देह की अनन्त यात्रा

ये जो काले रंग का कुर्ता है उसे कभी फेंकती नहीं मैं न तो किसी को देती हूँ। ये भी एक माध्यम है मेरी देह की अनन्त यात्रा को मापने के लिए। जो कभी शंकु हुआ करता था ये कुर्ता सी समय से आधार है, तय करने को मेरी देह रचना जो अब शंकु से … पढ़ना जारी रखें देह की अनन्त यात्रा

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करवाचौथ विशेष : शिकायत चाँद से

karwa chauth kaise karen_literature in india

कहाँ गया है चाँद हमारा आज प्रिये की पूजा है । कब तक ऐसे छुपा रहेगा बिना तेरे न दूजा है । भूख प्यास से व्याकुल है वो कुछ तो उसका ख्याल करो । जल्दी से आ जाओ प्यारे उसको न बेहाल करो । मांग भरे वो कब से बैठी बस तेरा इंतजार करे । … पढ़ना जारी रखें करवाचौथ विशेष : शिकायत चाँद से

खिलौनेवाला – सुभद्रा कुमारी चौहान

Khilaune wala_Subhadra Kumari Chauhan_Literature in India

वह देखो माँ आज खिलौनेवाला फिर से आया है। कई तरह के सुंदर-सुंदर नए खिलौने लाया है। हरा-हरा तोता पिंजड़े में गेंद एक पैसे वाली छोटी सी मोटर गाड़ी है सर-सर-सर चलने वाली। सीटी भी है कई तरह की कई तरह के सुंदर खेल चाभी भर देने से भक-भक करती चलने वाली रेल। गुड़िया भी … पढ़ना जारी रखें खिलौनेवाला – सुभद्रा कुमारी चौहान

आज राखी के महापर्व-त्यौहार

Rakshabandhan_The_colors_of_the_literature_in_India_जीवन चंद्र परगाॅई सितारगंज (उधम सिंह नगर)

है दिन आज राखी के महापर्व-त्यौहार का । यह पर्व नहीं महाउत्सव है भाई-बहन के प्यार का ।। तुम आज ना मांगो मुझसे कोई रक्षा का वचन । तुम्हारी हर खुशी के लिए समर्पित है मेरा तन मन ।। लेकिन तुम कोई अबला नारी नहीं इस युग में । तुमसे ही तो क्रांति के दीप … पढ़ना जारी रखें आज राखी के महापर्व-त्यौहार

उठो प्रतिभावान स्वर उठो

सुलग रहे अदम्य मन का ज्वाला है घुल रहे असंख्य प्रवीणता का हवाला है बिना घिसे चमक क्या आई है चमकहीन  सभ्यता हमने लाई है प्रेरणा नहीं उनमें, मैं प्रतिशतता भरते जाऊ बिना जले बाती में, मै प्रकाश कहाँ से लाऊ विरले बिना स्वृण के, चमके होगें संकेतन दीप जगत में, जहाँ दमके होगें भूले … पढ़ना जारी रखें उठो प्रतिभावान स्वर उठो

स्वतंत्रता – अजय वर्मा

अलगाव के बहुत अहसास है धर्म की आड़ है पंथों के दर्शन है मान्यताओं के भेद है वादों के सिद्धांत हैं अलगाव के बहुत अहसास है उम्र के बंधन है रिश्तो के नाम है साधनों के जश्न हैं अभावों के दर्द हैं अलगाव के बहुत अहसास है आस पाने की है डर खोने का है … पढ़ना जारी रखें स्वतंत्रता – अजय वर्मा

क्या अकेला नहीं कोई सफल होता?

  क्या अकेला नहीं कोई सफल होता? आज नहीं क्या हो सकता जो कल होता, सच्चा प्रयत्न  नहीं   कभी   विफल होता, क्या एकता में ही केवल बल होता? क्या अकेला नहीं कोई सफल होता? बौने बामन ने अकेले राजा बलि को बांधा था, तीन पग में नभ, महि और स्वर्ग तक को लांघा था। एक … पढ़ना जारी रखें क्या अकेला नहीं कोई सफल होता?