादी है, गलत काम और जो देशद्रोह का काम करते  है, उसके पक्ष में हमेशा समाजवादी पार्टी है| आरएसएस और भाजपा के लोग षड्यंत्र करते है|

आप खुद इस विडियो में इस महान नेता के व्यक्तव्य सुन सकते है|

Shivpal Yadav from Literature in India on Vimeo.

Jharkhand Girl Tied with rope by police

आखिर किस हद तक गिर चुकी है पुलिस?

Jharkhand Girl Misbehaved by Police - Literature in India

अपर्णा की कमर में रस्सी बाँध कर रेलवे स्टेशन पहुंचे पुलिसकर्मी

हाल ही में झारखण्ड पुलिस का एक बेहद ही शर्मनाक चेहरा सामने आया है| घटना राजस्थान के अलवर जिले से है जहाँ झारखण्ड पुलिस, एक महिला द्वारा दहेज़ उत्पीड़न के एक मामले में सास, ससुर और महिला के पति को गिरफ्तार करने पहुंची थी| पुलिस जब बैंक कॉलोनी पहुंची तो नामजद सास, ससुर और पति फ़रार थे| घर पर अपर्णा से पहले तो पूछताछ की गयी फिर उसकी कमर को रस्सी में बांधकर घसीटते हुए रेलवे स्टेशन तक लाया गया, हद तो तब हो गयी जब ये बेहया पुलिस टीम क़ानून को ही ताख पर रख कर अपर्णा को रस्सी में बंधे हुए ही ट्रेन में बैठाकर झारखण्ड रवाना हो गयी|

ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेशानुसार किसी महिला को हथकड़ी नहीं लगायी जा सकती परन्तु यहाँ पुलिस ने उस लड़की की इज्ज़त को बीच सड़क सैकड़ो लोगों के सामने तार-तार कर दिया| पुलिस द्वारा यह कृत्य रेप जैसे जघन्य अपराध की श्रेणी में दर्ज किया जा सकता है पर वही बात ‘जब सैयां थानेदार तो…”…मुकदमा दर्ज करे तो कौन करे?

Besharam Police

मीडिया को धौंस दिखाते परमवीर पुलिस के जवान

शायद अपर्णा को भारतीय क़ानून पर विश्वास था और उसे पता था कि उसके साथ जो हो रहा है वो गलत है, इसीलिए वो मीडिया के कैमरे के सामने भी चुप थी|

बेशरम पुलिस

अपर्णा के कमर में रस्सी बाँध कर ले जाती हुई बहादुर जवान

अब सवाल यह है कि भले ही इन पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया हो लेकिन अपर्णा को बिना अपराध इस तरह बेईज्ज़त करना कहाँ तक जायज़ है? आज नहीं तो कल इस मामले के शांत होते ही इन पुलिस कर्मियों की बहाली हो जाएगी पर जो लांछन और दाग अपर्णा की इज्ज़त पर बीच बाज़ार लगाया गया, उसका हिसाब कौन देगा?

Jharkhand Girl Tied with rope by police

गुमसुम सी बैठी अपर्णा और बेहयाई से चाय की चुस्कियां लेते वीर जवान

अपराधियों के सामने नतमस्तक और उन्हें खुला छोड़ कर ले जाने वाली पुलिस ने इस मामले में कैसा काम किया, आप खुद ही तय करे|

इनपुट

लिटरेचर इन इंडिया न्यूज़ डेस्क