है नमन उनको, कि जो यश-काय को अमरत्व देकर – कुमार विश्वास

है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं  है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय  जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं  पिता जिनके रक्त ने उज्जवल किया कुलवंश माथा  मां वही जो दूध से इस देश की रज तौल आई  बहन जिसने सावनों में हर लिया पतझर स्वयं ही  … पढ़ना जारी रखें है नमन उनको, कि जो यश-काय को अमरत्व देकर – कुमार विश्वास

जब हमीरपुर के डीएम ने दी थी मुंशी प्रेमचंद को धमकी

हिंदी साहित्य में प्रेमचंद का कद काफी ऊंचा है और उनका लेखन कार्य एक ऐसी विरासत है, जिसके बिना हिंदी के विकास को अधूरा ही माना जाएगा। मुंशी प्रेमचंद एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता और बहुत ही सुलझे हुए संपादक थे। प्रेमचंद ने हिंदी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया, जिसने एक पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन किया। उनकी लेखनी इतनी समृद्ध थी … पढ़ना जारी रखें जब हमीरपुर के डीएम ने दी थी मुंशी प्रेमचंद को धमकी

Kedarnath Singh

केदारनाथ सिंह के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति

केदारनाथ सिंह (७ जुलाई १९३४ – १९ मार्च २०१८), हिन्दी के सुप्रसिद्ध कवि व साहित्यकार थे। वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि रहे। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष २०१३ का ४९वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के १०वें लेखक थे। केदारनाथ सिंह का जन्म ७ जुलाई १९३४ ई॰ को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया … पढ़ना जारी रखें केदारनाथ सिंह के जन्मदिवस पर विशेष प्रस्तुति

देह की अनन्त यात्रा

ये जो काले रंग का कुर्ता है उसे कभी फेंकती नहीं मैं न तो किसी को देती हूँ। ये भी एक माध्यम है मेरी देह की अनन्त यात्रा को मापने के लिए। जो कभी शंकु हुआ करता था ये कुर्ता सी समय से आधार है, तय करने को मेरी देह रचना जो अब शंकु से दीर्घाकार हो चली है। देह अपनी रचना बदलती है। मन … पढ़ना जारी रखें देह की अनन्त यात्रा

लालगंज प्रत्याशी नीलम सोनकर के समर्थन में योगी आदित्यनाथ ने माँगे वोट

लालगंज भाजपा प्रत्याशी नीलम सोनकर के समर्थन में योगी आदित्यनाथ की जनसभा। सीएम ने दावा कि इस बार अमेठी और आजमगढ़ में भी होगी बीजेपी की जीत। चुनाव आयोग के नोटिस पर योगी ने कहा, ‘मैं प्रचार नहीं कर रहा होता हूं तब भी मंदिर जाता हूं’| 5 चरणों के चुनाव के बाद 53 में 47 से 50 सीटें जीतने का दावा योगी आदित्यनाथ ने … पढ़ना जारी रखें लालगंज प्रत्याशी नीलम सोनकर के समर्थन में योगी आदित्यनाथ ने माँगे वोट

Vikramovarshiyam_kalidas| Apsara| Urvashi

कालिदास के संस्कृत नाटक विक्रमोर्वशीयम् का हिन्दी कथा रूपांतर।

एक बार देवलोक की परम सुंदरी अप्सरा उर्वशी अपनी सखियों के साथ कुबेर के भवन से लौट रही थी। मार्ग में केशी दैत्य ने उन्हें देख लिया और तब उसे उसकी सखी चित्रलेखा सहित वह बीच रास्ते से ही पकड़ कर ले गया। पढ़ना जारी रखें कालिदास के संस्कृत नाटक विक्रमोर्वशीयम् का हिन्दी कथा रूपांतर।

आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे, फूल और झाडियाँ सारे क्षेत्र में फैली हुयीं थीं। इसइलाके के वासियों को अपने जीवन की आवश्यकताएँ जुटाने के लिये किसी और इलाके पर आश्रित नहीं होना पडता था।खेतों से अनाज, पेसों से मकान बनाने और जलाने केलिये लकडियाँ, भट्टों से … पढ़ना जारी रखें आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

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आत्मा शब्द मुक्तबोध की कविता का बीज

गजानन माधव मुक्तिबोध का 1964 में निधन हुआ और उसी वर्ष उनका पहला कविता संग्रह ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ प्रकाशित हुआ जिसे वो अपनी आँखों देख नहीं पाए.   इन पचास वर्षों में हिन्दी कविता पर जिस एक महत्तर कवि का सर्वाधिक सृजनात्मक प्रभाव महसूस किया गया है, जो आगे की कवि पीढ़ी की धमनियों में बहता है वह निस्संदेह मुक्तिबोध हैं.   आधुनिक … पढ़ना जारी रखें आत्मा शब्द मुक्तबोध की कविता का बीज

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करवाचौथ विशेष : शिकायत चाँद से

कहाँ गया है चाँद हमारा आज प्रिये की पूजा है । कब तक ऐसे छुपा रहेगा बिना तेरे न दूजा है । भूख प्यास से व्याकुल है वो कुछ तो उसका ख्याल करो । जल्दी से आ जाओ प्यारे उसको न बेहाल करो । मांग भरे वो कब से बैठी बस तेरा इंतजार करे । क्यों इतना तरसाता इनको तुझको इतना प्यार करे । थाल … पढ़ना जारी रखें करवाचौथ विशेष : शिकायत चाँद से

कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्‍या। पूर्व और अपार समुद्र – महोदधि और रत्‍नाकर – दोनों को दोनों भुजाओं से थाहता हुआ हिमालय ‘पृथ्‍वी का मानदंड’ कहा जाय तो गलत क्‍यों है? कालिदास ने ऐसा ही कहा था। इसी के पाद-देश में यह जो श्रृंखला दूर तक लोटी हुई है, लोग इसे ‘शिवालिक’ श्रृंखला कहते हैं। ‘शिवालिक’ का … पढ़ना जारी रखें कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Andhkaar se joojhna hai_hajari prasad dwivedi_literature in india

अंधकार से जूझना है – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

दीवाली याद दिला जाती है उस ज्ञानलोक के अभिनव अंकुर की, जिसने मनुष्‍य की कातर प्रार्थना को दृढ़ संकल्‍प का रूप दिया था – अंधकार से जूझना है, विघ्न-बाधाओं की उपेक्षा करके, संकटों का सामना करके। पढ़ना जारी रखें अंधकार से जूझना है – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Hindi Sahitya ka aadhunik kaal - Literature in India

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल तत्कालीन राजनैतिक गतिविधियों से प्रभावित हुआ। इसको हिंदी साहित्य का सर्वश्रेष्ठ युग माना जा सकता है, जिसमें पद्य के साथ-साथ गद्य, समालोचना, कहानी, नाटक व पत्रकारिता का भी विकास हुआ।   सं 1800 वि. के उपरांत भारत में अनेक यूरोपीय जातियां व्यापार के लिए आईं। उनके संपर्क से यहां पाश्चात्य सभ्यता का प्रभाव पड़ना प्रारंभ हुआ। विदेशियों ने यहां के देशी … पढ़ना जारी रखें हिंदी साहित्य का आधुनिक काल

Khilaune wala_Subhadra Kumari Chauhan_Literature in India

खिलौनेवाला – सुभद्रा कुमारी चौहान

वह देखो माँ आज खिलौनेवाला फिर से आया है। कई तरह के सुंदर-सुंदर नए खिलौने लाया है। हरा-हरा तोता पिंजड़े में गेंद एक पैसे वाली छोटी सी मोटर गाड़ी है सर-सर-सर चलने वाली। सीटी भी है कई तरह की कई तरह के सुंदर खेल चाभी भर देने से भक-भक करती चलने वाली रेल। गुड़िया भी है बहुत भली-सी पहने कानों में बाली छोटा-सा \\\’टी सेट\\\’ … पढ़ना जारी रखें खिलौनेवाला – सुभद्रा कुमारी चौहान

भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता और उसके आधार-तत्व

भारत की प्रत्येक भाषा के साहित्य का अपना स्वतंत्र और प्रखर वैशिष्ट्य है जो अपने प्रदेश के व्यक्तित्व से मुद्रांकित है। पंजाबी और सिंधी, इधर हिन्दी और उर्दू की प्रदेश-सीमाएँ कितनी मिली हुई हैं ! किंतु उनके अपने-अपने साहित्य का वैशिष्ट्य कितना प्रखर है ! इसी प्रकार गुजराती और मराठी का जन-जीवन परस्पर ओतप्रोत है, किंतु क्या उनके बीच में किसी प्रकार की भ्रांति संभव … पढ़ना जारी रखें भारतीय साहित्य की मूलभूत एकता और उसके आधार-तत्व

Hindi dialects - literature in india dot com

हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य

हिन्दी की अनेक बोलियाँ (उपभाषाएँ) हैं, जिनमें अवधी, ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली, बघेली, भोजपुरी, हरयाणवी, राजस्थानी, छत्तीसगढ़ी, मालवी, झारखंडी, कुमाउँनी, मगही आदि प्रमुख हैं। इनमें से कुछ में अत्यंत उच्च श्रेणी के साहित्य की रचना हुई है। ऐसी बोलियों में ब्रजभाषा और अवधी प्रमुख हैं। यह बोलियाँ हिन्दी की विविधता हैं और उसकी शक्ति भी। वे हिन्दी की जड़ों को गहरा बनाती हैं। हिन्दी की बोलियाँ और उन बोलियों की उपबोलियाँ हैं जो न केवल अपने में एक बड़ी परंपरा, इतिहास, सभ्यता को समेटे हुए हैं वरन स्वतंत्रता संग्राम, जनसंघर्ष, वर्तमान के बाजारवाद … पढ़ना जारी रखें हिंदी की विभिन्न बोलियाँ और उनका साहित्य

मीमांसा दर्शन का स्वरूप

मीमांसा दर्शन सोलह अध्यायों का है, जिसमें बारह अध्याय क्रमबद्ध हैं। शास्त्रसंगति, अध्यायसंगति, पादसंगति और अधिकारसंगतियों से सुसंबद्ध है। इन बारह अध्यायों में जो छूट गया है, उसका निरूपण शेष चार अध्यायों में किया गया है जो ‘संकर्षकांड’ के नाम से प्रसिद्ध है। उसमें देवता के अधिकार का विवेचन किया गया है। अत: उसे ‘देवता कांड’ भी कहते हैं अथवा द्वादश अध्यायों का परिशिष्ट भी … पढ़ना जारी रखें मीमांसा दर्शन का स्वरूप

मीमांसा दर्शन क्या है?

मीमांसा दर्शन हिन्दुओं के छः दर्शनों में से एक है। पक्ष-प्रतिपक्ष को लेकर वेदवाक्यों के निर्णीत अर्थ के विचार का नाम मीमांसा है। उक्त विचार पूर्व आर्य परंपरा से चला आया है। किंतु आज से प्राय: सवा पाँच हजार वर्ष पूर्व सामवेद के आचार्य कृष्ण द्वैपायन के शिष्य ने उसे सूत्रबद्ध किया। सूत्रों में पूर् पक्ष और सिद्धान्त के रूप में बादरायण, बादरि, आत्रेय, आश्मरथ्य, … पढ़ना जारी रखें मीमांसा दर्शन क्या है?

जैन धर्म में आगम

आगम शब्द का प्रयोग जैन धर्म के मूल ग्रंथों के लिए किया जाता है। केवल ज्ञान, मनपर्यव ज्ञानी, अवधि ज्ञानी, चतुर्दशपूर्व के धारक तथा दशपूर्व के धारक मुनियों को आगम कहा जाता है। कहीं कहीं नवपूर्व के धारक को भी आगम माना गया है। उपचार से इनके वचनों को भी आगम कहा गया है। जब तक आगम बिहारी मुनि विद्यमान थे, तब तक इनका इतना … पढ़ना जारी रखें जैन धर्म में आगम

Rakshabandhan_The_colors_of_the_literature_in_India_जीवन चंद्र परगाॅई सितारगंज (उधम सिंह नगर)

आज राखी के महापर्व-त्यौहार

है दिन आज राखी के महापर्व-त्यौहार का । यह पर्व नहीं महाउत्सव है भाई-बहन के प्यार का ।। तुम आज ना मांगो मुझसे कोई रक्षा का वचन । तुम्हारी हर खुशी के लिए समर्पित है मेरा तन मन ।। लेकिन तुम कोई अबला नारी नहीं इस युग में । तुमसे ही तो क्रांति के दीप जले हर इक युग में ।। जो आज मैं तुमको … पढ़ना जारी रखें आज राखी के महापर्व-त्यौहार

उठो प्रतिभावान स्वर उठो

सुलग रहे अदम्य मन का ज्वाला है घुल रहे असंख्य प्रवीणता का हवाला है बिना घिसे चमक क्या आई है चमकहीन  सभ्यता हमने लाई है प्रेरणा नहीं उनमें, मैं प्रतिशतता भरते जाऊ बिना जले बाती में, मै प्रकाश कहाँ से लाऊ विरले बिना स्वृण के, चमके होगें संकेतन दीप जगत में, जहाँ दमके होगें भूले सार तन खंगाल उठो विकट संकट सवाल उठो सममूल्यता उर … पढ़ना जारी रखें उठो प्रतिभावान स्वर उठो