आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे, फूल और झाडियाँ सारे क्षेत्र में फैली हुयीं थीं। इसइलाके के वासियों को अपने जीवन की आवश्यकताएँ जुटाने के लिये किसी और इलाके पर आश्रित नहीं होना पडता था।खेतों से अनाज, पेसों से मकान बनाने और जलाने केलिये लकडियाँ, भट्टों से … पढ़ना जारी रखें आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

पुर्जा – ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग

अनुवाद – विजय शर्मा सामान की आखिरी खेप जा चुकी थी। किराएदार, क्रेपबैंड हैटवाला जवान आदमी, खाली कमरों में अंतिम बार पक्का करने के लिए घूमता है कि कहीं पीछे कुछ छूट तो नहीं गया। कुछ नहीं भूला, कुछ भी नहीं। वह बाहर सामने हॉल में गया। पक्का निश्चय करते हुए कि इन कमरों में जो कुछ भी उसके साथ हुआ वह उसे कभी याद नहीं … पढ़ना जारी रखें पुर्जा – ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग

धनिया की साड़ी – ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग

लड़ाई का ज़माना था, माघ की एक साँझ। ठेलिया की बल्लियों के अगले सिरों को जोडऩे वाली रस्सी से कमर लगाये रमुआ काली सडक़ पर खाली ठेलिया को खडख़ड़ाता बढ़ा जा रहा था। उसका अधनंगा शरीर ठण्डक में भी पसीने से तर था। अभी-अभी एक बाबू का सामान पहुँचाकर वह डेरे को वापस जा रहा था। सामान बहुत ज़्यादा था। उसके लिए अकेले खींचना मुश्किल … पढ़ना जारी रखें धनिया की साड़ी – ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग

ठंड से जमा प्रदेश – इओसिफ ब्रोद्स्‍की

अनुवाद – वरयाम सिंह (ये. पे . के लिए) ठंड से जम गया है यह समृद्ध प्रदेश। प्रतिबिंब के दूध में छिप गया है शहर। घंटियाँ बजने लगी हैं। लैंपशेड सहित एक कमरा। हुल्‍लड़ मचा रहे हैं देवदूत ठीक जैसे रसोई से निकलते बेयरे। मैं तुम्‍हें यह पृथ्‍वी के दूसरे छोर से लिख रहा हूँ ईसा मसीह के जन्‍मदिवस पर। बाहर बर्फ का ढेर निष्‍ठापूर्वक … पढ़ना जारी रखें ठंड से जमा प्रदेश – इओसिफ ब्रोद्स्‍की

तलविंदर सिंह की पंजाबी कहानी ‘फासला’ हिंदी अनुवाद : सुभाष नीरव

वह मेरे सामने बैठी थी- शॉल लपेटे, गुमसुम-सी, चुपचाप। या शायद मुझे ही ऐसा लग रहा था। उसका नाम मुझे याद नहीं आ रहा था और यही बात मेरे अन्दर एक तल्खी पैदा कर रही थी। उसकी बगल में दाहिनी ओर सोफे पर गुरुद्वारे के तीन नुमांइदे आये बैठे थे। उनके साथ भी दुआ-सलाम से अधिक कोई बात नहीं हुई थी। थोड़ा-सा संकोच मुझे खुद … पढ़ना जारी रखें तलविंदर सिंह की पंजाबी कहानी ‘फासला’ हिंदी अनुवाद : सुभाष नीरव